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संघ का पारम्परिक विरोध कब तक
    एचएल दुसाध
    मेरे ओबीसी मित्रों!आप यदि मोदी के उभार से परेशान होकर संघ के साथ भाजपा जैसे उसके शिशु संगठनों तथा नव-हिन्दू ह्रदय-सम्राट नरेन्द्र मोदी को सांप्रदायिक और मुस्लिम – विरोधी साबित करने में सर्वशक्ति लगाते हैं तो आप खुद संघ के बिछाए जाल में फंसते जा रहे हैं. यह काम प्रगतिशीलता का लबादा ओढ़ने वाले सवर्ण मित्रों पर छोड़ ददें.संघ परिवार अपने जन्म काल से ही ऐसे हालात पैदा करने का अवसर निकालता रहा है जिससे उसपर उग्र मुस्लिम विरोधी होने का ठप्पा लगे.ऐसे हालात पैदा होने पर कथित धर्मनिपेक्षतावादी उस पर साम्प्रदायिकता का आरोप लगाने से रोक नहीं पाते और यही हिन्दुओं के ध्रुवीकरण का कारण बन जाता है ,जिसके लिए संघ सब समय सचेष्ट रहता है.संघं का घोषित एजेंडा कथित राष्ट्रवाद के नाम पर मुस्लिम विद्वेष का प्रसार जरुर है.लेकिन उसका हिडेन एजेंडा सवर्ण हित का पोषण है.अपने हिडेन एजेंडे को पूरा करने के लिए वह ऐतिहासिक कारणों से हिन्दुओं के चेतन –अवचेतन में जमे मुस्लिम –विद्वेष को इतेमाल करने की जुगत भिड़ाते रहता है.
    आज भाजपा के जो पुनः सत्ता में आने के आसार पैदा हो रहे हैं उसकी बुनियाद मंडल से उभरी सामाजिक न्याय की आंधी को दबाने के लिए ‘रामजन्मभूमि मुक्ति अभियान’ है.राम जन्मभूमि आन्दोलन के सीधे निशाने पर मुस्लिम समाज जरुर रहा,पर असल निशाना मंडल रपट से मिला ओबीसी आरक्षण रहा.लेकिन संघ परिवार को ओबीसी लोगों के मन में गहराई से बैठे ‘मुस्लिम-विद्वेष’ का अच्छी तरह इल्म था लिहाज़ा उनकी उस दुर्बलता को इस्तेमाल करने के लिए उसने उनके (ओबीसी) ही हितों (आरक्षण) के खिलाफ मुस्लिम-विरोध का गेम खेल दिया.मुस्लिम विद्वेष से पागल बहुजन समाज,खासकर ओबीसी के लोग अपने हितों की अनदेखी कर सवर्णवादी संघ के साथ हो लिये.ऐसा नहीं कि रामजन्मभूमि आन्दोलन के बाद पिछले दो दशको में उनके मुस्लिम-विद्वेष में कोई कमी आई .कमी आने का कोई कारण नहीं है.पकिस्तान ,बांग्लादेश इत्यादि में जिस तरह अल्पसंख्यक हिन्दुओं के मान-मर्यादा और अधिकारों की होली खेली जाती है,विपुल प्रचारतंत्र से लैस संघ परिवार उसकी सूचना अपने लक्षित मतदाताओं तक पहुंचाता रहता है जिससे उनके अन्दर संचित मुस्लिम –विद्वेष को खाद-पानी मिलते रहता है..तो बंधुवर अगर आपकी संघ-भाजपा और मोदी को रोकने की आंतरिक इच्छा है तो प्लीज़ आगमार्का धर्मनिर्पेक्षतावादी बनने ने से बाज़ आइये. आज भाजपा के उत्थान में मुलायम-लालू और मार्क्सवादियों के धर्मनिरपेक्षता का कमसे कम ४०% योगदान है.इन्होने सतही राजनितिक लाभ के लिए जिस तरह मुसलमानों की नग्न हिमायत की उससे ही भाजपा आज इतनी ताकतवर बनी है.इन कथित धर्मनिर्पेक्षतावादियों ने यदि संघ परिवार के हिडेन एजेंडे को सामने लाने में चौथाई शक्ति भी लगाई होती ,भाजपा सत्ता में आने का सपना तक देखने का दुसाहस नहीं करती.बहरहाल मेरे बहुजनवादी मित्रों अगर वास्तव में मोदी वाया भाजपा के उभार से आप चिंतित हैं तो मेरे निम्न टिप्स पर अमल करने का विचार करें.
    1-आप संघ-भाजपा और मोदी को मुस्लिम-विरोधी प्रचारित करने भार सवर्ण प्रगतिशीलों,खासकर मार्क्सवादियों पर छोड़कर , अपनी सारी उर्जा उन्हें बहुजन,खासकर ओबीसी विरोधी प्रमाणित करने में लगायें.इसके लिए सबसे बेहतर होगा आप रामजन्मभूमि आन्दोलन के पृष्ठ में मंडलवादी-आरक्षण की भूमिका का खुलासा करने के लिए अधिक से अधिक साक्ष्य प्रस्तुत करें.
    2-आप सैद्धांतिक रूप से दलित-पिछड़ों के साथ मुसलमानों की शक्ति के स्रोतों में भागीदारी की हिमायत जरुर करें,पर उनकी भावनात्मक हिमायत से दूर रहें.
    3-जहाँ तक मोदी का सवाल है उद्योग जगत तथा सवर्णवादी मीडिया उन्हें विकास-पुरुष प्रमाणित करने की मुहीम छेड़ी हुई है.आप यह जान लें आज के जमाने में विकास का जो शोर मचाया जा रहा वह भूमंडलिकरण के अर्थनीति से लाभान्वित मीडिया और सवर्णों के मध्यमवर्ग युवाओं की खुराफात मात्र है .भारत में जो कथित विकास देख रहे हैं उसका आशय बिजली सड़क और पानी से है जो मुख्यतः सवर्णों के सक्षम तबकों और बहुराष्ट्रीय निगमों की जरुरत है.एमएनसीज की जरुरत को ध्यान में रखकर पुरे देश में चार-छः लेन की सड़कों और और फ्लाई ओवर का जाल बिछाया जा रहा है जिसे विकास बताया जा रहा है.आज विकास जीडीपी आधारित है.इस विकास की सबसे बड़ी चुनौती है लोगों के विभिन्न तबकों के मध्य सम्यक बंटवारा जो बिल्कुल ही नहीं हुआ है.यह विकास वंचित तबको की बदहाली दूर करने में खास प्रभावी नहीं हुआ है,इसलिए प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन भी इससे निराश हैं.,निराश खुद अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी हैं इसलिए ही उन्होंने एकाधिक बार देश के अर्थ शास्त्रियों से रचनात्मक सोच की अपील की है.विकास के अत्यंत असमान बंटवारे से निराश पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल भी कई बार क्रन्तिकारी बदलाव की अपील की मांग कर चुकी हैं.

    .तो मित्रों आज विकास बड़ी समस्या नहीं,विकास का न्यायोचित बंटवारा सबसे बड़ी चुनौती है और इस मोर्चे पर आप पता करेंगे तो पाएंगे कि मोदी देश के विफलतम मुख्यमंत्रियों में से एक हैं.अगर विकास के बंटवारे में आप मोदी की विफलता को हाईलाईट में सफल हो जाते हैं तो उनके सम्मोहन से देश को मुक्त करने में भी आप शर्तिया तौर पर सफल हो जायेंगे.कारण, मुख्य मतदाता दलित-आदिवासी-पिछड़े और मुस्लिम हैं और सच्ची बात तो यह है की नए हिन्दू ह्रदय सम्राट से इन चार मुख्य मतदाता वर्ग को विकास में भागीदारी देने में न तो कोई रूचि ली है और न ही सफलता पाई है.तो मेरी सलाह यह है कि आप संघ के बहुजन विरोधी इतिहास को हाईलाईट करें तथा साथ में यह साबित कर दें कि मोदी की विकास-पुरुष की छवि कुछ सवर्णवादियों की शरारत मात्र है.ऐसा करने पर उम्मीद की जा सकती है संघ-भाजपा और मोदी की तिकड़ी से बहुजन समाज को बचने आप कामयाब हो जायेंगे. 

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