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एक साथ हमला बोला जाए

 सुप्रिया रॉय 

नई दिल्ली,  अप्रैल- छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े आतंकवाद विशेषज्ञ रिटायर बिग्रेडियर वी के पोंवार ने एक सनसनीखेज इल्जाम लगाया है। श्री पोंवार ने कहा है कि सुरक्षा बल माओवादियों से लड़ते वक्त जंगल में युद्व के मूल नियमों का भी पालन नहीं करते। ब्रिगेडियर पोंवार छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बनाए गए देश के पहले आतंकवाद निरोधक और जंगल वॉरफेयर कॉलेज के प्रिंसिपल हैं। यह कॉलेज माओवाद प्रभावित कांकेर जिले में हैं। श्री पोंवार ने कहा कि मैं किसी को दुख नहीं पहुंचाना चाहता लेकिन जंगलों में गश्त करते वक्त कुछ मूल नियमों का पालन करना होता है जिससे जीवन पर खतरा कम हो सके। दंतेवाड़ा में जो हुआ वह इन नियमों को तोड़ने का ही एक नतीजा है।
उधर केंद्रीय गृह मंत्रालय साफ कह चुका है कि सीआरपीएफ के जिन जवानों पर हमला हुआ और 76 लोग मारे गए उन सबको जंगल वॉरफेयर का प्रशिक्षण दिया गया था और वे नियमानुसार ही चल रहे थे। मगर पोंवार कहते हैं कि उनके बार बार कहने पर भी पक्की और कच्ची सड़कों पर निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जाता।
श्री पोंवार के अनुसार सुरक्षा बलों को अपने बेहतर हथियारों पर कुछ ज्यादा ही भरोसा है। सुरक्षा बलों को जंगलों मेंं उतरने के पहले एक निश्चित सीख यह दी जाती है कि किसी भी हाल में सड़क पर मत चलो। सड़कों सिर्फ दिशा समझने के लिए इस्तेमाल करो। इसके अलावा जंगल में सारे दस्तों को वी के आकार में चलने के लिए कहा जाता है मगर इसका भी पालन हर बार नहीं होता।
श्री पोंवार ने कहा कि गश्त कर रहे जवानों को किसी भी हाल में किसी गांव में रात नहीं बितानी चाहिए। उन्हे ऐसी जगह सोना चाहिए जो पहाड़ी पर हो और जहां से कम से कम तीन तरफ साफ साफ देखा जा सकता हो। दंतेवाड़ा में भी यही हुआ। सुरक्षा बल सड़क पर चल रहे थे जहां सुरंगे बिछी हुई थी और आस पास के पहाड़ों पर हजारों माओवादी हथियार ले कर मौजूद थे। श्री पोंवार ने कहा कि कई तरीके हैं जिनसे आतंकवादियों को घेर कर उन क्षेत्रों में लाया जा सकता है जहां सुरक्षा बल मजबूत है।
श्री पोंवार मानते हैं कि पूरे लाल कारिडोर में अगर एक साथ हमला बोला जाए तो माओवादियों का सफाया किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा में जो हमला हुआ वह तो सबसे बड़ा था मगर दूसरा सबसे बड़ा हमला भी 12 जुलाई 2009 को राजनादगांव जिले में किया था जिसमें एक आईपीएस अधिकारी विनोद कुमार चौबे के साथ चालीस लोग मारे गए थे। सरगुजा और जशपुर में भी अब माओवादियों के बड़े पैमाने पर जमा होने की खबर मिली है। 
 
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