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पंजाबियों के लिए संयम की परीक्षा

डॉ वरिंदर भाटिया

पंजाब के सभी नागरिकों को संत रामानंद की मृत्यु व् उसके बाद के घटना क्रम से अत्यंत दुःख हुआ है | संत रामानंद की मौत के बाद उत्पन्न आक्रोश ने पुरे पंजाब को प्रभावित  किया है | इस आक्रोश ने राज्य की कानून वयवस्था के लिए हलकी मुश्किलें भी पैदा कर दी हैं जिसे सरकार को अत्यंत जिमेवारी से लेते हुए काबिल अधि कारियों की मदद से व् सभी वर्ग विशेष के प्रतिनिधियों से संवाद कायम रखते हुए पटरी पर लाना होगा | जिस समुदाय की भावनाओ को आहत किया गया है उनको शांति प्रक्रिया बहाल करने में अग्रणी भूमिका दी जानी चाहिए | हिंसा किसी भी समस्या का सभ्य समाज में  हल नहीं होती और देश की सम्पति का नुकसान होने से देश के सभी नागरिकों को कष्ट होगा | पंजाब के लोग इस दुखद घटना क्रम से संयम की अग्नि परीक्षा में से गुजर रहे हैं जिस परीक्षा में उन्हें हमेशा की तरह विजयी हो कर निकलना है | गुरु रवि दास जी की शिक्षाए विश्व के लिए शांति व् अहिंसा का आधार हैं | वियना में जो कुछ हुआ , सभी देशवासियों के लिए दुःखदाई हैं | इस दुःख की घडी में ,  दुखों की और कड़ियाँ जोड़ने से पंजाब में भाईचारे की भावना कमजोर होगी |

परदेस में जो कुछ हुआ उसके लिए केंद्र सरकार ऑस्ट्रिया सरकार से कानून का काम कारने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे , व् पंजाब में आहत भावनाओं को यकीं दिलाये के न्याय होगा | इससे स्थितियां जल्द बेहतर होने में  सहायता मिलेगी |अतीत में भी कई बार पंजाब का माहोल व् आपसी सद्भावना इस प्रदेश की जनता द्वारा संकट की घड़ियों में अत्यंत ठंडे जहन से काम लेने के कारण खराब होने से बचा है सभी दल , वर्ग व् समाज के लोग इस मुश्किल दौर में अपना दायित्व निभाते हुए , प्रदेश में शांति व् कानून स्थापित करने में मदद करे | समाज का बुद्धिजीवी तबका व् मीडिया भी हालात सामान्य बनाने में अधिक से अधिक प्रयास करे | प्रदेश में शांति बनी रहे यह हमारी सामूहिक  जिम्मेवारी  है |

लेखक शिक्षाविद है व् डी ऐ वी कालेज अमृतसर से जुड़े हैं
bhatiasahib@gmail.com

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