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बुंदेलखंड में तेज हुआ पलायन

जनादेश ब्यूरो
लखनऊ, मई। बुंदेलखंड में गर्मी के चलते उत्पन्न हो गए भीषण जल संकट के कारण पलायन फिर तेज हो गया है। रेलवे स्टेशनों पर मजदूरों और बेहाल किसानों की भीड़ जमा हो गई है और ट्रेनों में किसी तरह लद-फंदकर वे महानगरों की ओर भाग रहे हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने बुंदेलखंड में व्यापक और भयावह जल संकट से उत्पन्न तबाही पर गहरी चिंता व्यक्त की है और प्रदेश सरकार से त्वरित सहायता व जल संकट के स्थाई समाधान पर गंभीर कार्रवाई करने की मांग की है ताकि वहां के लोगों को कुछ राहत मिल सके और पलायन रूक सके।
भाकपा के वरिष्ठ नेता अशोक मिश्र ने कहा कि यमुना नदी में पानी की जलधार आधी रह गई है जबकि पयस्वनी, बाल्मीकि, गडरा, बचेन आदि नदियां सूख चुकी हैं। पीने के पानी को लेकर हैंड पंपों पर आए दिन मारपीट, खून खराबा हो रहा है, जानवर पानी के बिना मर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के अनेक क्ष्ोत्रों में मार्च में ही तापमान 44 और 46 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाने से फसलें पकने से पहले ही सूख गईं। बुंदेलखंड की प्रमुख फसलें चना, मसूर, अरहर की कटाई की मजदूरी भी नहीं निकल सकी है। गेहूं की भी पैदावार चार-पांच कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से हो पाई है। भाकपा नेता ने कहा कि इस विकट स्थिति में बैंकों और साहूकारों के कर्जों, लड़के-लड़कियों के शादी-ब्याह, घर के छप्पर छानी बनाने की गहरी चिंता ने बुंदेलखंड के किसानों व आम लोगों का सुख चैन छीन लिया है। मजबूरन दलित, मजदूर, किसान और आम जन हजारों की संख्या में रोज बुंदेलखंड छोड़कर रोजी-रोटी के लिए पलायन कर रहे हैं। चारा, पानी की व्यवस्था न कर पाने के कारण हजारों जानवर खुले छोड़ देने से संकट और गहरा हो गया है।
मिश्र ने कहा कि पिछले साल करोड़ों रूपया वृक्षारोपण के नाम पर व्यय किया गया पर आज उस कथित वृक्षारोपण का एक भी पेड़ वहां मौजूद नहीं है। फिर से वृक्षारोपण के नाम पर बुंदेलखंड पैकेज खाने का ताना-बाना बुना जा रहा है। भाकपा ने मुख्यमंत्री से बुंदेलखंड में सिंचाई की पूर्व स्वीकृत योजनाओं को अमली जामा पहनाने, आधी-अधूरी योजनाओं को युद्ध स्तर पर पूरा किए जाने, यमुना नदी पर कठार, लखनपुर, महवरा में लिफ्ट कैनाल बनाने, बाघ्ोन नदी पर सिंहपुर के पास बांध बनाने, बरगढ़ ग्लास फैक्ट्री को चालू किए जाने, सूख्ो तालाबों में पानी भरवाने और प्रत्येक ग्राम सभा में कम से कम 15 हैंडपंप अति शीघ्र लगाए जाने की मांग की है।

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