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बर्फबारी ,जंगल और तस्करी

 राजेंद्र जोशी  

चमोली/जोशीमठ । वन्य जीवों की तस्करी का स्वर्ग चमोली आजकल वन्य जीव तस्करों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। उंची चोटियों पर लगातार हो रही बर्फबारी के बाद वन्य जीव नदी घाटी वाले स्थानों की ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन यहां पहले से तैनात तस्कर उन्हें मारने में कोई चूक नहीं कर रहे हैं। मुखबिरों से मिली सूचना के बाद जिले के सभी वन विभाग अब सक्रिय हो रहे हैं।
चमोली जनपद में केदारनाथ वन प्रभाग, बदरीनाथ वन प्रभाग, अलकनंदा वन प्रभाग और नंदा देवी राष्टीय पार्क चार वन प्रभाग हैं। इनमें सबसे अधिक वन्य जीव केदारनाथ वन प्रभाग व नंदा देवी राष्टीय पार्क में मौजूद हैं। चूंकि केदारनाथ वन प्रभाग चमोली और रुद्रप्रयाग जिले में फैला हुआ है और नंदा देवी राष्टीय पार्क चमोली, पिथौरागढ और बागेश्वर तीनों जिलों में फैला हुआ है। इसलिए अन्तर्राष्टीय तस्करों की नजर इन वन प्रभागों पर लगातार लगी हुई है। यहां यह दर्ज कराना जरूरी है कि कुख्यात वन तस्कर संसार चंद का एक गिरोह भी इन वन प्रभागों में मौजूद है। जिसकी भनक वन मकहमे को भी है। लेकिन वन विभाग की आंखों में धूल झोंककर बर्फबारी के बाद अपनी जान बचाने के लिए नदी घाटी में आ रहे वन्य जीवों को मार गिराया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले तीन दिनों से जनपद चमोली के उंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार बर्फबारी हो रही है। हाड कंपा देने वाली ठंड से बचने के लिए वन्य जीव जिनमें गुलदार, कस्तूरा मृग, हिरन, घुरड, काखड, जंगली काला भालू, सेही और अन्य कई जानवर नदी घाटी वाले क्षेत्रों में ठंड से बचने के लिए रुख कर रहे हैं। चमोली जनपद के सुदूरवर्ती गांवों में तो ग्रामीण ही वन तस्करों को साथ दे रहे हैं। दशोली विकासखंड के पाणा, ईराणी, देवाल ब्लाक के वाण, हिमनी, घेस, पिनाउं, जोशीमठ की उर्गम घाटी और घाट विकासखंड के कनेाल, सुतोल में सबसे अधिक वन्य जीवों की तस्करी होती बतायी जा रही है। जोशीमठ ब्लाक के नीती माणा घाटी में भारी बर्फबारी के कारण 6 महीने तक आवाजाही लगभग बंद रहती है। यहां केवल सीमा पर सैनिक ही तैनात रहते हैं। ऐसे मौके का फायदा उठाकर वन तस्कर नीती माणा व मलारी घाटी में अधिक सक्रिय हो गए हैं। वन्य जीव तस्करों की इन क्षेत्रों में सक्रियता की सूचना के बाद वन विभाग की नींद खुली है और अब वन विभाग भी तस्करों को पकडने के लिए तेजी दिखाने लगा है। बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ राहुल बताते हैं कि वन्य जीव तस्करों को पकडने के लिए वन विभाग ने जगह जगह अपने मुखबिर लगा दिये हैं। साथ ही वन कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देकर तस्करी वाले क्षेत्रों मंे रवाना कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला मंगल दलों, युवक मंगल दलों और वन पंचायत सरपंचों से भी वन्य जीव तस्करों का सुराग लगाने के लिए मदद ली जा रही है। उल्लेखनीय है कि चमोली जनपद के सीमांत क्षेत्रों में तस्कर गुलदार और काले भालू का अधिक शिकार करते हैं। क्योंकि गुलदार के मांस को छोडकर सभी अंग व काले भालू की पित्ती की कीमत अंतराष्टीय बाजार में करोडों रुपये है। 
 
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