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राम भरोसे है चारधाम यात्रा

 राजकुमार शर्मा

देहरादून .देवभूमि उत्तराखंड में धर्म एंव आस्था की मिसाल पेश कर पर्यटन को एक पहचान देने वाली चार धाम यात्रा सरकारी उपेक्षा और  अव्यवस्था का भेंट  चढ़ कर राम भरोसे चल रही है.इस चारधाम यात्रा में प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालू यमुनोत्री-गंगोत्री सहित केदारनाथ एंव बदरीनाथ धाम की यात्रा करते हैं. अक्षय तृतीया के  पूर्वाहन 11.5 बजे यमनोत्री  , अपराह्न 1.25 बजे गंगोत्री धाम 18 मई को भगवान केदारनाथ जी के तथा 19 मई को भगवान बदरीनाथ जी के कपाट परम्परागत तरीके से मंत्रोचार के बाद श्रद्धालूओं भक्तों के लिए छः माह बाद खोले गये.
 इस अवसर पर श्रद्धालूओं की पहुची भारी भीड़ के समक्ष सूबे की सरकार की सारी की सारी व्यवस्था बौनी सिद्ध हुई,गंगोत्री धाम में यात्रा के पहले दिन ही पांच किलोमीटर के लगे जाम ने सरकार के सारे दावों को खोखला सिद्ध कर दिया.यात्रा के आरम्भ होते ही सूबे की सरकार के मुख्यमंत्री डा.रमेश पोखरियाल निंशक ने अपनी धाक अपने राजनैतिक आका लालकृष्ण आडवानी के समक्ष जमाने के लिए उन्हें सरकारी कार्यक्रम में आमंत्रित किया उससे जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ी. जिस तरह उन्हें पट खुलने के पहले दिन ही गंगोत्री धाम में स्पर्श गंगा अभियान में बुलाया गया उससे सरकार के इस निर्णय की पुरे देश में कीरकीरी हुई.अव्यवस्था का आलम यह रहा कि धाम की व्यवस्था का जिम्मा सम्भालने वाले जनपद के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को भी धाम से पांच किलोमीटर पूर्व ही अपने सरकारी वाहनों को छोड़कर पैदल जाना पड़ा.महाकुम्भ 2010 के बाद सूबे में शुरू हुयी चार धाम यात्रा के आगाज के अवसर पर हजारों भक्तों ने पतित पावनी गंगा एंव कष्टनाशनी यमुना के साथ केदारनाथ एंव भगवान बदरीनाथ जी का परम्परागत ढ़ग से जयकारा के साथ दर्शन किया.इस अवसर पर सेना के माहर रेजिमेन्ट के जवानों द्वारा बजाये गये बैंड की धुन पर हजारों श्रद्धालू झूम उठे.गंगा मंिन्दर में जलने वाले अखण्ड दीप का दर्शन करके भक्तों ने नई ऊर्जा के संचालित होने के की बात कही.गंगोत्री एंव यमुनोत्री दोनों धाम उत्तरकाशी जनपद में स्थित है.चारधाम यात्रा की शुरूआत यमुनोत्री धाम से होती हैं.इस चार धाम यात्रा की औपचारिक शुरूआत सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री वी सी खंडूडी ने शनिवार को ही ऋषिकेश से 250 बसों के एक जथ्थे को हरी झंडी दिखा कर की थी.  यमुनोत्री धाम समुद्र तल से 4421 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है तथा गंगोत्री धाम भी समुद्र तल से 3140 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं.दोनों धाम स्थित गंगा-यमुना के मंदिरो सहित बदरी-केदार मंदिर को फूलों से शानदार तरीके से सजाया गया था.6माह बाद खुले इन धामों में पहंुचे हर भक्त के मन में अपनी मां के साथ अपने आराध्य से मिलने की लालसा दिख रही थी.सरकार ने इस यात्रा के शुरू होने के पहले ही व्यवस्था को लेकर लम्बे चौड़े बयान दिये थे.सूबे के मुख्यमंत्री निंशक ने स्वंय पत्रकार वार्ता कर के सुव्यवस्था की बात कही थी जो धाम में जनता को कही नही दिखी.एक दिन बाद सरकार के गंगोत्री में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवानी के गंगा स्पर्श अभियान में पहुंचने की तैयारी में पुरा प्रशासनिक अमला व्यस्त दिखा.आडवानी जी के गंगोंत्री आने के कारण राज्य के अनेक नेताओं ने यात्रा के आरम्भ होने के पूर्व ही इस कदर डेरा डाल दिया कि पुरा प्रशासन वीआईपी की सुरक्षा में ही व्यस्त हो गया.गंगोत्री धाम को प्रशासन ने यात्रीयों की सुविधा की बात भूला कर पुरी तरह पुलिस छावनी में बदल डाला.पहले दिन लोगों को न तो संचार की सुविधा का लाभ मिला न ही यात्रीयों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिला.पुरे धाम में जहंा श्रद्धालूओं की भारी मौजूदगी रही वही फोर्स की मौजूदगी ने भी जनता का काम आसान नही किया.सरकारी आयोजन में सरकारी अफसरों के साथ पुरी सरकार की गंगोत्री धाम में आडवानी जी को खुस रखने की हर कोशिश करने वाली निशंक सरकार की पुरे देश से आये श्रद्धालूओं के मध्य भारी कीरकीरी हुई.यात्रा के पहले दिन ही आडवानी जी के गंगोत्री धाम पहंुचने के कारण ही हजारों यात्रीयों को यात्रा मार्ग में बह्मखाल,धरासू, डूंडा,मातली बडे़थी,उत्तरकाशी, नेथाला,मनेरी,भटवाड़ी,डबराणी,तथा हर्षिल में पुलिस प्रशासन ने यात्रियों को बैरियर लगा कर रोक दिया जिससे पुरे पहाड़ी मार्ग में दुर्गम स्थलों पर यात्रियों को लगातार 12 घंटे से 20 घंटे तक परेशानी का सामना करना पड़ा.यात्रीयों को नैसर्गिक सुविधाओं के लिए भी भटकना पड़ा .यात्रा मार्ग में दुकानदारों ने मौका का लाभ उठाकर यात्रीयों से मनमाना दाम वसूला ,सैकडों यात्रीयों को अपने वाहनों में ही भूखे प्यासे रह कर रात गुजारनी पड़ी.मन में आस्था का अपार सागर लिए हजारों तीर्थ यात्रीयों को आडवानी की यह यात्रा पुरी तरह से जी का जंजाल सिद्ध हुयी.इस सरकारी आयोजन ने यात्रा के पहले दिन ही यात्रीयों से होटल घोड़ा,कन्डीवालों से लेकर पालकी पीठ्ठ्ू वालों को  चांदी काटने का मौका उपलब्ध करवा दिया ,इन लोगों ने जनता से पांच गुना से लेकर दस गुना किराया वसूला,यह सारा खेल सरकार के नाक के नीचे खेला गया और सरकार के लोग मौन दर्शक बने रहें.इस यात्रा के प्रथम चरण में ही सरकार द्वारा पैदा की गयी र्दुव्यवस्था के चलते हजारों तीर्थ यात्रीयों को गंगोत्री-यमुनोत्री की यात्रा को मध्य में ही छोड़ कर आगे का रूख करना पड़ा.इस बार के चारधाम यात्रा के पहले चरण में ही दो से तीन दिनों तक गंगोत्री से यमुनोत्री तक की यात्रा व्यवस्था पुरी तरह से ध्वस्त रही,यात्रा में जहंा एक ओर सरकारी अव्यवस्था ने यात्रीयों का उत्साह ठंड़ा करके रख दिया वही बदहाल यात्रा की सड़के भी यात्रीयों के लिए भारी परेशानी का कारण बनी हुयी हैं.खराब सड़कों ने राज्य सरकार की व्यवस्था के दावे की पोल खोल रही हैं.गंगोत्री मार्ग में उत्तरकाशी से गंगोत्री तक नब्बे किलोमीटर में से 20 किलोमीटर के करीब सड़क बदहाल हालत में है.जिस पर खराब दशा के चलते हिचकोले खा रहे है वाहन,यमुनोत्री धाम के पैदल पांच किलो मीटर में मार्ग इतना खराब है कि उस पर पैदल चलना मुस्किल हो रहा हैं.सरकार ने जगह-जगह सड़क चौड़ी करण का बोर्ड लगा रखा है जिस पर सड़क पुरी तरह से यात्रा के काबिल नही हैं.गंगोत्री के यात्रा मार्ग में दस से 20 किलो मीटर की बदहाली एंव धूल भरी सड़को से यात्री को वाहन से भी गुजरना कठीन हो रहा हैं.इन मार्गों पर पदयात्रा कर धाम तक पहुचने का संकल्प रखने वाले यात्रीयों का बुरा हाल हो रहा है.यमुनोत्री मार्ग के पैदल मार्ग में जानकीचट्टी से यमुनोत्री तक के पैदल मार्ग में प्रबन्धन की कमी के कारण यात्रीयों को भरी परेशानी उठानी पड़ रही हैं.चारधाम यात्रा समिति के सभी यात्रीयों को सुबिधा देने की घोषणा अब तक हवा हवाई सिद्ध हो रही है.यात्रा मार्ग पर दागी संत पाइलट बाबा के साथ समिति के अध्यक्ष सूरतराम नौेटियाल के लगे गंगोत्री एंव बदरीनाथ मार्ग पर बोर्ड के प्रति जनता में इतना आक्रोश है कि कई जगह यात्रीयों ने दोनों के छपे चित्र पर पत्थर मार कर उसे बदरंग बना दिया है.केदारनाथ मार्ग पर यात्रीयों के यात्री विश्राम गृहों की हालत पुरी तरह खस्ता हैं.यात्रीयों को यात्रा मार्ग में यात्री सुविधाओं के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ रही हैं भगवान बदरीनाथ धाम की यात्रा करने वाले यात्रीयों को कुछ दूर तक चौड़ी सड़के जरूर मिल रही है किन्तु जोशीमठ के बाद धाम तक की सड़कों की दुर्गमता के साथ बदहाली ने यात्रीयों में भय पैदा कर दिया हैं.
 
मार्ग में सरकारी खर्चे  पर कई जगह यात्री विश्राम गृह का निर्माण तो किया गया है किन्तु ये विश्राम गृह कही वन विभाग तो कही दंबगों द्वारा अवैध कब्जा के शिकार हो चुके है.यात्रा की दुर्गमता जहंा यात्रीयों में हर बार रोमांच पैदा करती थी वही यात्रा की बदहाली इस बार लोगों में धर्म एंव संस्कृति के नाम पर बनी सूबे की सरकार के प्रति नफरत पैदा कर रही है.बदरीनाथ धाम में यात्रीयों की लाइन में धूप -छाव से बचाव के लिए बनाया गया यात्री सेट पुरी तरह से मध्य से ही उजड़ चुका हैं जिसमें यात्रा के पहले दि नही बरीनाथ धाम में हुई वारीश एंव बर्फवारी से सैकड़ों यात्री तंग हो गये.धाम में यात्रीयों की व्यवस्था के लिए बनाये गये प्रशासनिक व्यवस्था का काम मात्र रसूकदारों को सुबिधा प्रदान करने के साथ लम्बी लाइन में लगी जनता के समक्ष परेशानी खड़ा करना रह गया हैं.धाम में वीआईपी की सुविधा का जितना ध्यान सूबे की सरकार दे रही है उसके अनुपात में यात्रीयों को धेला भर सुविधांए नही मिल पा रही हैं.बदरीनाथ धाम में सेना के जवानों को भी लगाया गया है किन्तु यंहा लगे सेना के सिपाही भी कमान से आने वाले अपने अफसरों के परिवार की सेवा में ही सीमित रह जा रहे है.6 माह तक चलने वाली इस यात्रा का एक ही संकल्प लोगों के मन में दिख रहा है कि किस तरह इस 6 माह में बारह माह की मोटी कमाई का जुगाड़ कर लिया जाय.प्राकृतिक वैभव एंव देवालयों की आस्था से परिपूर्ण चारधाम यात्रा को मनोहारी बना कर सूबे की सरकार राज्य के पर्यटन उद्योग को भी चमका सकती हैं.सूबे के मुख्यमंत्री निंशक ने जनता की सुविधाओं को नकार कर अपने आका के मुक्ति का जो रास्ता यात्रा के पहले दिन ही तलासा उससे राज्य की इस यात्रा के प्रति सरकार के रवैया की स्थिति भी साफ हो गयी.इस प्रदेश के अति महत्वपूर्ण धाम बदरीनाथ के सनातन पीठ पर तीन-तीन श्ंाकराचार्यो की दावे दारी जनहित को भुला कर अपना हित साधने में लगी हैं.देवभूमि के जोशीमठ स्थित ज्योर्तिपीठ पर भारी मठ बना कर अपना सम्राज्य स्थपित करने वाले स्वरूपा नन्द,बासुदेवानन्द,एंव माधवाश्रम महाराज का आपस में ही पीठ के स्वामीत्व के दावे को लेकर स्वान की भांती लड़ना सनातन धर्म की अवधारणा को भी चोटहिल कर रहा हैं.अदिजगत गुरू शंकराचार्य जी महाराज ने सनातन धर्म की एकता एंव रक्षा के देश के चारों कोनों में चार पीठ की स्थापना कर सनातन धर्म को अक्षुण एंव एकता का जो सपना देखा था वह भी इस देवभूमि के पावन धाम ज्योर्तिपीठ में इस पीठ के तीन दावे दारों की नासमझी के कारण तार-तार हो रही हैं.सरकार से लेकर इन पीठों के आचार्य तक सभी जनहित को भूला कर अपने हित साधने के लिए परेशान है.चारधाम यात्रा को आस्था के साथ देश के कोने- कोने से आने वाले हजारों श्रद्धालूओं की पवित्र भावना को चोटहिल किया जा रहा है.
 
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