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बेगम से खुली हसन अली की किस्मत

आलोक कुमार
यह कहानी है उस हसन अली की जिसने हैदराबाद के निजाम की तिजोरी की हैसियत महारानी एलिजाबेथ की तिजोरी से बडी होने की बात को ढिढोरे की तरह पीटी। ऐसे में निजाम का दामाद जब एंटीक के कारोबार में शामिल हो जाए तो बाजार में क्या उसकी क्या कीमत लगेगी ? इस हसन अली को बुलंदियों पर पहुँचाया किसने यह सवाल दिलचस्प है । आगे पढ़े -
नई दिल्ली ,मार्च । आयकर विभाग को पचास हजार करोड रुपए की देनदारी खुशी खुशी भरकर बच निकलने को तैयार हसन अली को हसन अली बनाने में दो हसीनाओ का अहम किरदार है। पहली हैदराबाद की मेहबूबा उन्नीसा बेगम और दूसरी पुणे की रेहीमा खान। हसन अली ने दोनों ही हसीनाओं से अदावत की। फर्ज निभाया और जिंदगी में शामिल किया। गोया दोनों ही हसीनाओं को हसन अली की बीबी कहलाने का मौका मिला। जांच एजेंसियों के डॉजियर में इन दो हसीनाओं के अलावा भी कई महिलाएं हैं जो हसन अली के लेडी किलर के छवि को पुख्ता करते हैं।
 हसन अली ने पूछताछ में कबूल किया है कि अगर हैदराबाद की मेहबूबा उन्नीसा बेगम उसकी जिंदगी में नहीं आती तो उसकी जिंदगी "खाकसार" से उछलकर "खास" लोगों में शुमार नहीं होती। हैदराबाद के कबाड के व्यापार के दौरान कोई पच्चीस साल पहले उसकी मुलाकात मेहबूबा उन्नीसा से हुई। खुबसूरत हुस्न की मल्लिका मेहबूबा उन्नीसा हर मामले में हसन अली से उन्नीस थी। सुस्त औऱ भौडा सा दिखने वाला हसन अली का उन्नीसा पर जादू चल गया। उन्नीसा का ही दिमाग था जो हसन अली को अहसास करा गए कि वह बेशुमार दौलत के मालिक बन सकता है। हैसियतदार घर से आने वाली उन्नीसा का हैदराबाद के निजाम से दूर का रिश्ता है। यानी दूर का ही सही शादी के बाद हसन अली हैदराबाद के निजाम परिवार का दामाद बन बैठा।
फिर क्या था ? किस्मत के घोडे ने ऐसे कुलांचे भरे कि "दामाद राजा" कबाडियों के ओहरे से निकलकर झटके में खबरपतियों के बीच उठने बैठने लगा। हसन अली ने कबाड के व्यापार में एंटीक के कारोबार को शामिल कर लिया। उन्नीसा से शादी के रास्ते रचा गया हसन अली का फितूर जांच एजेंसियों को अब बखूबी समझ आ रहा है।
हसन अली ने आजादी के वक्त हैदराबाद के निजाम की तिजोरी की हैसियत महारानी एलिजाबेथ की तिजोरी से बडी होने की बात को ढिढोरे की तरह पीटी। ऐसे में निजाम का दामाद जब एंटीक के कारोबार में शामिल हो जाए तो बाजार में क्या उसकी क्या कीमत लगेगी ? इसे समझना मुश्किल नहीं है। दुनिया भर में एंटीक के ज्यादातर शौकीन अरब खरबपति हैं। एंटीक की खरीददारी उनके लिए है जिनके लिए पैसा बेमोल है। एंटीक के कारोबार से वो सब हसन अली के निशाने पर आ गए।
चालाक,चतुर हसन अली ने अपने शहर हैदराबाद के पुराने धुरंधर चंद्रास्वामी के अजमाए रास्ते को भी अपनाया और देखते-देखते अदनान खशोगी के सिंडिकेट से रिश्ता बना लिय़ा। और एंटीक के कारोबार के रास्ते अदनान के आर्म्स डीलिंग के धंधे में शामिल हो गया। इस धंधे ने हसन अली स्वीट्जरलैंड का रास्ता और स्विस बैंक में खाता खोलने का गुर सिखा दिया।
जिंदगी ने झटके से करवट बदली और हैदराबाद के मुर्शीदाबाद इलाके की तंग गली कूचे से निकालकर हसन अली खान ने अपने विशाल परिवारिक कूनबे को बंजारा हिल्स के आलीशान कोठी में पहुंचा दिया। हसन अली के छह बहनें और एक भाई है। हसन अली की तरक्की स्वर्गीय ग्यासुद्दीन अली के अकल्पनीय हसरत के साकार होने जैसा है।पिता ग्यासुद्दीन के बारे में डॉजियर में दर्ज है कि वह आंध्र प्रदेश के एक्साइज विभाग के इमानदार मुलाजिम थे और अपने छप्पन छूरी वाले संतान हसन अली की करतूतों से सदा खफा रहते थे। बाद में हसन अली का भाई कनाडा का वाशिंदा हो गया और मां भी टोरंटो जाकर रहने लगी। बहनें भी शादी के बाद हसन अली से दूरी नापने में ही खुद को महफूज समझती हैं। डॉजियर में हसन अली की मां के बारे में रोचक वाकया है। हसन की अम्मी जब बीमार पडी तो अकूत दौलत के मालिक बेटे ने टोरंटो एअरपोर्ट पर किराए का निजी विमान खडा कर दिया ।
आंध्र के लोग जिस बंजारा हिल्स पर आलीशान कोठी तक पहुंचकर सपने देखना औऱ बुनना कम कर देते हैं यानी कि सब्र कर लेते हैं। हसन अली ने वो सब्र नहीं किया। या फिर यूं कहिए हसन अली ने गोरखधंधे के जिस गाडी की सवारी कर ली उसमें कोई ब्रेक है ही नहीं।
घुडदौड के शौक ने हसन अली को दुनिया के उन तमाम रेसकोर्स का मुआयना कराया जहां बडे से बडे दौलतमंद तिजोरी में इजाफे का सपना लिए भटकते रहते हैं। इन भटकते खबरपतियों में हसन अली खुद को उतारता रहा। स्कैन करके कौन काम का और कौन बेकाम का के अलग अलग खांचे में डालता रहा।
फिर हसन अली की जिंदगी ने करवट बदली। खास वजहों से उसे पुणे का रेसकोर्स भा गया। पुणे का रेसकोर्स डिफेंस के आला अफसरों का जमावडा लगता है। पर बात इतनी भर नहीं थी। फैसल अब्बास पुणे रेसकोर्स का मशहूर हार्स ट्रेनर है। हसन अली ने फैसल को पहले ही साध रखा था। पर व्यापार में तरक्की के गणित को बैठाते हुए हसन अली ने दोस्त फैसल की बहन रेहीमा से टांका भिडा लिया। रेहीमा उम्र में हसन अली के पहले बेटे से भी छोटी है। फिर भी हसन अली के मतलबी फसाने का क्या कहना। अपने से बाईस साल छोटी रेहीमा में उसे ऐसी उम्मीद झलकी कि उसने पिछली जिंदगी से फासला बनाना शुरू कर दिया। बंजारा हिल्स के आलीशान कोठी और वहां रहने वाली मेहबूबा उन्नीसा बेगम उसे नागवार गुजरने लगी। रेहीमा का जादू काम करने लगा। और पैसे के लिए कुछ भी करने की हसरत रखने वाले हसन अली ने मेहबूबा उन्नीसा से तलाक लेने का फैसला कर लिया।
तेजतर्रार रेहीमा की जिद थी कि तलाक के बिना वह हसन अली की बीबी नही बनेगी। फसाद जब ज्यादा बढ गया तो हसन ने अपने लालची बेटों को होंडा कार गिफ्ट कर पटा लिया और तलाक का रास्ता आसान कर लिया। हसन अली ने पूछताछ में बताया है कि 2005 में तलाक फाइनल होने के बाद से वह हैदराबाद बहुत कम ही गया है। रेहीमा से उसका छह साल का बेटा है। हसन अली की जिंदगी की दूसरी हसीना रेहीमा बडी राजदार बताई जा रही है। हसन अली पर रेहीमा का ज्यादा असर है। और जांच एजेंसियां अब इसी रेहीमा अली के गिरफ्तारी का तानाबाना बुन रही है। रेहीमा अली से पूछताछ के बाद हसन अली प्रकरण में कई और हंगामेदार खुलासे की उम्मीद की जा रही है।

 

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