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पाकिस्तान का भविष्य खतरे में

 आलोक तोमर 

नई दिल्ली, ।  चीन ने भारत पर हमला करने की योजना 2006 में बनाई थी मगर तत्कालीन सरकार ने इसे खारिज कर दिया। हमले की योजना को इसलिए खारिज नहीं किया गया कि भारत के प्रति बहुत प्रेम उमड़ पड़ा था बल्कि चीन पहले भारत को चारो तरफ से घेर लेना चाहता था और पाकिस्तान पर तो पूरा कब्जा कर के उसे ज्यादा से ज्यादा अपना उपनिवेश बनाना चाहता था। 
आखिर चीन के लिए देश हड़पना कोई नई बात नहीं रही है। ताइवान को भी उसने कुछ बाधाओं के अलावा हड़प ही रखा है। पाकिस्तान पर सैनिक सामग्री से ले कर पाक अधिकृत कश्मीर में निर्माण के अलावा बहुत सारी नागरिक सुविधाओं का बोझ भी लादा जा चुका है। 
मगर भारत के लिए सबसे खतरनाक गिलगित और भारत के उन इलाकों में चीन के बंकरों और बड़ी सुरंगों का बनना हैं जो असल में भारत के हैं और पाकिस्तान ने इन पर कब्जा कर के इन्हें चीन को लगभग एक सदी लंबी लीज पर दे दिया है। अब इन सुरंगों और बंकरों का इस्तेमाल सीधे भारत के खिलाफ किया जा सकता है। 
चीन की जो योजना सीआईए और अन्य सूत्राें के जरिए भारतीय गुप्तचर एजेंसियों के पास पहुंची हैं, उससे जाहिर है कि चीन यह खेल बहुत सध कर खेलना चाहता है। इस योजना के अनुसार चीन पहले अमेरिका को हड़काने और भड़काने का काम करेगा, इसके लिए अफगानिस्तान में हस्तक्षेप भी किया जा सकता है। अमेरिका सीमित सैनिक कार्रवाई से इसका जवाब देगा और इसमें पाकिस्तान को तय करना पड़ेगा कि उसे किसका साथ देना है।
पाकिस्तान भले ही अमेरिका के अरबों डॉलर हजम कर चुका हो और साजिशों में साथ रहा हो, मगर भौगोलिक परिस्थितियों और एशिया में चीन के महाशक्ति होने के कारण उसे चीन का ही साथ देना पड़ेगा और चीन के लिए इससे अच्छा अवसर कुछ नहीं हो सकता कि वह पूरे पाकिस्तान पर अपनी पकड़ बना ले। रेल लाइने पहले ही बिछाई जा चुकी है। 
राजमार्ग बन ही रहे हैं। ये राजमार्ग अफगानिस्तान और अरब देशों तक पहुंचते हैं। जाहिर है कि चीन को पाकिस्तान को काबू करने में बहुत दिक्कत नहीं आने वाली। कहानी साफ है कि भारत पर हमला हो या न हो, और चीन इतनी हिम्मत न भी करे,  तो भी पाकिस्तान का भविष्य खतरे में ही हैं।
 
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