ताजा खबर
शुरुआत तो ठीक ही हुई है महाराज ! केशव प्रसाद मौर्य होंगे यूपी के सीएम ? उत्तर प्रदेश में मोदी का रामराज ! आधी आबादी ,आधी आजादी?
उतराखंड में वन्दे मातरम

 राज कुमार शर्मा 

देहरादून - जब पूरा प्रदेश राज्य की 9वीं वर्षगांठ पर खुशीयां मना रहा था हर्ष उल्हास का वातावरण था सूबे के मुख्यमंत्री डा.रमेश पोखरियाल निषंक ने वंदे मातरम के सवाल पर कहा कि जिन लोगों को वंदे मातरम् गाना पसंद नही है वे लोग इस प्रदेश एवं देश को छोड़ने का राह चुन लें । यह वकतव्य मुख्यमुत्री ने पूरी रूची पूर्वक लेकर यह संदेष देने की कोशिश किया कि इस देश में अभी नरेद्र मोदी की कमी नही है।
निषंक के इस बयान को राजनीती के जानकार यह कहते हैं कि मुख्यमंत्री अपनी असफलता पर पर्दा डालने के लिए वंदे मातरम् का सहारा ले रहे हैं जबकि इससे पुर्व सूबे के मुख्यमुत्री रहे बीसी खण्डूडी नें कुछ भी बोलने से मना किया आर केवल इतना ही कहा कि जहां लोग बुनियादी समस्याओं से जुझ रहे हों वहां इस तरह की बातों पर बतंगड खड़ा करना प्रदेश  हित में नही है।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री निषंक ने अपने 10 मिनट के भाषण में सर्वाधिक समय वंदेमातरम् के गायन के सवाल पर व्यतीत किया और कहते कहते यहां तक कह गए कि जो लोग वंदे मातरम् नहीं गा सकते उन्हें प्रदेश  एवं देश छोड़ने पर विचार करना चाहिए। उनका इषारा एक वर्ग के लोगों की ओर था और उनका मानना है कि फतवा देने और मानने वाले किसी तरह से देष के वफादार नही हो सकते। 
उत्तराखण्ड राज्य के पांचवें मुख्यमंत्री के रूप में जिस तरह का बयान अपनी असफलताओं एवं राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए निषंक ने दिया उसपर सूबे के तमाम राष्टभक्त नागरिकों को भी हैरानी हो रही है। उनका मानना है कि यहां राज्य की जनता तंगहाली का जीवन जी रही है। कुंभ 2010 पूरी तरह लूट खसोट का षिकार हुआ है, षिक्षा विभाग पूरी तरह माफीयाओं की चपेट में है, राज्य की मित्र पुलिस का चेहरा विभत्स हो चुका है, जनप्रतिनिधियों की थाना परिसर में हत्या हो रही हो अपराधी बेलगाम हो राज्य का पर्यटन उद्योग दम तोड़ रहा हो एवं राज्य की पहाड़ी जनता राजधानी के सवाल पर गैरसैंण की मांग को लेकर सड़कों पर हो एैसे में मुख्यमंत्री का बुनियादी मुद्दों को भूलाकर वदेंमातरम् के सवाल पर जनता को उलझाना और वर्ग विषेष को चोट पहुचाना सूबे के प्रबुद्ध लोगों को रास नहीं आया मुख्यमंत्री को स्थापना दिवस पर आत्म चिंतन एवं आत्म निरीक्षण करके प्रदेश की दबी कुचली जनता के लिए लोक कल्याण कारी योजनाओं को सफलीभूत बनाने के लिए राज्य के पर्यटन उद्योग को सवांरने के लिए एवं कुंभ 2010 में हो रही खुली लूट पर अंकुष लगाने का प्रयास करना चाहिए ना कि सूबे को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की राह पर धकेलने की कोषिष करना चाहीए जानकारों के अनुसार निषंक के इस तरह के भाषण से भाजपा के तीन मुख्यमुत्री रहे नित्यानंद स्वामी, भगत सिंह कोष्यारी एवं बीसी खण्डूडी भी ताल्लुक नहीं रखते ।
 
email ईमेल करें Print प्रिंट संस्करण
  • जहां पत्रकारिता एक आदर्श है
  • जहां आये कामयाब आये
  • नामवर की नियति
  • चिड़िया ते बाज तुड़वाऊं?
  • प्रभाष जोशी और इंडियन एक्सप्रेस परिवार
  • एक ऋषि की यात्रा का अंत
  • असली मैदान तो यूपी बनेगा
  • राजकाज
  • भगतों की चांदी है
  • मेरठ के बांके!
  • बाबरी विध्वंस की आयी याद
  • इतिहास में उपेक्षित तिलका मांझी
  • आखिरी पड़ाव गोमोह जंक्शन
  • संगम के अखाड़े में लेफ्ट-राइट
  • एक थे लोकबंधु राजनारायण
  • अपनी जमीन ही नसीब हुई
  • रवीश के सामाजिक सरोकार
  • गिरोह क्यों कहते हैं
  • ई राजेंद्र चौधरी कौन है ?
  • मीडिया में धूमते चेहरे
  • Post your comments
    Copyright @ 2016 All Right Reserved By Janadesh
    Designed and Maintened by eMag Technologies Pvt. Ltd.