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नगा साधु चलाएंगे हरित अभियान

 रीता तिवारी, कोलकाता

कोपेनहेगेन में बीते महीने आयोजित जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का नतीजा भले खास नहीं रहा हो, ग्लोबल वार्मिंग के खतरों पर अभियान की गति कम नहीं हुई है. अब हिमालय के ग्लेशियर पिघलने से प्रभावित होने वाले नगा साधु भी इसके खिलाफ हरित अभियान में शामिल होंगे. इस महीने हरिद्वार में होने वाले महाकुंभ से ही वे ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते खतरों के प्रति जागरुकता पैदा करने का अभियान शुरू करेंगे. जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर सोहम बाबा कहते हैं कि ‘कुंभ मेला अपनी तरह का सबसे बड़ा आध्यात्मिक जमावाड़ा होता है. इसलिए हमने धरती को बढ़ते वैश्विक तापमान से बचाने की पहल वहीं से शुरू करने का फैसला किया है.’ जूना अखाड़ा ढाई लाख से ज्यादा नगा साधुओं का संगठन है.
कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उनका कहना था कि कुंभ के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के अलावा भारी तादाद में पत्रकार भी मौजूद रहेंगे. हम वहीं से धरती बचाओ अभियान शुरू करेंगे. यह अभियान पूरी दुनिया में चलाया जाएगा. वे कहते हैं  कि ‘हम साधुओं पर ग्लोबल वार्मिंग का असर सबसे पहले पड़ता है. इसके चलते हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर पिघल रहे हैं.’ सोहम बाबा के मुताबिक, उनको लगभग 25 साल पहले ही ग्लोबल वार्मिंग के असर का पता चला था. यह कोई नई बात नहीं है. अब पूरी दुनिया के कुछ जागरूक होने की वजह से इस मुद्दे पर शोर ज्यादा हो रहा है.
कुंभ मेले के दौरान नगा समुदाय विभिन्न क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से घरती को बचाने और आम लोगों को इससे आगाह करने के लिए एक हस्ताक्षर अभियान भी शुरू करेगा. हिमालय क्षेत्र में रहने के दौरान इन साधुओं ने ग्लोबल वार्मिंग के असर और पिघलते ग्लेशियरों की जो तस्वीरें खींची हैं उनकी एक प्रदर्शनी भी कुंभ मेले में आयोजित की जाएगी.
सोहम कहते हैं कि ‘कुछ दशक पहले तक हिमालय क्षेत्र में पक्षियों और फूलों की ढेरों प्रजातियां थी. लेकिन ग्लोबल वार्मिंग की वजह से अब वे धीरे-धीरे विलुप्त हो रही हैं.’ वे कहते हैं कि हिमालय की ऊंची पहाड़ियों पर जाकर साधना करने वाले हम जैसे साधुओं को इस खतरे का सामना सबसे पहले करना होता है. गंगोत्री ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहा है. कुछ साल के भीतर ही बदरीनाथ तक पहुंचना असंभव हो जाएगा. पहाड़ियों पर बनी झीलें और झरने तेजी से सूख रहे हैं. उन्होंने इस मसले पर बीते साल नवंबर में संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के साथ भी बातचीत की थी.
महामंडलेश्वर ने दावा किया कि वे योग और ध्यान के लिए हिमालय की सात गुफाओं का इस्तेमाल करते रहे हैं. इनमें से पांच ग्लेशियरों पर हैं. वे सब तेजी से पिघल रहे हैं. कई जगह बर्फ की परत इतनी पतली हो गई है साधुओं के लिए खतरा पैदा हो गया है. कई जगह अब बर्फ की जगह घास नजर आने लगी है. सोहम बाबा कुंभ के दौरान दलाई लामा से भी इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करेंगे. 
 
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