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देश का गन्ना विदेश चला

 एसके सिंह  

सोनौली(भारत-नेपाल सीमा )। पूर्वांचल में गन्ने की पैदावार कम होने के चलते चीनी मिलों में प्राइसवार छिड़ गई है ,तीन दिन पूर्व तक  गन्ने के रेट के लिए एस्मा के रेट की दुहाई देने वाली चीनी मिलें आ मुंहमांगी कीमत देने को तैयार हैं । उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की चीनी मिलों में प्राइसवार ता छिड़ी जा पड़ोसी राष्टÑ नेपाल में गन्ने की बड़े पैमाने पर तस्करी शुरू हो गई । नेपाली चीनी मिलों ने एक सोची समझी रणनीति के तहत गन्ने का खरीद मूल्य 250 रूपए प्रति कुंतल निर्धारित कर दिया । यह पता चलते ही  नेपाल सीमा से लगने वाले महराजगंज, कुशीनगर और सिद्धार्थनगर के किसानों को लगी तो उनमें खुशी का ठिकाना न रहा ।बड़े पैमाने पर भारत से नेपाल में गन्ने की तस्करी होने लगी । यह खबर जबतक शासन प्रशासन तक पहुंची और तस्करी रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए तबतक हजारों कुंतल  गन्ना नेपाल जा चुका था । मंडलायुक्त ने गन्ने की तस्करी रोकने के लिए गन्ना अधिकारियों के साथ ही पुलिस प्रशासन को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं । गन्ना तस्करों को रासुका तक में निरूद्ध करने को कहा गया है । 
गन्ने की कीमतों में प्रतिस्पर्धा आने की प्रमुख वजह गन्ने की डिमांड और उत्पादन में काफी अंतर होना ाताया जा रहा है । कीमतों में अचानक आई तेज उछाल के लिए देश के  किसान नेपाली चीनी मिलें के प्रति दिल से घन्यवाद ज्ञापित कर रहे हैं । किसानों का कहना है कि यदि नेपाली चीनी मिलों के लिए गन्ने की खरीद करने भारतीय सीमा में तस्करों की फौज नहीं आई होती तो चीनी मिलों के मालिकानों और प्रशासनिक अधिेकारियों की आंख नहीं खुलती । 
खार है प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी गन्ने की तस्करी हो रही है । गन्ने की तस्करी के लिए तस्करों ने सुबह का समय चुना है। प्रशासन गन्ने की तस्करी रोकने के लिए जबतक रोज सक्रिय होता है तबतक  सैकड़ों कुतल गन्ना इसपार से उसपार हो जाता है ।बताया गया कि मंडलायुक्त पी.के.महांति के निर्देश पर नेपाल सीमा पर एसडीएम निचलौल ने खुद पेट्रोलिंग की । अधिकारियों का कहना है कि गन्ने की तस्करी देश को नुक्सान पहुचने का काम है जिसे कतई ार्दाश्त नहीं किया जाएगा। गन्ने की तस्करी रोकने के लिए उपजिलाधिकारियों के साथ ही पुलिस उपाधीक्षकों और थानेदारों को लगातार पेट्रोलिंग करने का निर्देश दिया गया है । प्रशासन के कड़े तेवरों का असर पड़ा है और आ  दिन में कार्यालयी अवधि में गन्नें की तस्करी बंद हो गई है ।
दूसरी तरफ भारतीय  किसानों का रूख नेपाली चीनी मिलों की ओर होने से भारतीय मिलों में खलबली मची हुई है । मिलों को डिमांड के अनुसार  गन्ने की आपूर्ति तो मिलने से रही क्योंकि पैदावार ही कम है, भारतीय य मिलों का गन्ना नेपाली चीनों मिलों के पास जाना  भारतीय  चीनी मिल मालिकानों को बुरी तरह खल रही है ।  यही वजह है कि पिछल्ले शुक्रवार को अचानक  कई चीनी मिलों ने गन्ने का खरीद मूल्य बढा दिया । गोरखपुर की सरदार नगर चीनी मिल द्वारा 215 से 220 रूपए प्रति कुंतल के रेट पर गन्ने की खरीद का ऐलान किया गया तो आस पास के चीनी मिलों में खलबली  मच गई। रेट बढ़ते ही सरदारनगर चीनी मिल पर  गन्ने की आपूर्ति करने वालों का तांता लग गया । गन्ने की छिड़ी प्राइसवार में आ तक गोरखपुर महराजगंज और कुशीनगर जिले की आधा दर्जन से अधिक चीनी मिलें शामिल हो गई हैं । खडढा चीनी मिल ने गन्ने की खरीद 200-205 में शुरू कर दी है तो ढाढा चीनी मिल ने एक कदम आगे बढ़ाकर 220 रूपए  में खरीद शुरू कर दिया है । प्रतापपुर,रामकोला,बभनान और वाल्टरगंज की चीनी मिलें  गन्ने की कमी से जूझ रही है।  कप्तानगंज चीनी मिल ने कहा है कि जो किसान मिल गेट पर गन्ना लाएंगे उन्हें 215 से 220 रूपए प्रति कुंतल के हिसाा से गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाएगा। 
पूर्वांचल की चीनी मिलों में छिड़े प्राइसवार के बारे में उपायुक्त गन्ना पूर्वी क्षेत्र अमर सिंह से पूछे जाने पर पहले तो हैरानी जताई फिर कहा आपको लगता है जानकारी नहीं है सरकार ने गन्ने की खरीद मूल्य प्रति कुंतल 165-170 रूपए निर्धारित किया है । दूसरी रही बात गन्ने की तस्करी की तो किसान उसी गन्ने की तस्करी कर सकेगा जो एक्सेस होगा और वर्तमान समय में तो गन्ने की कमी पहले से ही है ऐसे में यह संभव नहीं है कि गन्ने तस्करी हो सके । जा उनसे कहा गया कि हाल ही में मंडलायुक्त से गन्ने की तस्करी नेपाल में किए जाने की शिकायत की गई है जिस पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं ,क्या इस बारे में आपके पास शिकायतें नहीं पहुंची तो सिंह ने कहा उन्हे ही तो पहले इसकी जानकारी मिली थी उन्ही ने महराजगंज के जिलाधिकारी से इस बारे में बैठक कराकर कार्रवाई कराने का निर्देश जारी कराया है ।
पूर्वांचल में गन्ने की पैदावार में लगातार हर वर्ष तेजी से गिरावट आ रही है । इस बारे में गन्ना विभाग  के उच्चाधिकारियों के चेहरे पर भले  ही चिंता की लकीरें न हो पर चीनी मिलों  और पूर्वाचल के हितचिंतक किसान नेताओं को यह चिंता खूब सता रही है । गोरखपुर के चौरीचौरा क्षेत्र में गन्ना किसानों की लड़ाई लड़ रहे शहीद बंधू सिंह के वंसज और भाजपा नेता विनय कुमार सिंह बिन्नू ने कहा कि एक तो वैसे ही एक एक   कर चीनी मिलें बंद हो रही है दूसरे जो चीनी मिलें चल रही  हैं उन्हे मिलों की क्षमता के अनुसार गन्ना ही नहीं मिल पा रहा है , इसकी एक ही वजह है सरकार और मिलों की सांठगांठ के बीच  गन्ना किसान पिस रहा है जिससे गन्ने की खेती के प्रति उसका लगाव तेजी से कम हो रहा है । गोरखुपर में जहां वर्ष 2008 में कुल 6900 हेक्टेयर पर  गन्ने की खेती की गई थी वहीं इस वर्ष 2009 में गन्ने की खेती 35 प्रतिशत घटकर 5700 हेक्टेयर रह गई है ।
 
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