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नहीं मिल रहा अतिथि का दर्जा
संजीत त्रिपाठी
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार भले ही कलाकारों को प्रश्रय देने व उनका सम्मान करने का दंभ भरती है लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है। देश के सर्वोच्च अलंकरणो में से एक पद्मभूषण जैसे अलंकरण से सम्मानित कलाकार राज्य में आते हैं और उन्हें राज्य अतिथि का दर्जा आवेदन देने के बाद भी नहीं मिलता। दर्जा देना तो दूर पर राज्य शासन आवेदन का जवाब ही नहीं देता। हालिया मामला विश्वप्रसिद्ध वायलिनवादक पद्मभूषण डॉ एन राजम का है। डॉ एन राजम इन दिनों स्पिक मैके की विरासत श्रृंखला के तहत छत्तीसगढ़ प्रवास पर हैं।
बताया जाता है कि पद्मभूषण डॉ राजम के छत्तीसगढ़ आने से पूर्व ही स्पिक मैके संस्था के पदाधिकारियों ने उन्हें राज्य अतिथि का दर्जा दिए जाने के लिए राज्य के प्रमुख सचिव व  सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव को पत्र लिखा था लेकिन डॉ राजम के छत्तीसगढ़ आ पहुंचने के बाद भी इस पत्र का कोई जवाब स्पिक मैके को नहीं मिला। संस्था के मुताबिक  पिछली बार पद्मभूषण पंडित हरिप्रसाद  के छत्तीसगढ़ आने के दौरान भी ऐसा ही हुआ था। तब भी बकायदा  उन्हें राज्य अतिथि का दर्जा देने पत्र लिखा गया था लेकिन उस समय भी राज्य शासन की ओर से पत्र का कोई  जवाब नहीं दिया गया था। बताया जाता है कि तब तो पंडित चौरसिया नें अपनी प्रेस कांफ्रेंस में यह सवाल भी उठाया था कि राज्य सरकार की ओर से कौन है मेरे साथ, उस समय मौके पर मौजूद स्पिक मैके  के एक पदाधिकारी ने बात संभाल ली थी।
बुधवार को राजधानी पहुंची डॉ राजम के लिए न तो सरकारी गाड़ी उपलब्द करवाई गई न हीं उनकी बुकिंग सर्किट हाऊस या न्यू सर्किट हाऊस में करवाई गई। यह दोनो ही व्यवस्था  स्पिक मैके संस्था के पदाधिकारियों ने की थी। डॉ राजम को प्रशासन द्वारा पुलिस प्रोटेक्शन जरुर उपलब्ध कराई गई थी। सूत्रों के मुताबिक एयरपोर्ट पर संस्था वालों ने दो गाड़ियों की व्यवस्था की थी जिसमें पहली गाड़ी में डॉ राजम बैठीं। उनके बैठने के बाद  प्रोटेक्शन के लिए पहुंची महिला टीआई ने बैठना चाहा। इस पर संस्था के पदाधिकारियों ने उनसे निवेदन किया कि चूंकि डॉ राजम के साथ उनके संगतकार तबलावादक को बैठना और मौके पर पहुंची एक मीडियाकर्मी भी उनसे बात करना चाहती है तो चलती कार में ही उनसे बात कर लेंगी इसलिए आप पीछे वाली गाड़ी में बैठ जाइए।  लेकिन इस पर वे महिला टीआई तमक गई और यह कहते हुए चली गई कि ठीक है तो फिर आप लोग अपने जिम्मेदारी पर ले कर जाईए इन्हें। मै नहीं जाऊंगी।
और वे वहां से चली गईं। इसके बाद डॉ राजम बिना सुरक्षा के ही डीपीएस स्कूल रवाना हुई। इस पूरे मामले पर संस्था के पदाधिकारियों का यही कहना है कि प्रशासन को कम से कम भेजे गए पत्र का जवाब तो देना चाहिए चाहे वे जवाब हां में दे या न में दें।
इधर प्रदेश में राज्य अतिथि दर्जा देने का इन दिनों तरीका यह है कि सर्वाधिकार मुख्यमंत्री के पास सुरक्षित हैं, वे अपने स्वविवेक पर यह निर्णय लेते हैं कि किसे दर्जा देना है या नहीं।
 
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