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जंगल के रास्ते हिमालय तक

अंबरीश कुमार 

समय की दिक्कत को देखते हुए लखनऊ से काठमांडू की यात्रा जो सड़क और हवा में हुई काफी दिलचस्प रही l  यह बात अलग है कि जंगल के इलाके में इतनी ठंढ का अंदाजा नहीं था और सुबह के समय तीन चार घंटे खुले में रहने की वजह से ठंड लग गई और एक दिन बुखार में निपट गया  l  दरअसल छह  नवंबर को सिद्धार्थ कलहंस ने विश्व सामाजिक मंच के आयोजन के सिलसिले में लखनऊ के प्रेस क्लब में देर शाम बैठक बुलाई थी और तय हुआ था कि इसमें शामिल होने के बाद घर जाएंगे और एक नींद लेने के बाद रात तीन बजे लखनऊ से निकलेंगे और पांच घंटे में नेपालगंज के हवाई अड्डे पर पहुँच जाएंगे  l  पर बहराइच से जानकारी दी गई कि सड़क बहुत ख़राब है और समय ज्यादा लग सकता है ऐसे में प्लेन छूट जाएगा  l  तब तय हुआ रात में ही चल दिया जाए  l  रात करीब दस बजे चले और घाघरा घाट के बाद खराब रास्ते की वजह से बहराइच पहुंचे तो शहर सो चुका था पर दिवाली की वजह से हर तरफ रौशनी नजर आ रही थी  l ताहिरा हसन हैरान थी कि रात एक बजे से पहले ही यह शहर सो चुका है  l हमें यहाँ से एकता और रवि को साथ लेना था जो काठमांडू की बस छूट जाने की वजह से रुक गए थे  l वे सर्किट हाउस के आगे ही मिल गए और फिर नेपाल सीमा की तरफ हम बढ़ने लगे  l ठंड बढ़ चुकी थी और रास्ता जंगल गांव से गुजर रहा था  l सड़क काफी खराब थी और कई बार लगा कि कार सड़क से उतर कर नीचे न फंस जाए  l बताया गया यह रुपइडीहा जाने का सबसे छोटा और बेहतर रास्ता था  l कभी कभी कोई जानवर गाड़ी के सामने से गुजर जाता तो जंगल से गुजरने का अहसास होता हालाँकि इसमें सियार जैसे छोटे जानवर ही मिले  l 
रुपइडीहा  सीमा पर कुछ समय रुकना था क्योकि बैरियर सुबह पांच बजे के बाद ही खुलता  l रात के तीन बजे थे जब बैरियर पर  पहुंचे  l एक जवान ने सामने का रेस्ट रूम खोल दिया ताकि हम वहाँ  आराम कर सके  l बाहर ठंड थी और भीतर कुछ कुर्सियां और मच्छरदानी लगा एक डबल बेड ,बड़े से लिहाफ के साथ  l सामने डाइनिंग हाल और किचन भी था  l किसी को बुलाने की बजाय खुद चाय बनाने का मन हुआ और एकता को इसके लिए भेज दिया गया तबतक ताहिरा हसन आराम करने चली गई  l हम  लोग बाहर निकले और   सीमा का जायजा लेने लगे  l सामने नेपाली चेक पोस्ट पर अँधेरा छाया था जबकि अपनी तरफ दिवाली जैसा माहौल  l चाय पीने के लिए  बुलाया गया तो कमरे में पहुंचे  l तबतक एसएसबी की एक युवा महिला कांस्टेबल भी पहुँच गई  l  राजस्थान की इस युवती से बात हुई तो सीमा पर होने वाली दिक्कतों का ब्यौरा देने लगी  l पति फौज में और वह यहाँ पर ,जहां परिवार रखने  की इजाजत नहीं  l साल में जो छुट्टी मिलती उसी में वह पति और बच्चे से मिलती  l बोली अभी पांच बजे जब गोंडा से आने वाली ट्रैन  इधर आएगी तो भीड़ बढ़ जाएगी और हमारी ड्यूटी भी शुरू हो जाएगी  l महिलाओं की तलाशी  का जिम्मा मिला है और अबतक करीब दर्जन भर महिलाओं को तस्करी में जैल भिजवा चुकी है  l यह नेपाली महिलाएं गरीब परिवारों की होती है और कुछ पैसों के लिए कुरियर का काम करती है  l चरस आदि की तस्करी में एक बार फंसने के बाद इनका जीवन जैल में ही गुजर जाता है  l कोई मदद के लिए नहीं आता  l यह एक बड़ी त्रासदी है भारतीय जेलों में बंद ऐसी नेपाली महिलाओं की  l यह बात इस महिला कांस्टेबल ने भी मानी  l बात करते करते झपकी आने लगी तो बाहर गाड़ी में आकर लेटा  l ठंड लग रही थी और सूटकेश खोलने से बचना चाहता था  l नींद नही आई और अँधेरा छंटने लगा  l बाहर देखा तो दोनों तरफ से आवाजाही शुरू हो चुकी थी और तलाशी भी  l सामने एक बस स्टैंड जैसा  निर्माण था जिसके प्लेटफार्म पर आने जाने वालों का थैला बक्सा आदि चेक किया जा रहा था  l नेपाल की तरफ से आ रहा एक रिक्सा सामन से भरा हुआ था और एक बुजुर्ग उस पर बैठे थे  l तलाशी के बाद उन्हें एसएसबी के दो जवानो ने किसी तरह उठाकर रिक्सा पर बिठाया  l यही नजारा दूसरी तरफ स्कूल जैसी नीली ड्रेस पहने नेपाली पुलिस  का भी था  l करीब दो घंटे बाहर    रहने की वजह से ठंड लग चुकी थी और अब तैयार होकर नेपाल गंज हवाई अड्डे की तरफ निकलना था  l सारी रात जगे जगे गुजर गई थी  l सूरज निकल चूका था और पहले हमें रवि एकता के लिए बस तलाशनी थी जो काठमांडू पहुंचा दे क्योकि उनका पहले से ही यह कार्यक्रम बना था  l बस  अड्डा  ऑर  आसपास बस की तलाश में करीब घंटा भर गुजर गया  l बताया गया इस समय कोई बस नहीं है देर शाम को देखिए  l फिर विचार बना कि हवाई अड्डा पर जहाज के टिकट के लिए पूछे अगर जगह मिल जाए तो सभी साथ चल सकेंगे  l वर्ना दोनों लोगों ने लखनऊ लौटने का मन बना लिया था  l नेपाल गंज का हवाई अड्डा अपने देश के किसी रेलवे स्टेशन जैसा दिखा जहां सुरक्षा का ताम झाम कम था  l हमने दो और टिकट के लिए पूछ तो इन्तजार करने को कहा गया  l इस बीच बोर्डिंग पास लेकर हम लोग रेस्तरां के सामने बैठ गए  l दवा लेनी थी इसलिए ताहिरा कैंटीन से   छौंके हुए चने ले आई और हैम लोगों का यह नाश्ता हुआ  l इस बीच पता चला कि दो टिकट मिल जाएंगे  l एकता और रवि ने टिकट ख़रीदे और फिर सुरक्षा जाँच के बाद सामने के लाउंज में आ गए  l हैण्ड बैगेज में टैग तो लगा था पर उसपर सुरक्षा जाँच की मोहर लगाने का प्रचलन इधर नहीं था  l अभी बैठे ही थे तभी एक छोटा सा जहाज उतरा और उसकी एक फ़ोटो भी ली  l  
छोटे छोटे हवाई जहाज से नेपाल का मध्य वर्ग ही नही गरीब तबका भी दूर दराज के इलाकों में आसानी से चला जाता है और इसका भाड़ा भी कम होता है  l  नेपालगंज से काठमांडू का शुरूआती भाड़ा करीब साढ़े तीन हजार रुपए नेपाली करेंसी में होता है  l  भारत का सौ रुपया वहाँ एक सौ साठ रुपये में बदल जाता है जिससे भारतीय रुपये में यह किराया और कम हो जाता है  l    हवाई अड्डे पर जो लोग बैठे थे उनमे ज्यादातर अपने तौर तरीके ,खान पान और वेश  भूषा से मध्य वर्ग के ही नजर आ रहे थे  l  खासकर चने और मठरी लेकर चलने वाले  और बीड़ी रखे हुए लोग l कुछ ही देर में बुद्धा एयर के उस जहाज पर जाने का निर्देश मिला जिसके बारे में आशुतोष ने पहले से डरा रखा था कि यह काफी हिलता डुलता है और कई बार लोग बकरी लेकर भी सफ़र करते है  l  ताहिरा ने एक पुराना किस्सा बता दिया कि जहाज कई बार के प्रयास के बावजूद टेक आफ नहीं कर पाया था  l  इन किस्सों से सहमे हुए जब हैम इस जहाज में चढ़े तो नजारा बदला हुआ था  l  अपने यहाँ के कई एयरलाइंस के जहाज से यह बेहतर था  l  टू बाई टू की सीटे और सबसे आगे ही नही बीच में भी काफी अच्छी लेग स्पेस  l  संयोग से सबसे आगे की ही तीन सीट मिल गई  l  पीछे रवि और एकता थे  l  सोच के आया था एक घंटा ठीक से सो लूंगा ताकि तबियत सही हो सके  l   उड्ने के फ़ौरन बाद झपकी ली तो पंद्रह बीस मिनट बाद ही ताहिरा जी ने आवाज दी कि बाहर देखू  l  खिड़की से बाएं तरफ देखा तो अद्भुत नजारा  l  हिमालय की लम्बी श्रृंखला साथ साथ चल रही थी  l  उत्तराखंड के पहाड़ का दृश्य भी जहाज से देखा है पर ऐसा दृश्य नहीं देखा था  l  नीचे घने जंगल और उसमे सांप कि तरह घूमती नदिया और बगल में हिमालय की बर्फ से लदी चोटियां  l  कैमरा   
बाकि सामन के साथ ऊपर बंद था  l  कैमरा निकाला और खिड़की से फ़ोटो खींचना शुरू हुआ  l बर्फ से लड़े एक पहाड़  की फ़ोटो लेता तो आगे और बड़े पहाड़ दिखते  l  करीब तीस मिनट तक फ़ोटो लेता रहा  l  काठमांडू आने की जानकारी दी गई तो कैमरा बंद किया  l  कुछ ही देर में काठमांडू के हवाई अड्डे पर उतरा तो लगा यह कोई बड़ा सा बस अड्डा है जहाँ चारो और अलग अलग आकार के जहाज खड़े थे  l  यह घाटी में था और दूर के पाहाड पर बादल मंडरा रहे थे  l  बर्फ की छोटी एक आध पहाड़ के पीछे से नजर आ रही थी  l    
 
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