ताजा खबर
माणिक सरकार का प्रतिबंधित भाषण 'जो अंग्रेजों का साथ दे रहे थे वे राष्ट्रवादी हो गए ' अखिलेश की गिरफ़्तारी , सड़क पर समाजवादी अडानी को लेकर ' द गॉर्डियन ' का धमाका !
अयोध्या पर शुरू हुई पेशबंदी

 कृष्ण मोहन सिंह

नईदिल्ली।श्री राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद (अयोध्या) मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला   आने के  पहले ही हिन्दू -मुस्लिम संगठनों ने पैतरेबाजी शुरू कर दी। अखिल भारतीय बाबरी मस्जिद कार्य समिति (एआईबीएमएसी) ने इसकी शुरूआत की है । इसके अध्यक्ष जावेद हबीब ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस मामले को अदालत से बाहर निपटाने की संभावनाएं तलाशें और केंद्र सरकार के किसी नुमाइंदे की ओर से कोशिश होनी चाहिए कि वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी और अन्य राष्ट्रीय नेता एक साथ बैठकर अदालत का फैसला आने से पहले बाहर ही मामले का हल निकालने के तरीके खोजें। दूसरी तरफ हिन्दू संगठनो का साफ़ कहना है कि मामला अदालत से नहीं संसद से सुलझाया जाए ।
हबीब ने प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में कहा है कि 1994 में उच्चतम न्यायालय के जो आकलन थे, उसके मद्देनजर इस मामले का हल अदालत के बाहर निकालने की कोशिश होनी चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि बेहतर होगा कि इस मामले का हल बातचीत के जरिए निकाला जाए। मालूम हो कि हबीब ने इस पत्र में कहीं भी यह जिक्र नहीं किया है कि  हिन्दूओं के अराध्य श्री राम के जन्म भूमि पर मंदिर बनाये जाने के लिए वह या उनका संगठन राजी है।
अभी दो दिन पहले ही विहिप के सर्वोच्च नेता अशोक सिंहल ने कहा था कि श्री राम जन्मभूमि का मसला संसद में विधेयक पारित करके हल किया जाय। सिंहल का संकेत उस तरफ था कि जब यूपीए चेयर परसन सोनिया गाँधी  की केंद्र सरकार अमीर  मुस्लिमों को फायदा दिलाने के लिए भारत सरकार के कब्जे वाली कई लाख करोड़ रूपये की कीमत वाली शत्रु सम्पति  पर उन अमीर मुसलमानों का कब्जा दिलाने के लिए संसद में गृह मंत्रालय के पेश किये जा चुके विधेयक में संशोधन करके पास कराने का पुख्ता इंतजाम कर ली है, संसद में इसे पास भी करा देगी ;तो यही सोनिया-मनमोहन की यूपीए सरकार श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर बनाये जाने के लिए इसी तरह से विधेयक क्यों नहीं लाती ,पास कराती है?  
हबीब ने पत्र में लालकृष्ण आडवाणी व अन्य नेताओं के साथ बैठकर मामले का हल निकालने के लिए लिखा है। लेकिन विहिप जो मंदिर मुद्दे का प्रणेता है वह तो आडवाणी को इस मामले में दगाबाज मानती है,उनको जिन्ना परस्त मानती है।विहिप नेता कहते हैं कि आडवाणी  मंदिर मुद्दे का राजनीतिकरण करके उप प्रधानमंत्री बने और उपप्रधानमंत्री बनते ही मंदिर आंदोलन के प्रमुख स्तंभ महंत रामचंद्र दास को दिये जुबान( सत्ता में आये तो मंदिर बनवायेंगे, सत्ता की परवाह नहीं करेंगे) से पलट गये। जिसके चलते महंत रामचन्द्र दास को इतना बड़ा झटका लगा कि दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया । विहिप अब यह भी कहती है कि मंदिर आंदोलन  अब केवल विहिप का आंदोलन रहेगा , भाजपा का नहीं। 
सूत्रों का कहना है कि मुस्लिम संगठनों और यूपीए अध्यक्ष  सोनिया गांधी व उनके बनाये अमेरिका भक्त प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को डर हो गया है कि अदालत का फैसला और चाहे जो आये , श्री राम जन्म भूमि पर मस्जिद बनाने का आदेश तो नहीं आने की संभावना है। ऐसे में कोर्ट फैसला दे सकता है कि –हिन्दू और मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि आपस में मिल-बैठकर फैसला कर लें , और यह बैठक कराने में सरकार मदद करे। 
फैसला यह भी आ सकता है कि यथास्थिति बरकरार रखा जाय।
यह भी हो सकता है कि सुझाव आए  कि मुस्लिम समाज थोड़ा अलग हट कर अपनी मस्जिद बना ले और श्री राम जन्म भूमि पर मंदिर निर्माण होने दे।
एक संभावना यह भी है कि  दो जजों का जो बेंच बना है उसमें एक जज जल्दी ही रिटायर होने वाले हैं, वह रिटायर हो जायं और उसके बाद नये दो जजों का बेंच बनाना पड़े। 
इस सबके मद्देनजर मुस्लिम संगठनों और मुस्लिमों को किसी भी हद तक जाकर वोटबैंक के लिए खुश करने में लगी कांग्रेस सरकार के मैनेजरों ने कुछ मुस्लिमों के मार्फत बैठक वाला नया शिफूगा शुरू कर दिया है। यदि बैठक से ही मसला हल हो जाता तो चन्द्रशेखर ने भी तो प्रधानमंत्री रहते बैठक कराया ही था, आडवाणी ने भी उप प्रधानमंत्री रहते तबके गृह राज्य मंत्री चिन्मयानंद के मार्फत विहिप के संतो में लगभग दोफाड़ करा कुछ मुस्लिम संगठन के नेताओं के साथ बैठक कराया ही था। तब तो इसी कांग्रेस और कुछ मुस्लिम संगठनों के नेताओं ने उन बैठकों को पलिता लगाया था।अब क्या यह बैठक कराकर इसका भी श्रेय किसी तरह राहुल गांधी को देने की योजना है ? उनको आदिवासियों का हवाई नेता बनाने के बाद अब मुस्लिमों का हवाई नेता बनाने की प्रायोजित योजना।
 
email ईमेल करें Print प्रिंट संस्करण
  • जहां पत्रकारिता एक आदर्श है
  • जहां आये कामयाब आये
  • नामवर की नियति
  • चिड़िया ते बाज तुड़वाऊं?
  • प्रभाष जोशी और इंडियन एक्सप्रेस परिवार
  • एक ऋषि की यात्रा का अंत
  • असली मैदान तो यूपी बनेगा
  • राजकाज
  • भगतों की चांदी है
  • मेरठ के बांके!
  • बाबरी विध्वंस की आयी याद
  • इतिहास में उपेक्षित तिलका मांझी
  • आखिरी पड़ाव गोमोह जंक्शन
  • संगम के अखाड़े में लेफ्ट-राइट
  • एक थे लोकबंधु राजनारायण
  • अपनी जमीन ही नसीब हुई
  • रवीश के सामाजिक सरोकार
  • गिरोह क्यों कहते हैं
  • ई राजेंद्र चौधरी कौन है ?
  • मीडिया में धूमते चेहरे
  • Post your comments
    Copyright @ 2016 All Right Reserved By Janadesh
    Designed and Maintened by eMag Technologies Pvt. Ltd.