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जंगल की पाठशाला
प्रयाग पाण्डे
उत्तराखंड के जंगलात महकमे ने बाघों की गिनती के वास्ते नैनीताल की कैमल्स बैक पहाड़ी में लगाए गए कैमरे में एक जवान नर बंगाल टाइगर की फोटो कैद हुई है यह इलाका बचपन के दिनों में जेम्स एडवर्ड कार्बेट यानी जिम कार्बेट की जंगल की प्राथमिक पाठशाला रहा है । इस पहाड़ी के ठीक बगल से लगी अयारपाटा पहाड़ी में जिम कार्बेट का घर " गर्नी हाउस " था । " मगौग " नाम का कुत्ता छुटपन में जिम कार्बेट का मार्ग - दर्शक था । तब नैनीताल के आसपास तेदुओं और बाघों की अच्छी - खासी तादात थी । बचपन में जिम कार्बेट अपने गाइड " मगौग " के साथ अपने घर के आसपास लगे इन जंगलों में चिड़ियों का शिकार करते थे । आज से करीब एक सौ तीस साल पहले 1884 के आसपास महज साढ़े आठ साल की उम्र में इसी कैमल्स बैक पहाड़ी के नीचे सड़ियाताल के पास जिम कार्बेट और उनके कुत्ते " मगौग " की एक तेदुएं से आपने - सामने की मुलाकात हुई थी ।यह तेदुएं से जिम कार्बेट की पहली दोस्ताना मुलाकात थी । उस वक्त जिम कार्बेट " मगौग " के साथ चिड़ियों के शिकार पर निकले थे । जिम कार्बेट के पास उनके फुफेरे भाई ने उन्हें भेंट के तौर पर दी गई एक बेहद पुरानी डबल बैरल सॉर्ट गन थी । जिसका दायां बैरल नाकाम था । सिर्फ वाएं बैरल में चिड़ियों का शिकार करने लायक बारूद भरा जा सकता था ।इन सवा सौ सालों के दौरान नैनीताल की आबादी में कई गुना इजाफा हो गया है । उस वक्त के वीरान जंगली इलाकों में भी विशालकाय कंक्रीट के जंगल उग आए हैं । हरे-भरे क्षेत्रों को कंक्रीट से पाटने के इस आधुनिक विकास से जिम कार्बेट के बचपन की शिकारगाह भी अछूती नहीं है । इसके वावजूद इस इलाके में एक तंदरुस्त बंगाल टाइगर की मौजूदगी निश्चित ही एक शुभ संकेत माना जाना चाहिए ।
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