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‘दुर्ग’ पर कब्जे की जंग

 संदीप पुराणिक

रायपुर,अप्रैल। दुर्ग संसदीय क्षेत्र में भाजपा-कांग्रेस व निर्दलीय प्रत्याशी भाजपा से निष्कासित सांसद ताराचंद साहू में कब्जे की जंग चल रही है। कांग्रेस-भाजपा का गढ़ रहे दुर्ग संसदीय सीट पर जातिवाद की छाया शुरू से रही है। इस चुनाव में हाल ही में हुए सामाजिक, राजनीतिक घटनाक्रमों ने सारे समीकरण बदल दिए हैं। जानकारों का कहना है कि यहां त्रिकोणीय मुकाबले के आसार दिखाई दे रहे हैं, लेकिन शहरी मतदाताओं का कहना है कि पूरी ताकत लगाकर भी ताराचंद मुख्य मुकाबले में शायद ही आ पाएं। पार्टी का चुनाव चिन्ह महत्वपूर्ण होता है। मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही होगा। । यह तो तय है कि ताराचंद साहू ने कांग्रेस और भाजपा दोनों की नींद उड़ा रखी है।
भाजपा से सांसद ताराचंद साहू के निष्कासन के बाद दुर्ग संसदीय क्षेत्र की राजनीति पिछले दो माह से गरमाई हुई है। लोगों में उत्सुकता बनी हुई है कि इस क्षेत्र में फिर जातिवाद का सिक्का चलेगा या कोई नया अध्याय इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा। निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चार बार इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके ताराचंद साहू ने भाजपा प्रत्याशी सरोज पांडेय व कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप चौबे की नींद उड़ा रखी है। राजनीतिक विश्लेषक ठीक से अनुमान नहीं लगा सक पा रहे हैं कि यहां के त्रिकोणीय मुकाबले में मुख्य प्रतिद्वंद्वी कौन दो होंगे। मतदाता फिलहाल मौन है, इसलिए कुछ कह पाना अभी मुश्किल है। छत्तीसगढ़ के सभी सीटों में जातिवाद का सर्वाधिक प्रभाव दुर्ग संसदीय क्षेत्र में रहा है। एक-दो अवसरों को छोड़कर दोनों ही पार्टियां यहां जातिगत आधार पर ही प्रत्याशी उतारती रही है। कांग्रेस में जहां कुर्मीवाद हावी रहा है वहीं भाजपा में साहूवाद। जातिवाद को उभारने का लाभ दोनों पार्टियों को मिला है। यह पहला अवसर है जब कांग्रेस व भाजपा ने जातिवाद से हटकर प्रत्याशी तय किए हैं लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी ताराचंद साहू जातिवाद के आधार पर ही चुनाव मैदान में हैं। ताराचंद साहू छत्तीसगढ़ियों के स्वाभिमान की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी नजर क्षेत्र के साहू वोटों पर ही है। इस संसदीय क्षेत्र में करीब 27 प्रतिशत मतदाता साहू है। अब तक साहूओं को भाजपा का वोट बैंक माना जाता रहा है। कांग्रेस को भी साहूओं के कुछ प्रतिशत वोट मिलते रहे। ताराचंद साहू ने इस वोट बैंक पर कब्जे के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियां असंतोष से भी जूझ रही है। भाजपा ने दो बार महापौर चुनाव जीतने और हाल ही में वैशालीनगर विधानसभा क्षेत्र से बड़ी जीत दर्ज करने के बाद सरोज पांडेय को बिना मांगे ही टिकट दे दिया। इसकी वजह यह मानी जा रही है कि अब तक के चुनाव में सरोज पांडेय के सामने जातिवाद सहित अन्य मुद्दे बेअसर साबित हुए हैं। भाजपा ने इस सीट पर पहली बार महिला प्रत्याशी को उतारा है। पार्टी ने पहले यह विचार किया था कि साहू की जगह साहू प्रत्याशी खड़ा कर वोट बैंक को खिसकने से रोका जाए। लेकिन अंतिम समय में पार्टी ने रणनीति बदलते हुए सरोज पांडेय को मैदान में उतार दिया। लेकिन पार्टी के एक वर्ग में सरोज को प्रत्याशी बनाए जाने की नाराजगी है। असंतुष्ट नेता यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या दुर्ग भाजपा में सिर्फ सरोज पांडेय ही रह गई है। उन्हें ही महापौर की टिकट, उन्हें ही विधानसभा की टिकट और अब लोकसभा की टिकट। प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठन में उन्हें ही पद। क्या भाजपा में काबिल नेताओं की कमी हो गई है। लेकिन इस असंतोष से ज्यादा खतरा पार्टी को ताराचंद साहू के आक्रामक रवैये से है। उनके करीबी समर्थक उनके साथ जुड़ गए हैं और पार्टी के असंतोष को भड़काने का काम भी वे कर रहे हैं। पार्टी के कई वर्तमान विधायक भी ताराचंद के करीबी माने जाते हैं, लेकिन फिलहाल वे पार्टी के साथ ही दिख रहे हैं। अपनी प्रतिष्ठा बचाना भी उनके लिए चुनौती है।
इधर कांग्रेस में भी असंतोष है। प्रदीप चौबे को पार्टी ने दस वर्ष बाद टिकट दी है तो पार्टी के कई नेता पचा नहीं सक पा रहे हैं। प्रदीप चौबे को प्रत्याशी बनाया जाना विधायक ताम्रध्वज साहू, बदरूद्दीन कुरैशी, पूर्व मंत्री डी.पी. धृतलहरे का नाम असंतुष्टों में गिना जा रहा है। ताम्रध्वज साहू द्वारा खुलकर दिए गए बयान और ताराचंद साहू के साथ एक मंच पर एकत्रित होने के मामले में अब तक बवाल मचा हुआ है। दुर्ग में आज भी कुर्मी नेताओं का कांग्रेस की राजनीति में अच्छा प्रभाव रहा है। कई सीटों में कुर्मी मतदाता प्रभावी स्थिति में है। कुर्मी नेता भी प्रदीप चौबे की उम्मीदवारी से खुश नहीं है। किसी ने खुलकर उनके खिलाफ बयान भी नहीं दिया है। लेकिन कुर्मी नेताओं की बहुत ज्यादा सक्रियता की उम्मीद भी नहीं है। चौबे समर्थकों का कहना है कि 10 साल पहले जब पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी बनाया था तब इससे ज्यादा विपरीत परिस्थिति थी। उन्होंने उस समय 3 लाख 45 हजार से ज्यादा वोट प्राप्त किए थे। जो कुल डाले गए मत का 40 प्रतिशत से ज्यादा थे। इस चुनाव में ताराचंद साहू के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरने से प्रदीप चौबे बेहतर स्थिति में है। क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी चौबे को स्पष्टवादी नेता के रूप में जानते हैं। चौबे मिलनसारिता, व्यवहारकुशलता के कारण पहचाने जाते हैं। उनकी उम्मीद दुर्ग शहर, ग्रामीण, पाटन, बेमेतरा के कुर्मी मतदाताओं पर टिकी हुई है। कुर्मी मतदाता कांग्रेस के परंपरागत वोटर माने जाते हैं और चंदूलाल चंद्राकर तथा दूसरे कुर्मी प्रत्याशियों को यहां से इसी आधार पर टिकट मिलती रही है। लेकिन कुर्मी समाज से प्रत्याशी नहीं बनाए जाने से उनमें भी नाराजगी है। वहीं क्षेत्र के अनुसूचित जाति के मतदाताओं का रुझान भाजपा की तुलना में कांग्रेस की ओर अधिक है। क्षेत्र के कई लोगों का कहना है कि ताराचंद साहू के चुनाव मैदान में होने से भाजपा को कुछ नुकसान तो अवश्य होगा। कई जानकारों का यह भी कहना है कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा की जीत हुई थी वह लीड भी बरकरार नहीं रहेंगी। क्योंकि भाजपा के चुने गए विधायकों के क्षेत्र में साहू मतदाता अधिक हैं। साहू समाज व मूल छत्तीसगढ़िया समाज के कई लोग ताराचंद साहू के साथ जुड़ गए हैं। साहू समाज द्वारा गांव-गांव में चुनाव के मद्देनजर मार्च महीने से ही कर्मा जयंती का आयोजन किया जा रहा है। कर्मा जयंती में बाकायदा ताराचंद साहू शामिल हो रहे हैं और समाज को जोड़ने का काम भी कर रहे हैं। ताराचंद साहू कुर्मी मतदाताओं को जोड़ने भी प्रयासरत है लेकिन जानकारों का कहना है कि कुर्मी व साहू जाति के लोग एक होंगे इसकी संभावना कम है। 
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कांग्रेस को पाटना है 27 हजार का गङ्ढा
दुर्ग लोकसभा क्षेत्र की कुल नौ विधानसभा सीटों में से पांच सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। चार अन्य पर कांग्रेस का कब्जा है। भाजपा को अभी हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कुल 48 हजार 969 की बढ़त हासिल हुई है और कांग्रेस को चार विधानसभा क्षेत्रों में 21 हजार 948 की बढ़त मिली है। दोनों ही पार्टियों को मिली बढ़त के अंतर को देखा जाए तो कांग्रेस को इस सीट पर 27 हजार 21 वोटों का गङ्ढा पाटने की चुनौती है। कांग्रेस को जिन सीटों पर बढ़त मिली उनमें से नेता प्रतिपक्ष रविंद्र चौबे पांच हजार मतों के अंतर से विजयी हुए तथा भिलाई नगर से बदरुदीन कुरैशी आठ हजार 863 मतों से दुर्ग ग्रामीण से प्रतिमा चंद्राकर एक हजार 557 और बेमेतरा से ताम्रध्वज साहू छह हजार 643 वोटों से जीत दर्ज किए हैं।
दुर्ग की जिन पाचों सीटों पर अभी हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की हैं उनमें पाटन से विजय बघेल सात हजार 842, दुर्ग शहर से हेमचंद यादव सात सौ दो तथा वैशाली नगर से सरोज पांडे 21 हजार 267, अहिवारा से डोमन लाल ने 12 हजार 651 वोटों तथा नवागढ़ से दयालदास बघेल ने छह हजार 507 मतों से जीत हासिल की है। इस तरह देखा जाए तो विधानसभा चुनावों के परिणामों के अनुरूप भाजपा ने 48,969 वोटों की बढ़त संसदीय सीट में पाई है तो कांग्रेस ने कुल 21 हजार 948 मतों की बढ़त हासिल की है। दोनों प्रमुख पार्टियाें के मतों की बढ़त के अंतर को देखा जाए तो कांग्रेस को इस चुनाव में 27 हजार 21 वोटों का गङ्ढा पाटने की चुनौती है।
बसपा का जनाधार बढ़ा
बसपा का हाथी पिछले 20 सालों से दुर्ग लोकसभा क्षेत्र में अपना पांव जमाने की फिराक में है। इस दौरान हुए सभी पांच चुनावों में पार्टी ने नए-नए चेहरे पेश किए। किन्तु वे तीसरे क्रम से ऊपर नहीं उठ सके। पहली बार वर्ष 1989 में पार्टी ने मिलूराम देशपांडे को टिकट दी। उन्हें 11135 (1.80 प्रतिशत) मत मिले। वर्ष 1991 में पार्टी ने चैनसिंह साहू को खड़ा किया। वे छह हजार 1515 (1.12 प्रतिशत) मत पाकर चौथे नंबर पर रहे। 1996 में उम्मीदवार बने पारसनाथ पटेल ने अपेक्षाकृत अच्छा प्रदर्शन किया। 4.58 फीसदी मत पाकर वे 29 हजार 168 वोट बटोरने में सफल हुए। अब पार्टी चौथे से तीसरे क्रम पर आ गई। पार्टी के 1998 के प्रत्याशी लखनलाल लसाहू का रिकार्ड अब तक के सभी उम्मीदवारों की तुलना में बेहतर रहा। उन्हें 68 हजार 818 (9.00 प्रतिशत) मत मिले और वे तीसरे नंबर पर रहे। वर्ष 1999 में हाथी के वजन में काफी गिरावट आई पार्टी प्रत्याशी भोईराम डडसेना 14 हजार 378 (1.89 प्रतिशत) मत ही पा सके। लेकिन पार्टी पूर्ववत तीसरे स्थान पर रही। प्रदर्शन सुधारने की आस में बीएसपी ने 2004 में महिला प्रत्याशी  श्रीमाताजी को खड़ा किया किन्तु वे भी कुछ खास नहीं कर सकी। उन्हें 17 हजार 938 वोट मिले जो कि कुल मतदान का महज 2.39 प्रतिशत रहा। इस चुनाव में भी पार्टी तीसरे स्थान पर रही। यहां उल्लेखनीय है कि बसपा ने वर्ष 2009 के लिए रघुनंदन साहू को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
भाजपा ने पहली बार चुनाव मैदान में महिला प्रत्याशी उतारा
छत्तीसगढ़ प्रदेश की अन्य संसदीय सीटों की तरह दुर्ग में भी महिला उम्मीदवारों की उपस्थिति यदा-कदा हो रही है। भाजपा ने इस चुनाव में पहली बार महिला उम्मीदवार के बतौर सरोज पांडे को प्रत्याशी बनाया है। जबकि कांग्रेस ने कभी ऐसा नही किया। ससदीय क्षेत्र के चुनावी इतिहास में देखें तो वर्ष 1951 से 1990 तक के सात चुनाव में एक भी महिला उम्मीदवार सामने नहीं आई। वर्ष 1984 में पहली बार निर्दलीय प्रभादेवी चुनाव लड़ी। उन्हें चार हजार 948 मत मिले तथा 13 उम्मीदवारों की भीड़ में वे चौथे क्रम पर रही।
वर्ष 1989 में आश्चर्यजनक रूप से एक साथ तीन निर्दलीय महिलाएं सामने आई। इनमें से पी. लक्ष्मी का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। उन्हें पांच हजार 613 मत मिले। वे 91 में भी चुनाव मैदान में उतरी लेकिन इस बार उन्हें सिर्फ 393 वोट मिल सके। इसी चुनाव में खड़ी गीता बाई उनसे भी कम सिर्फ 145 वोट पा सकीं। संसदीय सीट से वर्ष 96 में खडे 61 उम्मीदवारों की भीड़ में दो महिलाएं श्रीमती कंचन सिंह व प्रभा मिश्रा भी थीं। श्रीमती सिंह को तीन हजार 801 तथा श्रीमती मिश्रा को एक हजार 50 मत ही मिल सके। 1998 के चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने महिला उम्मीदवार छिन्नमस्त बिसे यादव को खड़ा किया। इन्हें सिर्फ 2,968 (0.39 प्रतिशत) मत मिले और वे आठवें स्थान पर रही। इसके पूर्व वर्ष 99 के चुनाव में भी कोई महिला उम्मीदवार सामने नहीं था। पिछले 2004 के चुनाव में कुल 11 उम्मीदवारों के बीच बसपा से महिला उम्मीदवार श्रीमाताजी चुनाव लड़ी थी जिन्हें कुल 17,935 वोट (2.39 प्रतिशत ) मत मिल सके थे। वे इस चुनाव में तीसरे स्थान पर रही। 
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एक नजर इधर भी
मतदाताओं की संख्या
15,73,351
मतदान केंद्रों की संख्या
1889
विधानसभा क्षेत्रों की संख्या
09
विधानसभा क्षेत्रों में काबिज पार्टियां
1 दुर्ग ग्रामीण - कांग्रेस प्रतिमा चंद्राकर 1557
2 भिलाईनगर - कांग्रेस बदरुद्दीन कुरैशी 8863
3 साजा - कांग्रेस रविन्द्र चौबे 5055
4 बेमेतरा - कांग्रेस ताम्रध्वज साहू 6473
5 दुर्ग शहर - भाजपा हेमचंद यादव 702
6 पाटन - भाजपा विजय बघेल 7842
7 वैशाली नगर - भाजपा सरोज पांडेय 21267
8 अहिवारा - भाजपा डोमनलाल कोर्सेवाड़ा 12651
9 नवागढ़ - भाजपा दयाल दास बघेल 6507
अब तक हुए चुनावों की संख्या-14
कांग्रेस जीती - 8 बार
भाजपा - 4 बार
भालोद - 01 बार
जनतादल - 01 बार
परिसीमन से विलोपित सीटें
मारो,धमधा,दुर्ग
भिलाई,खेरथा
परिसीमन में नवगठित सीटें
दुर्ग,ग्रामीण,दुर्ग
शहर भिलाई नगर
वैशाली नगर
अहिवारा, नवागढ़
वर्ष 2004 में मतदाताओं की संख्या
14,62,883
मतदान केंद्रों की संख्या
1510
वैध मतों की संख्या
7,61,815
वर्ष 2004 के मतदान का प्रतिशत
52.08
विजयी प्रत्याशी
तारांचंद साहू
(भाजपा)
दूसरे नंबर के प्रत्याशी
भूपेश बघेल
जीत-हार का अंतर 61,468
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लोकसभा क्षेत्र के चुनवी नतीजे (वर्ष 1991 से 2004 तक)
क्रम वर्ष नाम पार्टी प्राप्त मत प्रतिशत नाम पार्टी प्राप्त मत प्रतिशत
1 1951 डब्ल्यूएस किरोलीकर कांग्रेस 1,30,448 63.57 गंगाप्रसाद सीपीआई 29422 15.38
2 1957 मोहनलाल बांकलीवाल कांग्रेस 85,756 49.92 रत्नाकर झा पीएसपी 48,709 28.35
3 1962 मोहनलाल बांकलीवाल कांग्रेस 88,539 41.73 विश्वनाथ तामस्कर पीएसपी 59.671 28.12
4 1967 बी.बी. तामस्कर कांग्रेस 1,08,498 41.22 मोहनलाल बांकलीवाल निर्दलीय 74,180 28.18
5 1971 चंदूलाल चंद्राकर कांग्रेस 1,63,195 67.45 मोहनलाल बांकलीवाल एनसीओ 42.188 17.44
6 1977 मोहन भैया भालोद 1,77,922 52.91 चंदूलाल चंद्राकर कांग्रेस 1,24,347 37.58
7 1980 चंदूलाल चंद्राकर कांग्रेस 1,83,208 49.34 मोहन भैया जनता पार्टी 70,904 19.10
8 1984 चंदूलाल चंद्राकर कांग्रेस 3,11,000 64.24 धर्मपाल सिंह गुप्ता भाजपा 1,38,406 28.59
9 1989 पुरूषोत्तम कौशिक जद 3,35,131 54.11 चंदूलाल चंद्राकर कांग्रेस 2,25,098 36.34
10 1991 चंदूलाल साहू कांग्रेस 2,70,506 49.47 मनराखन साहू भाजपा 1,82,767 33.42
11 1996 ताराचंद साहू भाजपा 2,69,450 42.35 प्यारेलाल बेलचंदन कांग्रेस 2,43,703 38.31
12 1998 ताराचंद साहू भाजपा 3,84,901 50.45 जागेश्वर साहू कांग्रेस 3,16,183 41.45
13 1999 ताराचंद साहू भाजपा 3,89,777 51.24 प्रदीप चौबे कांग्रेस 3,45,259 45.39
14 2004 ताराचंद साहू भाजपा 3,82,757 50.24 भूपेश बघेल कांग्रेस 3,21,289 42.17
 
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