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मस्तराम कपूर

चंचल
 …… कल दिल्ली में समाजवादी विचारक मस्तराम कपूर का निधन हो गया। यह कोई खबर नहीं है क्यों कि खबर बनने के लिये मस्तराम जी के पास कुछ भी नहीं था। न तो उनके पास कोई ओहदा था न ही वह किसी ओहदे के लिए उठा पटक में लगे थे। कपूर साहब के पास न तो अकूत दौलत थी न ही उनका नाम किसी घोटले से जुड़ा था। उनके पास जो कुछ भी था वह आज ‘खबर’ बनने के लिये कोई तर्क नहीं देता।
वे गांधी और लोहिया के विचारों के वाहक थे। उनके पास एक मजबूत लेखनी थी। समाजवादी समाज बनने की दिशा में जो कुछ भी किया जा सकता है कपूर साहब उसके लिए प्रतिबद्ध थे।
हमारी उनकी पहली मुलाक़ात पंडारा रोड पर मधु जी ( स्वर्गीय मधु लिमये ) के घर पर हुयी। उम्र में हमसे बड़े होने के बावजूद हम दोनों दोस्त बन गये। बाद के दिनों में हम पड़ोसी भी बने। मयूर विहार में अगल-बगल रहते थे। खादी का कुर्ता पाजामा, मुस्कुराता हुआ चेहरा और अन्दर जलती हुयी आग जो उनके लेखन में देखी जा सकती है। कमाल की शख्सियत।
एक बार मधु जी हमारे घर आये। दोपहर का खाना हमारे घर पर था। खाना खाने के बाद मधु जी ने हमसे कहा कि यहीं कहीं तो  मस्तराम भी रहते हैं ? हमें अपनी गलती का भान तो हुआ लेकिन हमने कुछ बोला नहीं। मधु जी को लेकर हम मस्तराम जी घर पहुँचे। गर्मियों के दिन थे। घर की कुंडी खटखटाया तो कपूर साहब खुद दरवाजे पर आये। एक हाथ में चश्मा दूसरे में कलम। मधु जी ने पूछा कुछ लिख रहे थे क्या … कपूर साहब ने मधु जी की बाँह पकड़ ली – पहले अन्दर तो आइये। अपनी बेटी को बुलाया और बोले तरबूज का शरबत बनाकर लाओ। बातचीत के दौरान कपूर साहब ने पूछा – अचानक इधर कैसे आना हुआ ? मधु जी ने बताया – अचानक नहीं प्रोग्राम तो परसों ही
तय हो गया था कि आज दोपहर का खाना चंचल के घर खाना है। दो पल की चुप्पी के बाद मधु जी ने कपूर साहब से पूछा – तुम ज्यादा खाते हो क्या ? यह अजीब सवाल था। हम सब चौकन्ने हो गये।  मधु जी ने बड़ी संजीदगी से कहा- अगर ऐसा नहीं है तो चंचल ने तुमको बुलाया क्यों नहीं। हम सब को हंसी छूट गयी। हमने झेंपते हुये कपूर साहेब से माफी माँगी। अब कपूर साहेब की बारी थी – आगे से ऐसा कुछ मत करना कि माफी माँगनी पड़े। अब देखो परसों मंगलवार है मेरी बेटी का जन्म दिन और मै माफी नहीं माँगूगा। मधुजी गवाह रहेंगे … क्यों मधु जी ? आज न मधु जी हैं न ही मस्तराम जी रहे। हम दिल्ली में नहीं पहुँच पाये। कपूर साहेब एक बार और माफी दे दो। नम आँखों से नमन कपूर साहेब ….

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