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मिजोरम में गरमाने लगी चुनावी राजनीति

 कुमार प्रतीक

आइजल, मार्च। पूर्वोत्तर में बांग्लादेश व म्यामांर की सीमा से सटे सुदूर पर्वतीय प्रदेश मिजोरम में भी अब चुनावी राजनीति गरमाने लगी है। इस छोटे-से राज्य में लोकसभा की महज एक सीट है। लेकिन यहां दो प्रमुख विपक्षी दलों मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) और मिजोरम पीपुल्स कांफ्रेंस (एमपीसी) ने सत्तारूढ़ कांग्रेस को कड़ी चुनौती देने के लिए हाथ मिला लिया है। इस गठबंधन ने आइजल लोकसभा सीट पर पूर्व सांसद एच. लालुंगमुआना को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस की ओर से इस सीट पर 73 वर्षीय सी. एल. रुआला मैदान में उतरे हैं। राज्य में इस सीट के लिए 16 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। इसके साथ ही साउथ तुईपुई विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव भी होना है। एमपीसी के नेता और पूर्व मंत्री कर्नल लालचुंगनुंगा साइलो कहते हैं कि हमने एक ऐसा उम्मीदवार चुना है जो आम जनता को भी स्वीकार्य हो।
तमाम उम्मीदवार फिलहाल घर-घर जाकर चुनाव प्रचार करने में जुट गए हैं। यहां इस बात का जिक्र जरूरी है मिजोरम में चुनाव प्रचार की रफ्तार काफी धीमी होती है। यहां चर्च ने चुनावी रैलियों, पोस्टरों व बैनरों पर पाबंदी लगा दी है। ऐसे में घर-घर जाकर वोट मांगने के अलावा मोबाइल से भेजे जाने वाले एसएमएस संदेश ही वोट मांगने का प्रमुख जरिया हैं। मिजोरम में होने वाले हर चुनाव में चर्च की भी असरदार भूमिका होती है।
लालुंगमुआना ने इससे पहले वर्ष 1988 में निर्दलीय के तौर पर इस सीट से चुनाव लड़ा था। तब एमपीसी और जोराम नेशनलिस्ट पार्टी (जेडएनपी) के समर्थन से उन्होंने इस सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जान लालसांगजुआला को 41 वोटों के अंतर से पराजित किया था।
इससे पहले लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस को कड़ी चुनौती देने के लिए मिजोरम के विपक्षी दलों ने एक मंच पर आने का फैसला किया था। मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के महासचिव व राज्यसभा सदस्य लालमिंगलियाना कहते हैं कि एमएनएफ ने कांग्रेस को कड़ी टक्कर देने के लिए क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर संयुक्त मोर्चा बनाने का फैसला किया है। मिजोरम पीपुल्स कांफ्रेंस (एमपीसी) राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ब्रिगेडियर टी. साइलो का कहना है कि एमएनएफ व एमपीसी के साझा उम्मीदवार को जोराम नेशनलिस्ट पार्टी (जेडएनपी) का भी समर्थ हासिल है।
भाजपा ने पहले ही यह घोषणा कर चुकी है कि वह किसी भी गैर-कांग्रेसी उम्मीदवार का समर्थन करेगी। इसके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कुछ दूसरी छोटी राजनीतिक पार्टियां भी यहां चुनाव मौदान में कूदी हैं। लेकिन उनका मकसद जीतना कम और दूसरों का वोट काटना ज्यादा है।
यहां राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि राज्य की अकेली राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस और विपक्षी गठजोड़ में सीधी टक्कर की संभावना है।
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