ताजा खबर
शुरुआत तो ठीक ही हुई है महाराज ! केशव प्रसाद मौर्य होंगे यूपी के सीएम ? उत्तर प्रदेश में मोदी का रामराज ! आधी आबादी ,आधी आजादी?
किसानों की नजर दिल्ली पंचायत पर

 अंबरीश कुमार

लखनऊ,  नवंबर। उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों की नजर कल दिल्ली में हो रही किसान पंचायत पर है। गन्ने  की कीमत को लेकर उत्तर प्रदेश में गन्ना किसान बंट गए हैं। एक खेमा केन्द्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली में मोर्चा खोले हुए है तो दूसरा खेमा उत्तर प्रदेश में सहकारी व सरकारी चीनी मिलों के साथ नए समझौता मूल्य पर गन्ना देने को तैयार हो गया है। चार चीनी मिलें चालू हो चुकी हैं और करीब आधा दजर्न जल्द शुरू होने वाली हैं। उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के ङांडे तले करीब आधा दजर्न किसान संगठन विभिन्न चीनी मिलों को नए फामरूले के तहत गन्ना देने को तैयार हो गए हैं। हालांकि इस मुद्दे को लेकर कई जगहों पर किसानों के बीच टकराव भी हुआ है।
उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों का आंदोलन बंट गया है। एक तरफ राष्ट्रीय लोकदल और भारतीय किसान यूनियन केन्द्रीय अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली में मोर्चा लगाए हुए हैं जिनके साथ कई राजनैतिक दल भी जुड़ गए हैं। गन्ने  की कीमत को लेकर केन्द्र सरकार ने जो एफआरपी यानी उचित एवं लाभकारी मूल्य तय किया है, उसके खिलाफ ज्यादातर राजनैतिक दल गोलबंद हो गए हैं। लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित सिंह इसकी अगुवाई कर रहे हैं।
उन्होंने गन्ना किसानों के सवाल को लेकर कई राजनैतिक दलों के नेताओं से बातचीत की है। जिसमें भाकपा, माकपा, तेलगू देशम, भाजपा और समाजवादी पार्टी जसे दल भी शामिल हैं। इस मुद्दे पर कल संसद घेरने की तैयारी है। जन संघर्ष मोर्चा के संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा, ‘कांग्रेस गठबंधन सरकार ने गóो की कीमत को लेकर जो अध्यादेश जरी किया है, वह किसानों के विरूद्ध आपातकालीन युद्ध का एलान है। इस अध्यादेश के चलते किसानों को खेती से बेदखल करने की साजिश रची जा रही है। सरकार को फौरन ही इसे वापस लेना चाहिए वरना किसान इसका माकूल जवाब देगा। इस अध्यादेश के खिलाफ हम किसानों के आंदोलन के साथ हैं।’
दूसरी तरफ राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह के नेतृत्व में मंगलवार को लखीमपुर के पलिया में किसानों की पंचायत हुई। इस पंचायत में आधा दजर्न किसान संगठनों से जुड़े हजरों किसानों ने हिस्सा लिया। बाद में वीएम सिंह ने जनसत्ता से कहा, ‘उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों का इस अध्यादेश से कोई लेना-देना नहीं है। हम सुप्रीम कोर्ट तक लड़ रहे हैं और अदालत के निर्देशों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को वही कीमत मिलेगी जो समझौता  के तहत तय की जएगी। हम लोगों ने सरकारी व सहकारी चीनी मिलों के साथ जो फामरूला तय किया है, उसके तहत १८0 रूपए कुंतल की कीमत फिलहाल ये चीनी मिलें देंगी लेकिन अगर क्षेत्र में किसी भी चीनी मिल ने इससे ज्यादा कीमत दी तो फिर सभी को वही कीमत देनी होगी। हमारी कोशिश गन्ने  की गिरती कीमतों को थामते हुए किसान को ज्यादा से ज्यादा दाम दिलाने की है। इसमें केन्द्र सरकार के एफआरपी का कोई लेना-देना नहीं है। जो लोग दिल्ली में आंदोलन कर रहे हैं, वे किसानों के नाम पर राजनैतिक रोटियां सेंक  रहे हैं। यही वजह है कि दिल्ली में टिकैत के साथ करीब डेढ़ हजर लोग ही बैठे हैं।’
ये वही वीएम सिंह हैं जिन्होंने कुछ दिन पहले गढ़मुक्तेश्वर में गंगा जल लेकर सौगंध खाई थी कि किसान आंदोलन बिखरने नहीं देंगे। पर अब वीएम सिंह का मानना है कि टिकैत उन अजित सिंह के साथ ज रहे हैं जिनके प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अरूण जेटली से लेकर वीरेन्द्र भाटिया जसे लोग कर रहे हैं।अरूण जेटली और वीरेन्द्र भाटिया चीनी मिल मालिकों के वकील रहे हैं। भाटिया ने तो २००७ में गन्ने  की कीमत घटवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। हम इन लोगों के साथ नहीं ज सकते। दूसरे केन्द्रीय अध्यादेश का असर सिर्फ कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात जसे राज्यों पर पड़ना है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मौजूदा हालात में गन्ना किसान अपनी फसल को ज्यादा समय तक खेत में नहीं रख सकता। गेंहूं के लिए खेत तैयार करने का वक्त आ रहा है। ऐसे में हम लोगों ने चीनी मिलों को नए फामरूले के तहत गन्ना देने का फैसला किया है।दरअसल उत्तर प्रदेश में गन्ने  की कीमत को लेकर किसानों ने जो आंदोलन शुरू किया था, वह अब दो खेमों में बंट चुका है। जबकि किसानों का तीसरा खेमा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ २0 नवंबर को संसद पर प्रदर्शन करने ज रहा है।किसान मंच के अध्यक्ष विनोद सिंह ने कहा-गन्ना का सवाल तो तब होगा जब जमीन बचेगी। हम तो भूमि अधिग्रहण के सवाल पर किसानों को लेकर संसद जाने  की तैयारी कर रहे हैं। हम लोग १८९४ के भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन करने वाले बिल को संसद से पास कराने का दबाब बना रहे हैं।
जनसत्ता 
email ईमेल करें Print प्रिंट संस्करण
  • छीना जा रहा है खेत
  • हर दल के एजंडा पर किसान
  • गले की हड्डी बना किसान आंदोलन
  • गरीबों के खेत पर अमीरों की सड़क
  • विधान सभा घेरेंगे आदिवासी
  • राजपथ पर बेवाई फटे पैर
  • बुलडोज़र की दहशत में नींद गायब
  • देश का गन्ना विदेश चला
  • एक और मोर्चा खोलेंगे दादरी के किसान
  • जीते किसान हारी सरकार
  • गावं में मौत, शहर में महोत्सव
  • शहीदो से भी डरती सरकार
  • गोरखपुर का मजदूर आन्दोलन
  • आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे- टिकैत
  • UP Plans for Power Project in JV with Neyveli Corp hit roadblock
  • खेत बचाने में जुटी हजारों विधवाएं
  • Belligerent Maya Targets SP and congress
  • Netas Of UP Set To Be IT Savvy
  • सड़क पर उतरे विदर्भ के किसान
  • Manipur-A State of Ban/Bane of Ban
  • Post your comments
    Copyright @ 2016 All Right Reserved By Janadesh
    Designed and Maintened by eMag Technologies Pvt. Ltd.