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हाजी मस्तान की जिंदगी

 निरंजन परिहार 

मुंबई, - अपने  अंधविश्वासी धारावाहिकों से पूरे देश के टीवी दर्शको का दिमाग खराब कर देने वाली एकता कपूर की फिल्म 'वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई' रिलीज तो हो गई मगर एकता कपूर और उनके बालाजी टेलीफिल्मस की मुसीबते खत्म नहीं हुई है। 
सब जानते हैं कि हाजी मस्तान मुंबई के अंडरवर्ल्ड का पहला डॉन था। तमिलनाडु के एक गांव में गरीब घर में जन्मा मस्तान मुंबई में बंदरगाह पर कुली बन गया था और वहीं से उसने सोने से ले कर इलेक्ट्रॉनिक सामान तक की तस्करी शुरू की थी। हाजी मस्तान का नाम इतना हो गया था कि दीवार, मुकदर का सिकंदर और कुली फिल्मों में कहीं न कहीं उसके किरदार की झलक मिल जाती है। 
हाजी मस्तान पर एक भी हत्या का आरोप नहीं है। मगर करीम लाला और दाऊद इब्राहीम ने अपनी जिंदगी उसी के चेलों की तौर पर शुरू की थी। हाजी मस्तान का कुली का बिला नंबर 786 अमिताभ बच्चन ने फिल्म के जरिए मशहूर कर दिया था। मस्तान हैदर मिर्जा के मूल नाम वाले इस आदमी ने हज के लिए जाने वालों से तस्करी करवानी शुरू की और खुद भी हज किया। इसीलिए उसका नाम हाजी मस्तान हो गया। एक जमाने में वह अपने पिता के साथ मुंबई की क्राफोर्ड मार्केट के सामने साइकिल के पंचर जोड़ा करता था। लेकिन जल्दी ही उसके पास अपना बंगला था। गाड़ियों का काफिला था, बंगले में सिनेमा हॉल था और आम तौर पर वह अपना दरवाजा खुद खोलता था।
मुंबई के रिटायर्ड एसीपी इशाद बागवान ने हाजी मस्तान का उत्थान और पतन दोनों देखे हैं। उनका कहना है कि एक जमाने में ट्रांजिस्टर और घड़ियां भी तस्करी की जाती थी और टेप रिकॉर्डर भी तस्करी के जरिए लाए जाते थे। बाद में हाजी मस्तान ने सोने की तस्करी शुरू कर दी। 
एकता कपूर की असली दिक्कत यह है कि हाजी मस्तान बाद में दमन के सबसे बड़े तस्कर सुकुर नारायण बथिया के साथ मिल कर तस्करी करता था और करीम लाला और वरधराजन मुदलयार जैसे लोग उनकी मदद करते थे। सुकुर नारायण बथिया ने हाजी मस्तान के काफी अच्छे राजनैतिक संपर्क बनाए और कई बार तो संजय गांधी तक हाजी मस्तान के घर उससे मिलने पहुंचे। 
एकता कपूर ने दावा किया है कि कहानी हाजी मस्तान की नहीं हैं मगर पायरेसी की कृपा से इसका एक एक फ्रेम देखने के बाद कोई अनाड़ी ही कहेगा कि कहानी किसी और की है। एक कस्टम अधिकारी जरूर हाजी मस्तान का साम्राज्य खत्म कर देना चाहता था और हाजी मस्तान ने उसे मोटी रिश्वत देने का वादा किया मगर वह नहीं माना। आखिरकार हाजी मस्तान ने अपने राजनैतिक असर का इस्तेमाल करते हुए उसका तबादला करवा दिया। 1974 में सुकुर नारायण बथिया एक गंभीर कानूनी मामले में फंस गया था तो हाजी मस्तान ने उस जमाने में भी एक लाख रुपए रोज का राम जेठमलानी को बथिया का वकील बनाया था। महाराष्ट्र के भूतपूर्व महानिदेशक टी सिंगारवेल उस समय मुंबई में डीसीपी थे और वे याद करते हैं कि हाजी मस्तान जब एक बार गिरफ्तार किया गया तो उसे कोल्हापुर के एक होटल में बहुत इज्जत से रखा गया और अगले दिन जमानत भी हो गई। 
मुंबई के वार्डन रोड पर हाजी मस्तान के शानदार बंगले में जानदार लोगों की भीड़ लगी रहती थी। हाजी मस्तान के गोद लिए हुए 56 वर्षीय बेटे सुंदर बताते हैं कि इस बंगले में धर्मेंद, राज कपूर, दिलीप कुमार, फिरोज खान, सलीम, जावेद और अमिताभ बच्चन अक्सर आया करते थे। हाजी मस्तान का दिल एक फिल्म अभिनेत्री पर आया गया था और सोना नाम की इस अभिनेत्री के लिए कई फिल्में फाइनेंस करने के बाद दोनों ने शादी कर ली। 
हाजी मस्तान आखिरकार अपनी फिल्मी और अपराधी छवि से मुक्ति चाहता था। सूट पहनता था। टाई लगाता था। महंगी सिगरेट पीता था। मर्सिडीज में चलता था और काम चलाऊ अंग्रेजी भी बोल लेता था। आपातकाल में नीशा कानून के तहत सबसे पहले गिरफ्तार होने वाले अभियुक्त का नाम भी हाजी मस्तान ही था मगर जेल से छूटते ही उसने एक समारोह में जयप्रकाश नारायण के सामने सारे बुरे काम छोड़ने की कसम खा ली और एक राजनैतिक पार्टी भी बनाई जो चली भी। हाजी मस्तान की बेटी शमशाद कहती है कि एकता कपूर ने फिल्म तो बना ली है और इसे रिलीज भी कर दिया गया है लेकिन यहां पर यह याद करना जरूरी है कि एकता को दर्शक कितने मिलते हैं?
 
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