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शिलांग के राजभवन में

अंबरीश कुमार
बात काफी पुरानी है ।अपने साथी अजय जो केंद्र में एक बड़े ओहदे पर रहे उनके साथ पूर्वोत्तर की यात्रा पर था । गुवाहाटी से शिलाग और फिर चेरापूंजी । बीएसऍफ़ का पुराना एवरो  विमान था ।आठ सीट वाला जिसमे ठीक बीच में चार आरामदेह सीटे आमने सामने थे और बीच में एक टेबल  । आगे भी पर्दा और पीछे भी ।सुबह करीब आठ बजे दिल्ली से निकले थे और बागडोगरा होते हुए दोपहर तक गुवाहाटी में थे । बागडोगरा हवाई अड्डे पर कुछ देर रुके भी और दार्जलिंग की चाय के साथ नाश्ता हुआ । यहाँ तक मौसम साफ़ और खुशनुमा था ।यह पुराना और छोटा विमान ज्यादा ऊंचाई पर नहीं उड़ता और नीचे का दृश्य भी दिखता रहता । पर जैसे ही बागडोगरा से आगे बढे बादलों के बीच विमान फंसा और उसकी आवाज गुर्राहट में बदल गई तो चल भी बदल गई । तेजी से उपट नीचे होते विमान को देख डर लगने लगा ।बरसात भी शुरू हो गई थी । पहाड़ ,बादल और बरसात का यह दृश्य अद्भुत तो था पर रह रह कर डरा रहा था ।बीच बीच में नीचे खेत और जंगल दिखते तो दूसरे पल उसपर बादल आ जाता । कुछ देर बाद इन बादलों से मुक्त हुए तो जान में जान आई । अमूमन सामान्य फ्लाईट में इस तरह की समस्या ज्यादा परेशां नहीं करती क्योकि विमान बड़े और अत्याधुनिक होते है पर वायु सेना और बीएसएफ के ये एवरो विमान बहुत पुरानी तकनालाजी वाले है जिससे दिक्कत होती है । खैर गुवाहाटी हवाई अड्डे पर उतरे तो आसमान साफ था ।
सर्किट हाउस में आराम के लिए गए और बाद में शिलांग निकल गए । करीब सौ किलोमीटर की दूरी में ही सब कुछ बादल गया । आबोहवा बदली तो पेड़ों के रंग रूप भी बदल गए । सड़क अच्छी थी इसलिए कर की रफ़्तार भी ठीक ठाक थी ।सड़क कुछ देर में ही मुड़ जाती और नए दृश्य सामने होते । यह अंचल बादलों का मायका माना जाता है  ।   शिलांग पहुँचते पहुँचते मौसम इतना बदला कि स्वेटर निकलना पड़ा   ।  अचानक हुई बरसात ने इस बदले हुए मौसम को और ताकत  दे दी । शिलांग के  राज भवन  जब पहुंचे तो  अँधेरा हो चुका था और ठंड और बढ़ चुकी थी । जिस सूट में रुके वह काफी गर्म था । थकावट के चलते खाना खाने के साथ ही जल्दी सोना हुआ । सुबह तेज रौशनी से आखं खुली तो खिड़की के बाहर का  दृश्य  देख क आर रोक  न सका और शाल ओढ़कर कर बाहर निकल आया । साथ में एक कर्मचारी भी चाय की ट्रे लेकर साथ आ गया ।ओस  से भीगी घास पर  कुछ देर टहलने के बाद किनारे लगी कुर्सी पर बैठ गए और चाय  के साथ शिलांग के बारे में उस कर्मचारी से जानकारी लेने लगा । राज भवन का  वास्तुशिल्प  और बगीचा भव्य लगा । जारी

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