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अर्जुन सिंह की मौत पर कई सवाल ?

कृष्णमोहन सिंह्
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन सिंह की अखिल भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान (एम्स) में 2 मार्च 11 की शाम से हालत बहुत ज्यादे खराब हो गई । आवाज बंद हो गई। तंत्रिका तंत्र पर मस्तिक का नियंत्रण कमजोर पड़ता गया। शरीर कांपने लगा। हालत बहुत ज्यादा खराब होने पर 4 मार्च की सुबह साढ़े 6 बजे से आईसीयू में वेंटिलेटर पर रख दिया गया । उनकी इस स्थिति के बावजूद एम्स के बड़े डाक्टर ,आलाअधिकारी एक साथ बैठकर विचार नहीं कर रहे थे।कुछ डाक्टर रूटिन में अलग अकेले आते रहे ,देखकर चले जाते रहे।जिन डाक्टरों की लिखी दवा चल रही थी उनने जो पेरिटोनियम डायलिसिस 24 घंटे में 10 घंटे चल रही थी , 3 मार्च को उसे बढ़ाकर 20 घंटे कर दिया।यह  करने वाले डाक्टरों का तर्क था कि यह रक्त में बढ़ गये विषाक्तता को साफ करने के लिए बढ़ाया गया। किडनी खून की सफाई करती है ।जब किडनी काम करना बंद कर देती है तो खून की सफाई के लिए डायलिसिस किया जाता है। हीमोडायलिसिस 4 घंटे में हो जाता है और  कई दिनो बाद कराना पड़ता है। जबकि पेरिटोनियम डायलिसिस धीरे-धीरे होता है। पेरिटोनियम डायलिसिस में प्रोटीन का लास होता है।उसके बाद उन डाक्टरों ने कह दिया अर्जुन सिंह रिचप्रोटीन डायट नानवेज खा सकते हैं। जबकि इनकी 81 साल की अस्वस्थ शरीर  इतनी रिचप्रोटीन पचाने में सक्षम नहीं थी।कुछ लोग आशंका जताने लगे हैं कि अर्जुन सिंह के चिकित्सा में लापरवाही हुई ।  कुछ तो यह भी कह रहे हैं कि पेट में पेरिटोनियम डायलिसिस का कैथेडर डालकर इनको अपंग करा दिया गया,धीरे-धीरे  मौत की तरफ धकेला गया।और  पेरोटोनियल डायलिसिस से अर्जुन सिंह का खून पूरी तरह साफ नहीं हो पा रहा था। जिसके चलते खून में जहरीले तत्वों की मात्रा बढ़ती जा रही थी। एक बार बढ़ी थी तो इनको डिलिरियम हो गया था। जिसके बाद तुरंत हिमोडायलिसिस कराना पड़ा था। उसके बाद फिर रोजाना 10 घंटे पेरिटोनियम डायलिसिस पर कर दिया गया। तो फिर 2 मार्च से खून में जहरीले तत्वों की मात्रा बढ़ गई । जिसके चलते स्नायु तंत्र प्रभावित होने लगा । नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ  डाक्टरों का कहना है कि ऐसे में तुरंत हीमोडायलिसिस करना चाहिए था।लेकिन जिन डाक्टर ने पेरिटोनियम डायलिसिस कराने के लिए कहा उनका तर्क था कि हीमोडायलिसिस करने पर उनके हृदय पर जोर पड़ता, सो पेरिटोनियम डायलिसिस के लिए पेट में छेद करके नली लगाई गई। जिसके मार्फत रोज 10 घंटे पेरिटोनियम डायलिसिस किया जाने लगा। लेकिन अब वही डाक्टर कह रहे हैं कि पेट में इंफेक्शन बहुत ज्यादे हो गया था। अब सवाल यह उठने लगा है कि  यदि सही इलाज चल रहा था तो अर्जुन सिंह की हालत इतनी खराब होनी ही नहीं चाहिए थी।और जब 2 मार्च की शाम से हालत इतनी खराब हो गई तो डाक्टरों की टीम विचार के लिए 2 मार्च की रात तक या  3 मार्च की सुबह बैठी क्यों नहीं ? 3 मार्च को जब अर्जुन सिंह के निजी सचिव यूनुस ने सोनिया गांधी के यहां एक बार और स्वास्थ्यमंत्री  गुलाम नबी आजाद के यहां दो बार फोन करके अर्जुन सिंह की हालत बहुत खराब होने की बात बताई ,फिर गुलाम नबी ने दो बार एम्स के निदेशक आदि को फोन किया, तब जाकर डाक्टरों की टीम (डा.डेका,डा.शर्मा,डा.गुलेरिया,डा.पद्मा,डा.डे,डा.महाजन) शाम 5 बजे बैठी। उसके बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। क्योंकि तबतक तो हालत और भी ज्यादा खराब हो चुकी थी।उसके बाद से हालत लगातार और बिगडती गई तो 4 मार्च की सुबह साढ़े 6 बजे उनको आईसीयू में वेंटिलेटर पर रख दिया गया।और डाक्टरोंद्वारा कहा जाने लगा कि अगला 24 घंटा इनके जीवन के लिए बहुत ही क्रूसियल है।
अब लोग सवाल करने लगे हैं कि  इस लापरवाही व देरी के लिए जिम्मेदार कौन था ? या इसके पीछे कुछ और चल रहा था ? जब डाक्टर ,नर्स ,परिचारक आदि सब जान रहे थे कि जूता पहन कर,बिना मास्क लगाये,हाथ पर हैंड सेनेटाइजर(डिटाल आदि का किटाणु नाशक  लोशन) लगाये बिना उनके कमरे में जाने पर उनको (अर्जुन सिंह) इन्फेक्शन हो सकता है तो क्यों नहीं इसका पुख्ता इंतजाम व कड़ाई से पालन किया गया ? इलाज में कई तरह से लापरवाही होने की बात कही जाने लगी है। इन डाक्टरों की टीम क्यों स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद के दो बार फोन करने के बाद बैठती है ? अर्जुन सिंह की हालत इतनी ज्यादे खराब हो जाने के बाद गुलाम नबी के मंत्रालय से एक आदमी एम्स में क्यों रखा गया, पहले क्यों नहीं रखा गया ? कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी उनके(अर्जुन सिंह ) वेंटिलेटर पर जाने के बाद से उनके हालत के बारे में लगातार कुछ-कुछ घंटे बाद जानकारी लेने लगी थीं। अर्जुन सिंह के पुत्र राहुल सिंह 2 मार्च की रात को अपने पिता से मिलकर,अस्पताल में देखकर भोपाल गये थे ,क्योंकि दूसरे दिन उनका सवाल विधानसभा में लगा हुआ था। 4 मार्च की सुबह वह आ गये। उनकी हालत यह है कि कांग्रेस के आधे से अधिक विधायक उनको नेता विरोधी दल बनाने के लिए समर्थन दे दिये हैं। बाकी बचे विधायकों ने तीन अन्य कांग्रेसी के नाम का समर्थन किया है। एक हप्ते से अधिक हो गया,कांग्रेसी विधायकों के बहुमत का समर्थन होने के बावजूद राहुल सिंह के नाम की घोषणा नहीं हो रही है। बेटी वीना सिंह केवल एक दिन तब आईं जब उनको पता चला कि सोनिया गांधी अस्पताल में अर्जुन सिंह को देखने पहुंच रही हैं। उसके बाद 4 मार्च की सुबह अस्पताल आईं। अर्जुन सिंह की पत्नी सरोज सिंह की तबियत भी बहुत अच्छी नहीं है। वह रोज कुछ घंटे के लिए अस्पताल में आती रही थीं। अन्य परिजन कभी –कभार आ गये।प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस बार अर्जुन सिंह को देखने अस्पताल नहीं गये। उनकी पत्नी को फोन करके हाल-चाल पूछ लिये। वे तमाम लोग जिनको अर्जुन सिंह ने नेता , पदाधिकारी, सांसद, मंत्री,बड़ा अफसर आदि बनाया, कई जिनकी सत्ता बचाई – बनाई ,उनमें लगभग 95 प्रतिशत उनको अस्पताल में देखने,हाल-चाल लेने नहीं गये।और अब तो वह रहे ही नहीं। शाम को डाक्टरों ने कह दिया- ही इज नो मोर। एजेंसी पर खबर चल गई-अर्जुन सिंह बहुत दिनों से बीमार थे, दिल का दौरा पड़ने से आज उनका इंतकाल हो गया।

 
 

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