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लक्ष्मी भी है लोकसभा चुनाव के मैदान में

कुमार प्रतीक

गुवाहाटी मार्च। कोई डेढ़ साल पहले असम की राजधानी गुवाहाटी में आदिवासियों की एक रैली पर स्थानीय लोगों के हमले के बाद बिना कपड़ों के भागती एक युवती देशी-विदेशी मीडिया की सुर्खियां बनी थी। असम के लगभग आठ सौ चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासियों ने वह रैली अपने अधिकारों के समर्थन में निकाली थी। लेकिन स्थानीय युवकों ने न सिर्फ उसके पूरे कपड़े फाड़ दिए थे बल्कि उसकी सरेआम पिटाई भी की थी। बाद में यह रैली हिंसक हो गई ती। उशके बाद स्थानीय लोगों के साथ जमकर संघर्ष हुआ था। अब उस घटना के लगभग सोलह महीनों बाद लक्ष्मी ओरांव नामक वह युवती असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एयूडीएफ) के टिकट पर तेजपुर संसदीय सीट से चुनाव मैदान में उथरी है।

एयूडीएफ के महासचिव हाफिज रशीद चौधुरी कहते हैं कि लक्ष्मी असम में आदिवासियों व अल्पसंख्यकों के शोषण का प्रतीक है। इसलिए हमने उसे तेजपुर से टिकट देने का फैसला किया है। लक्ष्मी ने कहा है कि वह चुनाव भले नहीं जीते। लेकिन मैदान में उतर कर वह इस बात का संदेश देना चाहती है कि आदिवासी अब अपना शोषण सहन नहीं करेंगे। एयूडीएफ को राज्य की तीस फीसदी मुस्लिम आबादी में से ज्यादातर का समर्थन हासिल है। चौधरी कहते हैं कि हमने अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए ही इस पार्टी की स्थापना की थी। इसलिए हम आदिवासियों के शोषण को नजरअंदाज नहीं कर सकते। लक्ष्मी तो शोषण की जीती-जागती प्रतीक है। वैसे, तेजपुर सीट कांग्रेस की गढ़ रही है। वहां से पार्टी के विवादास्पद सांसद मणइ कुमार सुब्बा ही चुनाव जीतते रहे हैं।

उस हिंसक रैली के बाद लक्ष्मी अक्सर मीडिया के सामने आती रही है। वह झारखंड का भी दौरा कर चुकी है। उसके पूर्वज झारखंड से ही असम गए थे। बीते साल अप्रैल में रांची में झारखंड दिशोम पार्टी के नेता सलखान मुर्मू की किताब के लोकार्पण समारोह में वह विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद थी। लक्ष्मी ने बीते साल ही दसवीं की परीक्षा दी थी। वह कहती है कि कपड़े फाड़ कर पिटाई के बाद भी उसकी जिल्लत कम नहीं हुई। इस अपमान ने परीक्षा केंद्र तक मेरा पीछा किया। वहां भी लोग मुझ पर फिकरे कसते रहे। लक्ष्मी व उसके परिजनों ने राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस पर मुंह बंद रखने के लिए दबाव डालने व प्रलोभ देने का आरोप लगाया है। लेकिन कांग्रेस ने इस आरोप का खंडन किया है। पार्टी ने कहा है कि उसने इस मामले में दोषियों की पहचान कर उको सजा दिलाने के लिए एक न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था।

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