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याद किए गए मुक्तिबोध

 अरूण काठोटे

रायपुर। छत्तीसगढ़ की सुपरिचित सामाजिक संस्था महाराष्ट्र मंडल के तत्वावधान में  पिछले दिनों मुक्तिबोध सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह की सातवीं कड़ी में इस मर्तबा दो आलोचकों डॉ. राजेंद्र मिश्र (2008-09) तथा युवा लेखक जयप्रकाश को सत्र 2009-10 के लिए सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि विदर्भ साहित्य संघ के उपाध्यक्ष, कवि डॉ. श्रीपाद भालचंद्र जोशी थे।
इस मौके पर सम्मानित वरिष्ठ आलोचक डॉ.  राजेंद्र मिश्र ने कहा कि रचना से जीवन तथा जीवन से रचना उपजती है। इसलिए रचना हमेशा आलोचना से बड़ी होती है। वैचारिक स्वराज को जरूरी बताते हुए श्री मिश्र ने मुक्तिबोध का स्मरण कर उनके साहित्य के प्रभाव को रेखांकित किया। युवा आलोचक जयप्रकाश ने सम्मान को बेहद विनम्रता से स्वीकारने की वजह महाराष्ट्र मंडल की क्षेत्र में ख्याति तथा 75 बरसों की समर्पित सेवा भावना कहा। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. जोशी ने इस अवसर पर 'आतंकवाद का माध्यम और माध्यमों का आतंक' इस विषय पर गंभीर विचार प्रगट किए। अपने तर्कों और तथ्यों को उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के जरिए भी पुष्ट किया। श्री जोशी ने कहा कि आज शस्त्रों से मचाई जा रही हिंसा के बनिस्बत विचारों पर काबिज होता बाजारवाद और नष्ट होती वैचारिक क्षमता कहीं यादा हानिकारक है। माध्यम आज उन्हीं चीजों को परोस रहे हैं जिनसे उनका मुनाफा बढ़े। वैश्विक स्तर पर महाशक्तियां किस तरह इसे विस्तारित कर रही हैं, इसकी भी उन्होंने तथ्यों के साथ विवेचना की। आयोजन में मुक्तिबोध सम्मान के लिए गठित जूरी के सदस्य वरिष्ठ कवि विनोदकुमार शुक्ल, पत्रकारिता विवि के कुलपति सच्चिदानंद जोशी तथा युवा कवि डॉ. आलोक वर्मा के अलावा मुक्तिबोध परिवार से रमेश तथा दिवाकर मुक्तिबोध व बड़ी संख्या में सुधिजन उपस्थित थे। मंडल के अध्यक्ष अजय काले ने संस्था की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए समारोह की प्रतिष्ठा का संस्था के लिए महत्व प्रतिपादित किया। आयोजक द्वय अरुण काठोटे तथा रविंद्र ठेंगड़ी ने मराठी व हिंदी में प्रशस्ति पाठ का वाचन किया। श्री काठोटे ने समारोह के प्रारंभ से अब तक के विस्तार की जानकारी भी दी। उल्लेखनीय है कि सम्मान के तहत मंडल ने दोनों साहित्यकारों को ग्यारह-ग्यारह हजार की राशि, शॉल-श्रीफल तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।  
 
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