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सबसे बड़ा घोटाला

अशोक गुप्त

आजादी के बाद देश में इस कदर भ्रष्टाचार फैला कि लगा कि मानो हमें अंग्रेजी राज से नहीं बल्कि घोटाले करने की आजादी मिल गई है। राजसत्ता में रही कांग्रेस पार्टी के अधिकतर नेताओं के भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण कांग्रेस ने कभी भी घोटालों और भ्रष्टाचारों के विरूद्ध सख्त रूख नहीं लिया जिससे घोटालेबाजों को घोटाले करने का प्रोत्साहन मिलता रहा।
अब तक हुए घोटालों में ’बोफोर्स घोटाला, हर्षद मेहता का प्रतिभूति घोटाला, सत्यम घोटाला और मधु कोड़ा काफी चर्चित रहे हैं। हाल ही में कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला, आदर्श हाउसिंग घोटाला और दूरसंचार घोटाला काफी चर्चित रहे हैं पर दूर संचार घोटाला इन सब घोटालों का सरताज निकला है। सीएजी की जांच के अनुसार इस घोटाले से देश को लगभग 1 लाख 76 हजार करोड़ रू. का नुकसान हुआ है। यह राशि कितनी बड़ी है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राशि देश के रक्षा बजट के बराबर है। 
इस घोटाले का श्रेय तमिलनाडू में शासक रहे दल ’द्रविड़ मुनेत्रा कषगम‘ और उसके नेताओं करूणानिधि और पूर्व संचार मंत्राी ए राजा को जाता है। ए. राजा द्वारा किया गया घोटाला सामने आने पर विपक्षी दलों ने लोकसभा में सरकार से ए. राजा को हटाने की मांग की पर कांग्रेस सब कुछ जानते हुए भी ए. राजा को उनके पद से नहीं हटा पायी क्योंकि डी. एम. के नेता करूणानिधि राजा को हटाने को राजी नहीं थे। यह तो जयललिता के बयान कि यदि राजा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाए तो वे सरकार को समर्थन देंगी, के कारण सरकार राजा को हटाने पर अड़ गई और करूणानिधि को सहमत होना पड़ा।
इससे स्पष्ट है कि ए. राजा द्वारा किए गए इस घोटाले को द्रमुक प्रमुख करूणानिधि और अन्य नेताओं का आशीर्वाद प्राप्त था। संभवतः वह भी इस भ्रष्टाचार की कमाई में जरूर हिस्सेदार रहे होंगे। राजनीति स्वच्छता और नैतिकता के पैरोकार बनते डा॰ मनमोहन सिंह इस मामले में सब कुछ जानते हुए भी कुछ करने का साहस नहीं जुटा पायें और विरोधी दलों और सुप्रीम कोर्ट के समाने उन्हें शर्मसार होना पड़ा।
देश की राजनीति में कुछ मंत्रालय मलाईदार मंत्रालय माने जाते हैं और क्षेत्राीय दलों की रूचि उन्हें झटकने में ही रहती है। इसी समझौते के अंतर्गत डी एम के को संचार मंत्रालय मिलता रहा है। जब टू जी स्पेक्ट्रम के आवंटन की बात आयी तो करूणानिधि के रिश्तेदार दायानिधि मारन केंद्र के संचार मंत्राी थे। वे संचार मंत्राी के रूप में 2 जी स्पेक्ट्रम का लाभ अपने निकट संबंधियों को दिलवाना चाहते थे इसलिये उन्होंने ऐसी नीति बनायी पर जब करूणानिधि को लगा कि सारा माल दयानिधि मारन अकेले खा जाएंगे तो उन्होंने मारन की मंत्रिमंडल से छुट्टी करवा दी और अपने विश्वास के ए राजा को संचार मंत्राी बनवा दिया।
करूणानिधि स्वयं संचार मंत्रालय की हर गतिविधि पर निगाह रखते थे और ए राजा मात्रा उनके आदेशों का पालन करते थे। इस मामले में ए. राजा ने अपने मंत्रालय के अधिकारियों की सलाह पर भी कोई ध्यान नहीं दिया।
इस घोटाले में राजा ने सब सरकारी नियमों का उल्लंघन किया। कुछ कंपनियों को मनमर्जी से अयोग्य घोषित कर दिया गया और अपनी पसंद की कंपनियों को कौड़ियों के मोल स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया गया। वर्ष 2008 में स्पेक्ट्रम 2001 के बाजार मूल्य पर दिए गए। स्पेक्ट्रम देते समय यह ध्यान भी नहीं दिया गया कि कंपनियां इस क्षेत्रा की अनुभवी हैं या नहीं बल्कि रीयल एस्टेट कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटित किया गया जिन्होंने मोटे फायदे पर इसे अन्य कंपनियों को बेच दिया। 
सीएजी के अनुसार कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों का उल्लंघन किया गया और देश को 1 लाख 76 हजार करोड़ रू. का चूना लगाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में प्रधानमंत्राी की अच्छी खिंचाई की है।
इस मामले में दलाल के रूप में नीरा राडिया का नाम भी बहुत चर्चित रहा है। नीरा राडिया बड़े स्तर पर दलाली करती हैं और करोड़ों रूपये दलाली के रूप में वसूल करती हैं। यह भी आरोप लगे हैं कि नीरा राडिया ने अपने काम को अंजाम देने के लिए देश के प्रसिद्ध पत्राकारों वीर संघवी और बरखा दत्त की सहायता ली क्योंकि इन बड़े पत्राकारों के संपर्क सूत्रा प्रायः सत्ता के केंद्र तक होते हैं।
राजा को संचार मंत्रालय दोबारा मिलने में नीरा राडिया और पत्राकारों का काफी सहयोग बताया जाता है। नीरा राडिया पर अपने संबंधों द्वारा कई कंपनियों को स्पेक्ट्रम लाइसेंस दिलवाने का आरोप है। सीबीआई और इनकम टैक्स अधिकारियों ने नीरा राडिया के फोन टैप किए हैं और उससे बहुत सी जानकारियां मिली हैं।
विपक्ष इस मामले की जेपीसी द्वारा जांच के लिए आंदोलन कर रहा है। हालांकि जेपीसी जांच द्वारा भी प्रायः मामले की तह तक पहुंचना संभव नहीं होता पर इससे बहुत सी गुप्त बातें विपक्ष की ओर जनता की जानकारी में आ सकती हैं जिसका राजनीतिक लाभ हो सकता है।
समय की मांग है कि इस महाघोटाले की हर प्रकार से जांच की जाये, सीबीआई द्वारा भी और जेपीसी द्वारा भी और इसके पश्चात् तेजी से मुकदमा चला कर सब दोषियों को सजा दी जाए और उनसे देश का माल निकलवाया जाए ताकि यह घोटाला भी अन्य घोटालों की तरह फुस्स न हो जाए। 
 
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