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कॉमनवेल्थ का एक और पाप
आलोक तोमर
नई दिल्ली, अगस्त-- ये कामनवेल्थ का एक ऐसा पाप है जिसके लिए आप सुरेश कलमाडी गिरोह को कसूरवार नहीं ठहरा सकते  कॉमनवेल्थ गेम्स की आड़ में मानव तस्कर जमकर चांदी काट रहे हैं। कॉमनवेल्थ गेम में काम दिलाने के नाम पर दूरदराज के गांवों से लड़कियों को लाकर उन्हें बेचने का धंधा तेजी से बढ़ा है। कॉमनवेल्थ गेम्स में नौकरी पाने की लालच में लड़कियां तस्करों की जाल में फंसकर दिल्ली के कोठे पर पहुंच रही हैं। तस्कर गैंग की शिकार हुई लड़की पूजा(बदला हुआ नाम) की आपबीती हिला कर ऱख देने वाली है। पश्चिम बंगाल की रहने वाली पूजा लड़कियों की तस्करी करने वाले गैंग की शिकार हो गई। वही गैंग जो दिल्ली में होने वाले महाखेला में काम दिलाने का झांसा देकर भोली-भाली गरीब लड़कियों को अंधेरी गलियों में धकेल रहा है।
दरअसल पूजा की एक सहेली मानव तस्कर गिरोह की सदस्य है। उसने पूजा को महाखेल में काम दिलाने के साथ-साथ दिल्ली घुमाने का लालच दिया। अपनी सहेली की बातों में आकर पूजा ट्रेन में बैठ गई। उसके मुताबिक ट्रेन में उसे कुछ खाने के लिए दिया गया। खाने के बाद उसे गहरी नींद आ गई जब आंख खुली तो वह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर थी। दिल्ली में उसे एक आंटी के पास रख दिया गया। आंटी यानी जीबी रोड के एक कोठे की मालकिन। पूजा को बेच दिया गया था। पूजा की किस्मत अच्छी थी। एक कस्टमर ने उसकी दास्तान सुनी और उससे उसके घर का फोन नंबर लेकर उसके घर खबर कर दी। घर वाले दिल्ली पहुंचे और एक गैर-सरकारी संगठन की मदद से उसे छुड़ा लिया गया।
पूजा को कोठे की कैद से बेशक छुड़ा लिया गया। मगर पूजा की तरह ना जाने कितनी लड़कियों को दिल्ली में कॉमनवेल्थ में काम दिलाने या फिर खेल में लगने वाले मेला घुमाने के नाम पर दिल्ली लाया गया है औऱ इनमें से कई अभी भी कैद हैं।
मालूम हो कि दिल्ली के तीन रेलवे स्टेशनों से पिछले दो महीनों में पुलिस ने पूजा जैसी सौ से ज्यादा लड़कियों को दलालों के चंगुल से छुड़ाया है। इनमें ज्यादतर गरीब नाबालिग लड़कियां हैं। जिन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान काम दिलाने का झांसा देकर दलालों ने अपने जाल में फंसाया। दिल्ली पुलिस के ही आंकड़े बताते हैं कि पिछले सात महीनों में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से 35, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से 23 और निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर करीब 1 दर्जन लड़कियों को मुक्त कराई जा चुकी हैं।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक तस्करी के शिकार बच्चों को बचाने के लिए दिल्ली के हरेक थाने में जुवेनायल अफसर हैं। छुड़ाए गए बच्चों के पुर्नवास के लिए भी पुलिस कोशिश करती है। मगर इस बात को दिल्ली पुलिस भी मानती है कि इन बच्चों को दिल्ली काम के बहाने ही लाया गया। लेकिन राजधानी आने पर ज्यादातर लड़कियों से वो काम कराया जाता है जो शायद कभी उसने सपने में भी न सोचा था। 
हाल ही में दिल्ली पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर 14 लड़कियों को मुक्त कराया था। जांच में ये पता लगा था कि इन लड़कियों को काम दिलाने के नाम पर ही दिल्ली लाया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपी दिल्ली में प्लेसमेंट एजेंसी चलाता था। ऐसी लड़कियों की लिस्ट लंबी चौड़ी है।
दरअसल दिल्ली में कामनवेल्थ गेम की दस्तक ने मानव तस्करी का नया बहाना दे दिया। कई संगठित गिरोहों ने गेम के तैयारी कई महीनें पहले शुरू कर दी। झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, असम और छतीसगढ़ की गरीब लड़कियां इनके निशाने पर रहीं और गिरोह के एजेंट सक्रिय हो गए। इन एजेंटों ने गेम में कई तरह के काम दिलाने की बात इन जगहों पर फैलाई और फिर गरीब मां-बाप की ममता को बेचने की गहरी साजिश पर अमल करना शुरू कर दिया। तस्करी के इस तरीके के जरिए वो जम कर चांदी काटने लगे।
नाबालिग लड़कियों की तस्करी कोई नई बात नहीं मगर कॉमनवेल्थ गेम के नाम पर इस समय की जा रही तस्करी ने पुलिस और गैर सरकारी संगठनों की नींद उड़ा दी है। क्योंकि इनका मानना है कि तस्करों के चंगुल से छुड़ाई गई लड़कियों की संख्या से दस गुणा ज्यादा संख्या उन लड़कियों की हैं जिन्हें काम दिलाने के नाम पर दिल्ली लाया गया और अब वो लापता हैं।
 
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