ताजा खबर
बागियों को शह देते मुलायम गैर भाजपावाद की नई पहल दम तोड़ रही है नैनी झील अखिलेश पर दबाव बढ़ा रहें है मुलायम
गिद्धों का सफाया हो चुका

 मोहम्मद निजाम,

रायपुर.देश के कई हिस्सों की तरह छत्तीसगढ़ में भी गिद्धों का लगभग सफाया हो चुका है। इस बात की शुरुआती सूचना के बाद वन विभाग ने गिद्धों की खोजबीन के आदेश दिए हैं। हरियाणा, असम की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी बेहतर जगह देखकर गिद्ध प्रजनन केंद्र खोलने की तैयारी की जा रही है। 
गिद्धों के बारे में शोध कर रहे वन्य प्राणी विशेषज्ञ और प्रख्यात फोटोग्राफर माइक पांडे का कहना है कि हरियाणा, असम समेत देश के चार प्रजनन केंद्रों से गिद्धों की संख्या को बढ़ाने में मदद मिली है। मध्यप्रदेश में भी इस तरह का प्रयास किया जा रहा है। करीब दस साल पहले देश में गिद्धों की संख्या 8.70 करोड़ थी, जिसमें से आज केवल 11 से 15 हजार गिद्ध बचे हैं। 
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर छत्तीसगढ़ में भी वन विभाग ने पड़ताल की थी। हाल में इस बाबत चिट्ठी आने के बाद गिद्धों की खोजबीन शुरू की गई है। 
प्रदेश में टीम गठित
फील्ड डायरेक्टर वाइल्ड लाइफ राकेश चतुर्वेदी का कहना है कि प्रदेश में गिद्धों की संख्या बहुत कम बची है। विभाग ने क्षेत्रीय वन संरक्षक की निगरानी में टीम भी गठित कर दी है। वन विभाग का अमला इसी महीने गिद्धों की तलाश में जुटेगा। अफसरों का कहना है कि रायपुर-बिलासपुर रोड पर सिमगा के आगे और कोरबा व सरगुजा में सबसे ज्यादा गिद्धों का बसेरा हुआ करता था। 
वहां खोजबीन की जाएगी। छत्तीसगढ़ में गिद्ध नहीं मिलने पर हरियाणा पिंजार से गिद्धों का जोड़ा मंगवाया जाएगा। विशेषज्ञों की निगरानी में उनके माध्यम से नस्ल बढ़ायी जाएगी। 
क्यों जरूरी हैं गिद्ध 
मृत मवेशियों को खाकर गिद्ध एक प्राकृतिक संतुलन बनाने में मदद करते हैं। गिद्धों का वजूद खत्म हाने के बाद मृत मवेशी खेतों और गांव के बाहर ऐसे ही पड़े रहने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मृत जानवरों से एंथ्रेक्स जैसी कई तरह बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। गिद्ध इस तरह बीमारी फैलने से रोकने में मदद करते हैं। 
10 साल पहले नौ करोड़, आज महज 15 हजार बचे
गिद्धों की खुराक मृत मवेशी हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यही उनके लिए मौत का कारण भी है। पालतू जानवरों को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए डायक्लोफेनिक दवा दी जाती है। इसके असर से मवेशियों को बीमारी से भले ही निजात मिल जाती है, लेकिन ऐसे मवेशी की मृत्यु के बाद उन्हें खाने वाले गिद्धों के मरने के दर्जनों प्रमाण हैं। 
"गिद्धों को बचाने के संबंध में केंद्र सरकार गंभीर है। भारत सरकार के निर्देश पर यहां योजना बनायी जा रही है। आने वाले दिनों में उसे अमली जामा पहनाया जाएगा।"
-आरके टमटा, सीसीएफ वाइल्ड लाइफ
 
 
email ईमेल करें Print प्रिंट संस्करण Dainik Bhaskar
  • जहां पत्रकारिता एक आदर्श है
  • जहां आये कामयाब आये
  • नामवर की नियति
  • चिड़िया ते बाज तुड़वाऊं?
  • प्रभाष जोशी और इंडियन एक्सप्रेस परिवार
  • एक ऋषि की यात्रा का अंत
  • असली मैदान तो यूपी बनेगा
  • राजकाज
  • भगतों की चांदी है
  • मेरठ के बांके!
  • बाबरी विध्वंस की आयी याद
  • इतिहास में उपेक्षित तिलका मांझी
  • आखिरी पड़ाव गोमोह जंक्शन
  • संगम के अखाड़े में लेफ्ट-राइट
  • एक थे लोकबंधु राजनारायण
  • अपनी जमीन ही नसीब हुई
  • रवीश के सामाजिक सरोकार
  • गिरोह क्यों कहते हैं
  • ई राजेंद्र चौधरी कौन है ?
  • मीडिया में धूमते चेहरे
  • Post your comments
    Copyright @ 2016 All Right Reserved By Janadesh
    Designed and Maintened by eMag Technologies Pvt. Ltd.