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खेतों में धधक रही आग

 आजमगढ़,अप्रैल . खेतों-खलिहानों में आग का तांडव थमता नजर नहीं आ रहा है। पिछले महीने से शुरु हुयी यह आग लगातार खेतों खलिहानों में धधक रही है। दंतेवाड़ा में मारे गए सीआरपीएफ के जवान मनोज कुमार पांडेय का शव जब आजमगढ़ आ रहा था तो उस दौरान उनके गांव जमीन कटघर में उनकी गेंहूँ  की फसल धूं-धूं जल कर देश के विकास और किसान की आत्मकथा को बयान कर रही थी। आजमगढ़ में इस आग के जांच का अभियान लिए मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल ने इसे सरकारी आग कहते हुए विद्युत विभाग को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। संगठन का आकलन है कि पिछले दस दिनों में सिर्फ आजमगढ़ में पांच सौ बीघे से ज्यादा की फसल आग में खाक हो गयी। गावों में लगे बिजली के खंभों से लटकते हुए तारों की स्पार्किंग इस आग की वजह है। दो अपै्रल को दिन में ग्यारह साढ़े ग्यारह बजे हाई टेंशन तार की स्पार्किंग से निकली चिनगारी ने आजमगढ़ से मात्र 22 किलोमीटर दूर तहबतपुर के मद्धेशिया गांव के पैंसठ परिवारों के तकरीबन 167 बीघा फसल को राख कर दिया। गांव के हरिनाथ चौबे बताते हैं कि कई बार फोन करने पर दमकल तीन घंटे बाद आया तो उसमें पानी ही नहीं था। तो वहीं मेंहनगर के गौरा स्थित विद्युत विभाग के फीडर स्टेशन में हुयी शार्ट शर्किट ने तकरीबन पच्चीस बीघे गेहूं की तैयार फसल को खाक कर दिया। पीयूसीएल के जांच टीम के राजीव यादव, तारिक शफीक, विनोद यादव, मसीहुद्दीन, अवधेश यादव, राजेंद्र यादव, ज्ञान चंद्र पांडे, श्याम लाल विश्वकर्मा और विनय श्रीवास्तव ने आजमगढ़ के मेंहनगर, तहबतपुर, अतरौलिया, निजामाबाद, सरायमीर, मुबारकपुर समेत दर्जनों क्षेत्रों का दौरा किया। 

           लंबे समय से खेतों-खलिहानों में लग रही आग जहां विद्युत विभाग की उदासीनता को दर्शाता है तो वहीं यह एक बहुत बड़े घोटले की तरफ भी ध्यानाकर्षित करता है। दिलचस्प पहलू यह है कि इस आग के पीछे कारण बिजली के तारों की स्पार्किंग का है। वो भी सामान्य बिजली के तारों का नहीं बल्कि हाइटेंशन बिजली के तारों का। बिजली विभाग पर ग्रामीण तारों को कसने का दबाव बनाते हैं तो कभी-कभार कस दिया जाता है पर आग को रोकने का यह विकल्प तब तक कारगर नहीं हो सकता कि जब तक खंभों के बीच की दूरी को न कम किया जाय। खंभों की बीच की दूरी गांवों में बहुत अधिक होने की वजह से तार काफी नीचे तक झूलते हैं। गावों में खंभों को दूर-दूर लगाया गया है। जो विद्युत विभाग के मानकों के खिलाफ हैं। पीयूसीएल ने अपनी जांच में कहा है कि तारों के झूलने की वजह से जहां बिजली की बर्बादी होती है तो वहीं यह बहुत बड़ा घोटाला है। क्योंकि ज्यादा दूर-दूर खंभे लगाकर बिजली विभाग खंभों के पैसों का बहुत बड़ा घोटाला कर रहा है जो आजमगढ़ ही नहीं पूरे देश में हुआ है। 
               तहबतपुर का मद्धेशिया गांव जो एक तरह से आग में तबाह हो गया है के सेना से रिटायर्ड पंचदेव राय कहते हैं कि जब हमनें अपने थाने तहबतपुर के थानाध्यक्ष को फोन किया तो उसने कहा कि थाने आकर बताओ। गांव के योगेंद्र राय, प्रेम नारायण आक्रोशित भाव में कहते हैं कि हमारे घर में आग लगी है तब भी थानेदार सरकारी रुआब में ही बात करते हैं कि आके बताओ। जितनी देर में हम गए होते पूरा गांव खाक हो गया होता। घंटों बाद दमकल आया तो उसमें पानी ही नहीं था। गेहूं, अरहर, गन्ना फसलों के साथ-साथ कटहल और आम के बाग भी जल कर राख हो गए। आज भी गांव में जली फसलों के उपर झूलते हुए तार बिजली के हाई टेंशन तार बिजली विभाग की कारस्तानी की गवाही दे रहे हैं। जहां हाथ उपर उठा लिया जाय तो हाईटेंशन के तार छू जाते हैं। गांव वालों के अनुसार कई बार बिजली विभाग वालों से शिकायत की गयी पर कोई नहीं आया। इतनी बड़ी तबाही के बाद भी तारों को नहीं कसा गया है। तो वहीं मेंहनगर गौरा गांव के राणा सिंह बताते हैं कि उनके खेत के पास के फीडर स्टेशन में शार्ट शर्किट हुयी जहां से उनका खेत काफी दूर है। पर लापरवाही के चलते फसल जल कर राख हो गयी। लाख बार कोशिश की गयी कि दमकल आए पर घंटों बाद जब आग हम लोगों ने बुझा लिया तब आया। इसी तरह मुबारकपुर के सोनपार के सुदामा ने बताया कि उनके गांव में बिजली के तारों की स्पार्किंग में बल्ली यादव, नंदलाल यादव और बलाउ यादव की फसल आग में खाक हो गयी। सरायमीर के पास स्थित शेरवां गांव में लगी आग में रामचंद्र, कुतुबुद्दीन, विनोद कुमार, जफर, दयाराम, किसुन यादव समेत कई लोगों का दस बीघा फसल आग में खाक हो गयी। इन लोगों के अनुसार गांव वालों ने खुद आग बुझाई कोई दमकल नहीं आया था।
          पीयूसीएल नेता राजीव यादव और तारिक शफीक ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से अगलगी क्षेत्रों में चल रहे अभियान में एक फार्म पर पीड़ित पक्षों का पूरा व्योरा लिया जा रहा है। जिसमें उनके नुकसान और उस दौरान किस-किस प्रशानिक अधिकारी को उन्होंने सूचित किया था का ब्योरा प्रमुखता से लिया जा रहा है। पीयूसीएल का आरोप है कि सरकारी अधिकारी कर्मचारी अपने को बचाने के लिए आग से जली सम्पत्ती का कम आकलन करते हैं। पिछले दिनों इसी के चलते आजमगढ़ को मिला सूखा राहत का पैसा वापस चला गया जबकि पूरा जिला सूखे की चपेट में था। जिला कृषि अधिकारी यूपी सिंह आग से तबाह हुए क्षेत्रों के आकलन के बारे में अभी से अपनी अनभिज्ञता जाहिर कर रहे हैं। पीयूसीएल अपने द्वारा भरवाए गए फार्मों के आधार पर मुआवजे और दोषी प्रशानिक अधिकारियों के खिलाफ कार्यवायी करने की मांग करेगा साथ ही गांवों में लगे बिजली के खंभों की दूरी की पैमाइस कर बिजली विभाग के घोटाले को उजागर करेगा।   
 
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