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फिर बनेगा बांध ,बेघर होंगे लोग

शिरीष खरे
हिमाचल प्र देश के सिरमौर जिले में यमुना की सहायक नदी गिरी पर 148 मीटर की ऊंचाई वाले रेणुका बांध बनाने की मंजूरी साल के पहले महीने की शुरूआती तारीखों में ही दी जा चुकी थी। 27 अरब रूपए की इस परियोजना में 23 क्यूबिक पानी मिलने और 40 मेगावाट बिजली बनाने की बातें तो जोरशोर से की जा रही है लेकिन 2000 हेक्टेयर की सिंचित जमीन के साथ-साथ 17 लाख पेड़ों के डूबने, 70 पंचायतों के प्रभावित होने, 700 परिवारों के विस्थापन और रोजीरोटी के बड़े संकट को नजरअंदाज बनाते हुए।
बीते साल नेपाल में कोसी नदी का छोटा-सा हिस्सा भी नहीं संभाल पाने से बिहार का हाल सबने देखा। लेकिन इससे सबक न लेते हुए सरकार ने भूस्खलन और भूकम्पन के नजरिए से खतरनाक माने जाने वाले ऐसे इलाके में रेणुका बांध बनेगा के फैसले को?राष्ट्रीय परियोजना से जोड़?दिया है। स्थानीय लोग कहते हैं कि जब इसी नदी में 60 मेगावाट क्षमता वाले गिरीबांटा बांध से सलाना 8-10 मेगावाट बिजली ही बन पा रही है तो ऐसे में 40 मेगावाट बिजली बनाने का सरकारी दावा सफेद झूठ से ज्यादा कुछ भी नहीं। रही दिल्ली के पानी पीने की बात तो पहले कुर्बानी देने वाले हिमाचल और हरियाणा के प्रभावित लोगों को सिंचाई और पीने का पानी तो दिया जाए। जब देश के बाकी जगहों से सब्जियां और फल पैदा होना बंद हो जाते हैं तब यहां की उपजाऊ जमीन से कई नकदी फसलों जैसे अदरक, लहसुन, टमाटर, शिमला मिर्च, बीन, बैगन और फूलों की खेती होती हैं। इसके अलावा गेहूं, मक्का, धान और दालों की भी अच्छी पैदावार होती है।?सत्ता के आसपास भटकने वाले कई राजनैतिक दल इन दिनों रोजगार की बातें कर रहे हैं, यहां के लोग चाहते हैं कि सरकार लिखित में वचन दे कि कितने हजार को रोजगार मिलेगा। जहां तक पुनवार्स की बात है तो इसमें सिंचित जमीने के बदले सिंचित जमीन और हर घर से एक नौकरी देने जैसी जरूरी मांगों को हवा में उड़ाया जा रहा है। राष्ट्रीय जैवविविधता प्राधिकरण? कमिटी की विशेषज्ञ समिति ने सामुदायिक निकाय से संपर्क किए बगैर अब तक करीब 400 आवेदनों को पास कर चुकी है जबकि सामुदायिक निकाय से संपर्क करना उनके लिए जरूरी था।
मेधा पाटेकर ने बिलासपुर में आयोजित रैली में कहा कि- ‘‘ऐसी परियोजना से विस्थापित लाखों लोगों का पुनावार्स नहीं हुआ है और सरकारे पर्यावरण को बचाने में नाकामयाब रही हैं। ऐसे में हिमाचल के लोग मुआवजा की बजाय?प्रकृति??का संरक्षण चाहते हैं।’’ उन्होंने आगे कहा कि- ‘‘जब भाखड़ा बांध के विस्थापितों को उनका हक आज तक नहीं मिला जब रेणुका बांध वाले कैसे उम्मीद बांध सकते हैं।’’ ऐसे में रैली में एक नारा गूंजा- ‘‘भाखड़ा वालों को पहले बसाओ फिर रेणुका को हाथ लगाओ।’’ इस बांध से प्रभावित होने वाली महिलाओं ने इस बार रक्षाबंधन के मौके पर पेड़ों की सलामती के लिए ‘राखी अभियान’ चलाकर सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की। इसके पहले 6 गांवों के 400 ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार भी किया था ।?
 
 

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