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कांग्रेस बनाएगी बुंदेलखंड राज्य

सविता वर्मा 

चित्रकूट, सितम्बर। यह एक ऐसा जिला है जो दो राज्यों के बीच में ही नहीं आता बल्कि इसका जिला मुख्यालय दोनों राज्यों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। फिलहाल इस जिले में अलग बुंदेलखंड राज्य की जो कवायद चल रही है, उससे नौजवान पीढ़ी काफी प्रभावित होती नजर आ रही है। अलग बुंदेलखंड राज्य का संघर्ष नब्बे के दशक में शुरू हुआ और अभी भी जारी है। पांच करोड़ की आबादी, पांच नदियां, भरपूर प्राकृतिक संसाधन बावजूद इसके यहां के लोग सूखे और अकाल के बाद पलायन करते ज रहे हैं। इस बीच कांग्रेस की पहल से अलग बुंदेलखंड राज्य का संघर्ष फिर तेज होता नजर आ रहा है। कांग्रेस की कोशिश ये है कि अगले लोकसभा चुनाव से पहले अलग बुंदेलखंड राज्य अस्तित्व में आ जाए। बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष राजा बुंदेला इस क्षेत्र में कुछ दिनों से भ्रमण कर खजुराहो में होने वाले अलग बुंदेलखंड राज्य सम्मेलन की तैयारी कर रहे हैं। राजा बुंदेला से जो बातचीत हुई, उससे साफ संकेत मिल रहा है कि कांग्रेस पार्टी अगले लोकसभा चुनाव तक मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को काटकर पृथक बुंदेलखंड राज्य का गठन कर सकती है। इस बारे में पूछने पर राजा बुंदेला ने कहा-कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा को जो भरोसा दिया है, उससे हमें उम्मीद है कि अगले लोकसभा चुनाव से पहले अलग बुंदेलखंड राज्य अस्तित्व में आ जएगा। इस दिशा में दबाब बढ़ाने के लिए ही हम लोग चित्रकूट से खजुराहो तक हजरों की संख्या में पैदल मार्च करने वाले हैं। कांग्रेस के समर्थन वाले बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा ने पिछले दो हफ्ते से उत्तर प्रदेश में पड़ने वाले बुंदेलखंड के विभिन्न जिलों में अभियान छेड़ रखा था। अब बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा अक्टूबर से मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में राजनैतिक अभियान तेज करने जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले सात सालों से बुंदेलखंड के ज्यादातर जिले सूखे और अकाल से प्रभावित रहे हैं जिसके चलते आधी आबादी का पलायन हो चुका है लेकिन राज्य सरकार ने कोई पहल नहीं की। केन्द्रीय टीम ने पिछले साल जब बुंदेलखंड का दौरा किया तो पता चला कि बुंदेलखंड में आने वाले १३ जिलों में से आधे जिले ऐसे हैं जहां सूखा और पानी की किल्लत के चलते कमोवेश आधी आबादी का पलायन हो चुका है। जिन जिलों में सबसे ज्यादा पलायन हुआ है, उनमें चित्रकूट, महोबा, छतरपुर, टीकमगढ़, बांदा, हमीरपुर, सागर आदि शामिल हैं। बुंदेलखंड में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के १३ जिले शामिल हैं। इनके पलायन के आंकड़े गौर करने वाले हैं। महोबा की कुल आबादी ७ लाख ८ हजर ४७ है जिसमें २ लाख ९७ हजर ५४७ लोग पलायन कर चुके हैं। छतरपुर की कुल आबादी १४ लाख ७४ हजर ६३३ है जिसमें ७ लाख ६६ हजर ८0९ लोग पलायन कर चुके हैं। यह कुल आबादी का ५0 फीसदी है। इसी तरह टीकमगढ़ में १२ लाख की आबादी में करीब छह लाख लोग पलायन कर चुके हैं। बांदा की १५ लाख की आबादी करीब ७.५ लाख लोग पलायन कर चुके हैं। चित्रकूट की ७.५ लाख आबादी में से ३.५ लाख लोग पलायन कर चुके हैं। जालौन की १४ लाख ५४ लाख आबादी में से ५.३८ लाख लोग पलायन कर चुके हैं। ललितपुर की ९ लाख ७७ हजार की आबादी में ३ लाख ८१ हजर लोग पलायन कर चुके हैं। ङांसी की १७ लाख ४४ हजार की आबादी में से ५ लाख ५८ हजर लोग पलायन कर चुके हैं। सागर की २0 लाख की आबादी में से ८ लाख ४९ हजार लोग पलायन कर चुके हैं। जबकि दतिया में ३२ फीसदी, दमोह में २५ फीसदी और पन्ना में ३0 फीसदी आबादी पलायन कर चुकी है। बुंदेलखंड की बदहाली की मुख्य वजह पानी की कमी, लगातार सूखा और उद्योग धंधों की मानी जती है। केन्द्रीय टीम ने पिछले साल जब बुंदेलखंड का दौरा किया तो पता चला कि सात में से पांच जिलों में ५0 फीसदी से भी कम बारिश हुई। दूसरी तरफ बुंदेलखंड का जो इलाका मध्य प्रदेश में आता है, वहां भी स्थिति काफी खराब रही। मध्य प्रदेश में सामान्य बारिश होने के बावजूद २00६-0७ में मध्य प्रदेश में आने वाले बुंदेलखंड के छह में से पांच जिलों में २७ से ४७ फीसदी कम बारिश हुई। वर्ष २00७-0८ में ४६ फीसदी कम बारिश हुई और इस वर्ष सबसे ज्यादा स्थिति खराब है। बुंदेलखंड के ज्यादातर जिलों में सूखा पड़ा हुआ है। ऐसे में बुंदेलखंड के लोग अलग राज्य को ही इसका एकमात्र समाधान मान रहे हैं।
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