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कांग्रेस को बढ़त मिलती नज़र आ रही है

 अनामिका 

नई दिल्ली,  अप्रैल - लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बढ़त मिलती नज़र आ रही है।कई राज्यों में पहले और दुसरे चरण के मतदान के बाद यह नज़र आ रहा है। लगता है कि कांग्रेस 159 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। अब मतदान के बाद अनुमान काफी कुछ स्पष्ट है। अंतर उन सीटों पर होगा जहां पर कड़े संघर्ष की संभावना है। ऐसी लगभग सौ सीटों जहां चतुष्कोणीय मुकाबले की स्थिति है। इन सीटों पर चौंकाने वाले परिणाम सामने आ सकते हैं।
यह संभावना उत्तर प्रदेश और बिहार में ज्यादा मजबूत नजर आ रही है। चुनाव परिणाम में असर डालने वाला एक अन्य महत्वपूर्ण कारक उत्तर प्रदेश से बाहर कुछ राज्यों में बसपा की उपस्थिति है। बसपा की उपस्थिति कांग्रेस के वोट बैंक को प्रभावित करेगी। मौजूदा स्थितियों को देखते हुए  लगता है कि कांग्रेस 159 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। भाजपा को 141 सीटें मिल सकती है। दूसरी ओर वामपंथी दल 36 सीटों पर सिमट जाएंगे।
 राजग, संप्रग और तीसरा मोर्चा, इन तीनों समूहों के भीतर छोटे समूह उभरेंगे, जो आपस में मिलकर एक बड़ा गठबंधन बनाएंगे। उदाहरण के लिए सपा, राजग, लोजपा का समूह एनसीपी, वामपंथी दल और बीजद के साथ मिलकर एक गठबंधन बना सकता है। फिर भी इस संभावना को किसी को भी बहुत गंभीरता से नहीं लेना चाहिए, क्योंकि संख्या बल ही तय करेगा कि अंतिम तौर पर किसी पार्टी का क्या स्टैंड रहता है। तीसरा और चौथा मोर्चा चुनाव बाद बेहतर स्थिति में आने के लिए क्षेत्रीय दलों से समझौता करेगा और कांग्रेस कम से कम 150 सीटें जीतकर न केवल सबसे बड़े दल के रूप में उभरेगी, बल्कि पूरे आसार हैं कि वह 2009 में बनने वाली सरकार का नेतृत्व भी करेगी।
 सीटों के अनुमान पर अगर राज्यवार निगाह डालें तो आंध्र प्रदेश में कांग्रेस को 19, तेलुगूदेशम पार्टी को 13 और टीआरएस को 6 सीटें मिलने की संभावना है। बिहार में कांग्रेस को एक, भाजपा को 9, जनता दल यूनाइटेड को 19, राष्ट्रीय जनता दल को 7 और लोकजनशक्ति पार्टी को 4 सीटें मिल सकती हैं। गुजरात में नरेंद्र मोदी का जादू बरकरार रहेगा और 18 सीटें भाजपा के खाते में जा सकती हैं, जबकि कांग्रेस को आठ सीटों से संतोष करना पड़ सकता है। कर्नाटक में भी भाजपा के पास 18 और कांग्रेस के पास आठ सीटें रहने का अनुमान है।
 मध्य प्रदेश में भाजपा को 23 और कांग्रेस को 7 सीटें मिल सकती हैं। महाराष्ट्र में कांग्रेस को 14, भाजपा को 13, शिवसेना को 10, एनसीपी को 10 सीटें मिल सकती हैं। तमिलनाडु की 39 सीटाें में कांग्रेस को 3, अन्नाद्रमुक को 16, वाम दलों को 4, द्रमुक को 7 और पीएमके को 5 सीटें मिल सकती हैं। उत्तर प्रदेश में 32 स्थानों में साथ बसपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर सकती है। सपा को 20, भाजपा को 13 और कांग्रेस को 11 सीटें मिलने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल में वाम दलों को 23, तृणमूल कांग्रेस को 11, कांग्रेस को 7 और भाजपा को तीन सीटें मिल सकती हैं।
 समूह वार सीटों का अनुमान देखें तो संप्रग को 181 (सपा, राजद, लोजपा शामिल नहीं) और राजग को 185 सीटें मिलने का अनुमान है। यदि इन तीनों दलों को जोड़ लिया जाए तो संप्रग की संख्या 212 पर पहुंचती है। तीसरे मोर्चे के पास 132 सीटें रहने के आसार हैं। जो दल किसी भी तरफ जा सकते हैं उनमें एनसीपी (11), तृणमूल कांग्रेस (11), द्रमुक (7), झामुमो (2), रालोद (4), लोजपा (4), प्रजाराज्यम (3), टीआरएस (6), अन्नाद्रमुक (16), पीएमके (5) शामिल है। संभावित गठबंधन का आकलन करने के लिए इस तथ्य पर गौर किया जा सकता है कि नेशनल कांफ्रेंस (2), सपा (20), राजद (7), वामपंथी दल (36), भाजपा के साथ जाने से परहेज करेंगे और शिवसेना (10), अकाली दल (5), अगप (इनेलो), बसपा (36), तेलुगूदेशम (13) और एमडीएमके (2) कांग्रेस के साथ जाने से बचेंगे।
 
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