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मालद्वीव में लैगून के बदलते रंग

 सविता वर्मा 

बारिश के बाद मौसम साफ हो चुका था पर उमस थी। केरल की इस राजधानी में आप अंनत मानसून हमेशा महसूस कर सकते है। मालद्वीव के लिए तिरूअन्नतपुरम के अंर्तराष्ट्रीय हवाई अड्डे की औपचारिकाताए पूरी होने के बाद हम विमान में पहुंचे तो ज्यादातर सीटें भरी हुई थी। तिरूअन्नतपुरम से माले की उड़ान चालीस मिनट की है। हम दस मिनट बाद ही विमान के एयर पाकेट में फसते ही समस्या शुरू हो गई। कुछ ही देर में व्योम बालाए आवभगत में जुट गई। हालांकि मदिरा की पेशकश जरूर अटपटी लगी। कुछ देर बाद ही हम राजधानी माले के हवाई अड्डे पर थे यह हवाई अड्डा अलग द्वीप पर है जहां से हर पंद्रह मिनट बाद राजधानी के लिए नौका उपलब्ध रहती है। भाड़ा सिर्फ एक डालर है। माले में एक रात बिताने के बाद हमे एक पर्यटकों के एक खूबसूरत द्वीप पर जाना  था जो हवाई अड्डे से करीब २0 किमी की दूरी पर था। साथ में थी चेन्नई से आई रजनी। मालद्वीप में वीज की जरूरत नहीं होती। वहां उतरते ही वीज दे दिया जता है। भारत से सटे इस द्वीप के बारे में काफी सुना था। जिसकी वजह से उत्सुकता भी ज्यादा थी। मालद्वीप के २६ द्वीप समूहों में ११९२ छोटे-छोटे द्वीप है लेकिन आबादी सिर्फ २00 द्वीपों पर ही है। यहां का मुख्य व्यवसाय पर्यटन है जिसकी वजह से ८७ द्वीप रिसॉर्ट में बदले जा  चुके है। उथूले हवाई अड्डे से गरीब २0 किमी की दूरी पर समुद्र में हरे नारियल के पेड़ों से घिरा है फोर सीजन र्सिाट । उत्तरी माले के इस द्वीप पर मोटर बोट से पहुंचने में हमे आधा घण्टा लगा। और जसे ही लैगून के हरे नीले पानी में पहुंचे ,सामने का दृश्य देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। मूंगे के इस अदभूत द्वीप में समुद्र का पानी रंग बदलता है तो आसमान के बादल सूरज की  किरणों का  रंग बदल देते है। लैगून के हरे नीले पानी पर कहीं छाया है तो कहीं धूप। नारियल के किसी पेड़ की छाँव  में खड़े होकर आप आश्वस्त भाव से समुद्र के बदलते रंगों को देख सकते है। सफेद बालू के किनारों पर नारियल पेड़ों की हरियाली है तो हरे समुद्र में सुर्ख मछलियों के झुंड नये-नये दृश्यों की रचना करते नजर आते है। बादलों के ओट से निकलती सूरज की किरणों जब इन मछलियों पर पड़ती है तो वे चमक उठती है। इससे पहले गहरे समुद्र से गुजरते हुए जब मोटरबोट हवा में पत्ते की तरह बह रही थी तो हम डर कर नाव के एक सिरे को पकड़े हुए थे । साथ ही मना रहे थे कि जल्द ही लैगून के उथले पानी में पहुंचे। डर की वजह बड़ी-२ लहरें थी जो कभी आती तो लगता सिर के ऊपर से गुजर जएगी। हर कुछ मिनट बाद नाव लहरों से संघर्ष करती नजर आती थी। इस बीच दूर से ही समुद्र के बीच हरियाली दिखी तो हमारी जन में जन आई। हरे पेड़ों के गुलदस्ते को देखकर मोटर चला रहे नाविक ने कहां-आईलैण्ड आ गया है जल्दी ही हम लैगून के पानी मे आ जएगें। 
यह द्वीप र्सिाट काफी बड़ा था जहां पांच सितारा स्पा से लेकर स्कूबा डाइविंग की सुविधा उपलब्ध थी। सामने ही चमकती रेत पर नारियल के छोटे पेड़ के साथ एक छोपड़ी खड़ी थी। इसके नीचे एक विदेशी जोड़ा नजर आ रहा था। रिसॉर्ट  के बीच बंगले का परिसर काफी विशाल था और हिन्द महासागर की तरफ समुद्र तट का एक छोटा सा टुकड़ा इसके दायरे में था। बंगले में ठहरने वालों के लिए यह निजी समुद्र तट एकांत का नया एहसास कराता था। लैगून के हरे पानी में दूर तक उतरने पर भी रंग-बिरंगी मछलिया साथ नहीं छोड़ती थी और कभी- कभी तो छोटे आक्टोपस तेज रफतार से भागते नजर आते थे। द्वीप पर कई तरह की आलीशान आवासीय सुविधाए देखने वाली थी। नवराना वाटर विला इनमें सबसे शानदार थी। सागौन की लकड़ी के फर्स और समुद्र की तरफ बनी शीशों की दिवार हो या फिर सन डेक। लैगून के पानी में खम्भों पर टिका यह आशियाना पूरे माहौल को रूमानी बनाने वाला था। सूर्यास्त के समय सूरज लाल होकर दहक रहा था तो दूसरी तरफ रात के खाने की तैयारी शुरू हो चुकी थी। एक जोड़ा स्नार्ति के जरिए जलचरों का दर्शन करने के बाद ३0 डिग्री पर मुड़े नारियल के बूढ़े पेड़ के नीचे मदिरा की चुस्कियां लेता नजर आ रहा था। दूसरी ओर दहकता सूरज समुद्र में समाहित होने को बेकरार था। रेस्तरा से मछलियों की भूनने की गंध हवा में थी तो बैरा नसीर बता रहा था कि टूना मछली का स्वाद सबसे अलग होता है। मालद्वीप से भारत का खास रिश्ता रहा है।
यहां की आबादी में ज्यादातर लोग दक्षिण भारत से आए हुए है। इतिहास के मुताबिक यहां पर ३000 हजार  साल से लोग रह रहे है। इसका नाम संस्कृत के मालाद्वीप यानि द्वीपों की माला से बना है। जबकि कुछ लोग मानते है। यह नाम अर्जी के महल का बिगड़ा हुआ रूप है। सोलहवीं सदी से पहले यहां पुर्तगालियों का राज्य था। उसके बाद डच और ब्रिटिश  हुकूमत ने इसे अपना उपनिवेश बनाया। मालद्वीप १९६५ में आजाद  हुआ। मालद्वीप की राजधानी माले है यहां एक तिहाई आबादी रहती है। जबकि बाकी आबादी अलग- अलग द्वीपों पर रहती है। पर्यटकों के लिए मालद्वीप आकर्षण का मुख्य केन्द्र है। छोटे- छोटे खूबसूरत द्वीपों पर जकर पर्यटक प्राकृतिक सुंदरता खो जता है। यहां के प्रमुख पर्यटन केन्द्रों में इस्लामिक सेन्टर १९0६ में बना महल मुल्ली आगी जो अब राष्ट्रपति का दफ्तर है, सत्रहवीं सदी की बनी जमा मस्जिद और राष्ट्रीय संग्रहालय देखने वाले है।
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