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आडवाणी ने बनाया -सुषमा

 संजय सिंह/स्मिता 

नई दिल्ली. भाजपा में नेता विपक्ष के पद पर पहुंचने वाली पहली महिला नेता सुषमा स्वराज का कहना है कि लालकृष्ण आडवाणी ने लोकसभा चुनाव के बाद ही उन्हें अपना उत्तराधिकारी बनाने का फैसला कर लिया था। सुषमा स्वराज ने ‘भास्कर’ से एक विशेष इंटरव्यू में दिल खोलकर उन तमाम परिस्थितियों की चर्चा की, जिसके तहत उन्हें यह पद मिला। पेश हैं इंटरव्यू के मुख्य अंश :
क्या कुछ वरिष्ठ नेता आपको नेता विपक्ष बनाने के विरोध में थे?
बिल्कुल नहीं। आडवाणीजी ने लोकसभा चुनाव के नतीजे आते ही जब यह पद छोड़ने का मन बनाया, तभी उन्होंने मुझे अपना उत्तराधिकारी बनाना तय कर लिया था। संघ ने भी इसे बहुत अच्छा चुनाव करार दिया। मगर मैंने साफ कर दिया था कि मैं उस संसदीय टीम में नेता विपक्ष बनने को तैयार नहीं हूं, जिसमें आडवाणीजी एक सामान्य सांसद की तरह बैठें। किसी ने कांग्रेस के संविधान की मिसाल दी जिसमें सोनिया गांधी संसदीय दल की अध्यक्ष हैं और दोनों सदनों की नियुक्तियां कर सकती हैं। हमने ऐसा ही संशोधन करके आडवाणीजी को अध्यक्ष बनाने का रास्ता निकाला।
2014 के आम चुनाव में आप प्रधानमंत्री पद की दावेदार होंगी?
मैं समझती हूं कि पीएम पद के दावेदार का सवाल फिलहाल प्रासंगिक नहीं है। अभी तो मुझे, अरुण जेटली व नितिन गडकरी को मिलकर संगठन को देखना है और भाजपा को एक बेहतर विकल्प बनाना है।
नई व्यवस्था में आडवाणी की कितनी सक्रियता होगी?
संसदीय दल यानी दोनों सदनों के भाजपा सांसदों के अध्यक्ष के नाते वे पहले की ही तरह संसदीय दल की नियमित मंगलवारीय बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। इसके अलावा एनडीए नेताओं से मिलकर सदन में रणनीति तय करना और दूसरे मामलों में भी वही नेतृत्व करेंगे।
क्या आडवाणी एनडीए के अध्यक्ष भी बनेंगे?
एनडीए के अध्यक्ष तो अटल बिहारी वाजपेयी ही रहेंगे। भले ही वे सक्रिय न हों, मगर उनका नाम ही आशीर्वाद है। हां, नियमित कामकाज के लिए आडवाणीजी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने पर बात हो सकती है, मगर यह भी अटल जी की सहमति से ही होगा।
2004 में सोनिया गांधी को पीएम बनाए जाने के प्रस्ताव का आपने विरोध किया था। अब आपके रिश्ते कैसे हैं?
नेता विपक्ष बनने के बाद मैंने जिन तीन लोगों से जाकर मुलाकात की, उनमें सोनिया गांधी भी हैं। क्योंकि वे सत्ताधारी यूपीए की अध्यक्ष हैं। दिलचस्प बात यह है कि हमारी बातचीत बहुत बढ़िया हुई और उन्होंने सारी बात हिंदी में ही की। उन्हें प्रधानमंत्री बनाए जाने के प्रस्ताव का विरोध करना मेरी देश के प्रति जिम्मेदारी थी। लेकिन बतौर नेता विपक्ष उनसे मिलना मेरी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी थी जिसे मैंने पूरा किया।
 
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