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बोफोर्स तोपों की खरीद

 आलोक तोमर 

नई दिल्ली,  मार्च- बाइस साल तक भारत बोफर्स दलाली की पहेली से जूझता रहा। एक एक कर के अभियुक्त या तो मरते रहे या बरी होते रहे। अब एक ही अभियुक्त बचा है जिसका नाम है ऑक्टोबिया क्वात्रोच्ची और यह कोई दबा छिपा रहस्य नहीं हैं कि इटली का होने के कारण सोनिया गांधी और राजीव गांधी से उसकी खासी मित्रता थी।
जितने की तोपें नहीं थी उससे ज्यादा पैसा तो जांच में खर्च हो गया फिर भी कुछ नहीं निकला। मगर खबर यह नहीं है। खबर ये हैं कि भारतीय सेना अपने सत्तर हजार करोड़ रुपए के बजट में से जिन तोपों की खरीद कर रहा है उनमें बोफोर्स सूची में सबसे आगे है। यह खरीद अमेरिका सरकार और वहां की एक कंपनी बीएई लैंड सिस्टम्स के जरिए की जा रही है और इस बार जो तोपें खरीदी जा रही है वे वजन में इतनी हल्की होंगी कि उन्हें पहाड़ों की चोटियों तक पहुंचाने में दिक्कत नहीं होगी। 
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि ये बोफोर्स तोपें गुणवत्ता में सबसे आगे हैं और कारगिल युद्व के दौरान अगर पाकिस्तानी सेनाओं को खदेड़ा जा सका तो इसमें वायु सेना और बोफोर्स तोपों की बड़ी भूमिका थी। रही दलाली की बात तो वह कानूनी मुद्दा है और अब तो मामला खत्म भी हो चुका है। इन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन के जरिए सीधे खरीद की जा रही है इसलिए इस बार दलाली का सवाल ही पैदा नहीं होता। 
बोफोर्स बनाने वाली कपंनी व्हाइत्जर ने अपना नाम बदल कर एसडब्ल्यू डिफेंस रख लिया है और स्वीडन की यह कंपनी अमेरिका की बीएई लैंड सिस्टम्स ने खरीद ली है। रक्षा मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार कम से कम चार सौ तोंपे खरीदी जाएगी जो 155 मिली मीटर/52 कैलिबर की क्षमता वाली होंगी। 
डेटलाइन इंडिया ने पहली बार पुष्टि की है बोफोर्स कंपनी ने अब तक सूची में सबसे आगे चल रही सिंगापुर की एसटी काइनेटिक्स को सौदे की इस प्रतियोगिता में खदेड़ दिया है। सेना में इस बात को ले कर नाराजी हैं कि रक्षा मंत्री एके एंटनी ने सेना को विश्वास में नहीं लिया। वे पारदर्शिता में कमी का आरोप लगा रहे हैं। सिंगापुर और स्वीडन की तोपों के परीक्षण कारगिल इलाके में पिछली सर्दियों में ही होने थे मगर सिंगापुर की कंपनी ने बताया कि उसकी तोपें भारत लाते वक्त क्षतिग्रस्त हो गई है इसलिए परीक्षण छह महीने टाल दिया जाए। मगर रक्षा मंत्रालय ने इसकी अनुमति नहीं दी। 
रक्षा मंत्रालय का सौदा हासिल करने के लिए अमेरिका के कहने पर बोफोर्स बनाने वाली कंपनी ने इन तोपों की तकनीक भी भारत को सौंपने का वायदा किया है और हो सकता है कि आने वाले दिनों में इस तकनीकी साझेदारी से ये तोपें भारत में ही बनाई जा सके। बड़ी बोफोर्स तोपों में पहिए भी होंगे और ऐसी 180 तोपों का आदेश दिया जा रहा है। सौ तोपें ऐसी होंगी जो एक बार बटन दबाने पर नियमित अंतराल पर दिशा बदल बदल कर फायरिंग करती रहेगी। एक सौ पैतालीस तोपें ऐसी खरीदी जा रही है जो बहुत हल्की होगी और ट्रक में रख कर पहाड़ों की चोटी तक जा सकेंगी। बड़े हैलीकॉप्टर में भी ये तोपें समा सकती है। 
 
 
 
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