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कहां नेहरू कहां मनमोहन

 कृष्णमोहन सिंह

नई दिल्ली। सोनिया मोइनो गांधी और अमेरिका की कृपा से भारत के प्रधानमंत्री बने पंजाबी खत्री मनमोहन सिंह के पद का पावर अब उनके सिर चढ़ कर बोलने लगा है। आज कुछ चुने चहेते सम्पादकों से अपने आवास पर लजीज व्यंजनी मुलाकात-बात में उन्होंने जो कुछ कहा उसका लब्बो –लुआब और संकेत यह है कि-
(1) - छह साल से अधिक समय से  प्रधानमंत्री पद पर बने रहने और अमेरिका का आंखमूद कर बरदहस्त होने के चलते मनमोहन सिंह  अब अपने को जवाहर लाल नेहरू और  इंदिरा गांधी से भी बड़ा और शक्तिशाली मानने लगे हैं।  
(2) - वह खुद बुढ़े और   उम्रगत रोगी होने के बाद भी रिटायर होने का नाम नहीं ले रहे हैं । हां अपने से कम उम्र के अन्य जाति व अमेरिका विरोधी मानसिकता वाले कांग्रेसी मत्रियों को हटाकर अमेरिका भक्त व कुछ अपनी जाति के तथाकथित युवा कांग्रेसी सांसदों को मंत्री बनाना चाहते हैं। 
(3) – खुद प्रधानमंत्री पद नहीं छोड़ना चाहते हैं और राहुल गांधी को अपने मंत्रिमंडल में जूनियर मंत्री बनाना चाहते हैं।जब तक कांग्रेस की मालकिन सोनिया व उनके लोग मिलकर मनमोहन सिंह को हटायेंगे नहीं तब तक मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री पद पर जमे रहेंगे और उस पर बने रहने का अमेरिकी दबाव आदि हर उपक्रम करते रहेंगे।
(4) – मनमोहन सिंह को अपने ही तरह अमेरिका भक्त व अपनी ही जाति के पी.चिदम्बरम तथा कपिल सिब्बल अति पसंद हैं । क्योंकि दोनों ही मनमोहन के अमेरिकी एजेंडे को लागू करने के लिए किसी भी हद तक चले जा रहे हैं। कांग्रेस के सांसदों तक को मिलने का समय नहीं दे रहे हैं,उनके पत्रों का जबाब अपने नहीं देकर , मातहत अफसरों या जूनियर मंत्री से दिलवा रहे हैं। जिसके विरोध में कांग्रेस के ही तमाम सांसदों ने अपनी अध्यक्ष सोनिया से मिलकर शिकायत भी की है ,अभी भी कर रहे हैं, चिट्ठी दिखा रहे हैं। ये दोनों मनमोहन की जाति के मंत्री मनमोहन की तरह ही संसद की तमाम परम्पराओं को ठेंगा दिखा रहे हैं। संसदीय कमेटियों के रिकमेंडेशन को नहीं मान रहे हैं। इस सब के चलते ये दोनों ही मनमोहन के आंख के तारे बने हुए हैं।अभी दो दिन पहले एक समारोह में मनमोहन ने घमंडी-अकड़ू कपिल सिब्बल की खूब तारीफ की थी ,आज सम्पादकों के साथ लजीज भोजी बैठकी में घमंडी-अकड़ू पी.चिदम्बरम की प्रशंसा की । वह प्रणव मुखर्जी जो मनमोहन से भी ज्यादे काम कर रहे हैं, केन्द्र सरकार संसद से लेकर बाहर तक कहीं भी फंस रही है तो उसे उबारने का काम कर रहे हैं, उस प्रणव मुखर्जी का मनमोहन सिंह एक बार भी प्रशंसा नहीं कर रहे हैं। 
   आज मनमोहन ने कुछ सम्पादकों के साथ लजीजभोजी बैठकी में अपनी तुलना नेहरू व इंदिरा के मंत्रिमंडल से जिस तरह की है उसको लेकर पुराने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में रोष बढ़ने लगा है। कई बुजुर्ग कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने इस संवाददाता से इस बारे में कहा कि कहां जवाहर लाल नेहरू और कहां यह अमेरिका परस्त,वर्ल्ड बैंक,आईएमएफ भक्त मनमोहन सिंह। कहां इंदिरा गांधी और कहां यह कैरियरिष्ट रहा नौकरशाह। कभी आजादी के आंदोलन में जेल भी गया है कि नेहरू और इंदिरा की बात कर रहा है। जो एक चुनाव नहीं जीत सकता वह उन लोगों की बात कर रहा है जिनने इतिहास रचा और वह भी अपने बूते। मनमोहन की तरह उन्होने किसी के दिये व किसी की कृपा से मंत्री या प्रधानमंत्री पद नहीं पाया था। सरदार पटेल , मोरार जी देसाई  की हैसियत भी किसी मायने में कम नहीं थी । तभी ये लोग सत्ता में रहते हुए भी मुद्दों पर अपनी बात कहे और अड़कर मनवाये थे। 
जिस जवाहर लाल नेहरू के मंत्रिमंडल से अपने मंत्रिमंडल की तुलना मनमोहन सिंह कर रहे हैं, क्या मनमोहन सिंह बतायेंगे कि नेहरू के मंत्रिमंडल में कितने लोग ए.राजा ,शरद पवार , प्रफुल्ल पटेल जैसे मंत्री थे । नेहरू के समय कितने कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे जो कामनवेल्थ गेम तैयारी जैसे किसी मामले में खूली लूट के सबूत उजागर होने के बाद भी पद पर बने रहे, कितने सुरेश कालमाडी जैसे कांग्रेसी उस समय थे जिनके लूट के कारनामों के प्रमाण खुलेआम आ जाने के बाद भी मनमोहन की तरह गले लगाये रखा। क्या मनमोहन सिंह  बतायेंगे कि उनके सरकार के 6 साल में भ्रष्टाचार के जितने एक से बढ़कर एक बड़े रिकार्ड तोड़ रिकार्ड बने हैं क्या नेहरू के समय उतने भ्रष्टाचार के रिकार्ड बने ? ठीक ही कहा गया –किसी  को भी पहाड़ पर बैठा देने से वह पहाड़ की गरिमा वाला नहीं हो जाता,पूजा नहीं जाता ,जबकि किसी महापुरूष को कहीं झोपड़ी में भी बैठा दिया जाता है तो वह(महापुरूष) वहां भी पूजा जाने लगता है।व्यक्ति बड़ा होता है ,कुर्सी नहीं, और कुर्सी पर बैठा दिये जाने से व्यक्ति बड़ा नहीं हो जाता। मनमोहन सिंह जी,कितने लोग जानते हैं कि इन्द्र कुमार गुजराल भी प्रधानमंत्री थे और आज कहां हैं ?           
 
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