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चढ़ता पारा और उतरता सर्वजन?

 अंबरीश कुमार

लखनऊ, अप्रैल। उत्तर प्रदेश में सर्वजन का मिथक टूटता नजर आ रहा है। सर्वजन यानी अगड़ी जतियां और उसमें भी ब्रामणों का वर्चस्व। पिछले विधानसभा चुनाव में मायावती को जब जबरदस्त बहुमत मिला तो कहा गया कि यह सर्वजन और बहुजन का साङा कमाल है। मायावती ने ब्रामण वोटों के ध्रुवीकरण का पुरस्कार सतीश मिश्र को दिया और वे रातों रात ब्रामणों के नए नेता बन गए। पर इस लोकसभा चुनाव में विभिन्न संसदीय क्षेत्रों से जो खबरें मिल रही हैं, उससे साफ है कि ब्रामण किसी एक दल के साथ नहीं है बल्कि अलग-अलग राजनैतिक स्थितियों के मुताबिक वोट दे रहा है। दूसरी तरफ  ब्रामण  समेत अगड़ी जतियों के भरोसे जो राजनैतिक दल हैं, उनकी चिंता बदलते मौसम के साथ बढ़ती जा रही है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में पारा ४५ के आसपास पहुंच चुका है और यह इसी तरह बढ़ता रहा तो मतदान बुरी तरह प्रभावित होगा।
बहुजन समाज पार्टी जो सर्वजन का प्रयोग कर चुकी है, इस बार काफी आशंकित नजर आ रही है। एक तो ब्रामणों का रूङान बदल रहा है, दूसरे मौसम और कहर ढा रहा है। इसके चलते शहरों में अगड़ी जतियों का वोट कम पड़ेगा जिसका खामियाज भी उठाना पड़ सकता है। आज दोपहर बाद रायबरेली के ऊंचाहार और सरैनी में भाजपा नेता कलराज मिश्र जब सभा के लिए हेलीकाप्टर से नीचे उतरे तो ४५ डिग्री तापमान और लू के थपेड़ों से बेहाल हो गए। इसी तरह तपती दोपहरिया में समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव को भी डुमरियागंज में हेलीकाप्टर से उतरते ही लू का सामना करना पड़ा। रायबरेली और अमेठी में प्रियंका गांधी ४४-४५ डिग्री तापमान में नीबू-पानी पीकर लू के थपेड़ों के बीच बिना माइक के सभाएं कर रही हैं। पूरे दिन में उनकी करीब २0 सभाएं हो रही हैं। गर्मी को लेकर प्रियंका गांधी भी चिंतित हैं। एक जनसभा में प्रियंका गांधी ने कहा-गर्मी अभी और बढ़ेगी लेकिन जिस दिन मतदान है, उस दिन हर हाल में वोट डालने निकलना है। 
सभी राजनैतिक दलों की चिंता बढ़ती गर्मी में कम मतदान को लेकर है। ऐसे में सबसे ज्यादा प्रभावित बसपा का सर्वजन होने वाला है। गर्मी बढ़ने के साथ-साथ बिजली की कटौती बढ़ रही है और इसका असर भी मतदान पर पड़ेगा। भाकपा नेता अशोक मिश्र ने कहा-गर्मी में उच्च वर्ग के लोग वैसे भी कम निकलते हैं और जो निकले भी यदि वे बिजली कटौती के शिकार हुए तो गुस्सा भी सत्तारूढ़ दल के खिलाफ ही निकलेगा। जहां तक सर्वजन की बात है तो यह बसपा का मुगालता है। पिछले विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह सरकार के कामकाज के तरीकों को लेकर ब्रामणों में काफी नाराजगी थी जो उनके खिलाफ मायावती के समर्थन में नजर आई। इससे यह गलतफहमी पाल लेना कि ब्रामण बसपा के साथ खड़े हो गए हैं, उचित नहीं है। 
वैसे भी अलग-अलग चुनाव क्षेत्रों में ब्रामण और अन्य अगड़ी जतियों का रूख अलग-अलग है। गोंडा में तीन राजपूत उम्मीदवारों से संघर्ष कर रहे कांग्रेस के बेनी प्रसाद वर्मा के पक्ष में नारा लग रहा है-एक दबाओ, तीन गिराओ। खासबात यह है कि इस सीट पर ब्राrाण कांग्रेस के पक्ष में खड़ा होता नजर आ रहा है। दूसरा उदाहरण उन्नाव का है। उन्नाव में बसपा ने बाहुबली अरूण शंकर शुक्ला उर्फ अन्ना को खड़ा किया है लेकिन सर्वजन का बड़ा तबका कांग्रेस की उम्मीदवार अनु टंडन के पक्ष में नजर आ रहा है। हैरानी की बात है कि अनु टंडन ने उन्नाव में कांग्रेस को खड़ा कर दिया है। इन दोनों उदाहरणों से साफ है कि इस बार सर्वजन का मूड बदलता जा  रहा है। 
सर्वजन और मौसम का संबंध भी रोचक है। मध्य वर्ग और उच्च मध्य वर्ग के लोग भीषण गर्मी में बहुत कम ही मतदान के लिए निकलते हैं। ऐसे में बसपा के लिए यह खतरे की घंटी है जो सर्वजन और बहुजन की नाव पर सवार होकर लोकसभा चुनाव की वैतरणी पार करना चाह रहे हैं।  जनसत्ता 
 
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