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हर मोड़ पर मौत का सामान

उषा नेगी 
शिमला . यदि वक्त रहते बच्चों को नहीं संभाला तो रोज जाने कितनी माताओं का आंचल सुषमा की तरह सूना हो जाएगा। नशे से बेवक्त मौत के लिए कौन जिम्मेवार है? अभिभावक जिनके पास औलाद के लिए समय नहीं है या वे जो मासूम बच्चों को हर मोड़ पर मौत का सामान उपलब्ध करवा रहा है, या शिक्षक जो संस्कारित शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं।
तीन साल पहले यस संस्था ने राजधानी के स्कूली बच्चों पर नशे को लेकर सर्वे किया था। सर्वे में पाया गया कि 54 फीसदी (जो अब 60 से अधिक होने का अनुमान है) स्कूली बच्चे अलग-अलग नशे के आदी हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें 24 फीसदी लड़कियां थीं। सर्वे में शहर के सात बड़े सरकारी और पांच नामी प्राइवेट स्कूलों को लिया था। 10 से 19 साल के पांचवीं से 12वीं कक्षा के स्टूडेंट्स शामिल थे।
आईजीएमसी के मनोचिकित्सक विभाग के प्रमुख डॉ. रवि शर्मा सहित दो अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर्स ने इसमें सहयोग दिया। 29.3 फीसदी तंबाकू बीड़ी, सिगरेट, 25.5 फीसदी भांग व अफीम, 21 प्रतिशत अफीम और अन्य कैमिकल, तीन प्रतिशत को कोकीन की लत है। यस संस्था के अध्यक्ष आकर्षण चौहान ने कहा कि उनका यह सर्वे अब पुराना हो चुका है। अब स्कूली बच्चों में नशा और अंदर तक घर कर चुका है।
बच्चों पर रखें ध्यान
अभिभावक बच्चों की दिनचर्या पर ध्यान रखें। यदि बच्चा चुप-चुप रह रहा है तो उसे गंभीरता से लें। स्कूल में जाकर टीचर्स व उसके दोस्तों से मिले। अहम बात यह है कि बच्चों के साथ उसके दोस्त बन कर रहिए, ताकि वह कोई भी बात शेयर करने में झिझक महसूस न करें। -डॉ. रवि शर्मा. अध्यक्ष, मनोरोग विभाग आईजीएमसी
 

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