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जब धरती ने सोना उगला

डा. अशोक बंसल 

आस्ट्रेलिया की धरती ने जैसे ही सोना उगलना शुरू किया, सारी दुनिया सोने की चमक से चकाचौंध हो गई  , चारों ओर उथल पुथल मच  गई । दुनियाभर  से लोग अपने अपने सपनों के साथ अपना भाग्य  आजमाने आस्ट्रेलिया के सोना मैदानों की ओर कूच करने लगे। हजारों की किस्मत चमकी तो हजारों असमय ही काल के गाल में समा गए। कैदियों की बस्ती वाले देश आस्ट्रेलिया का कायाकलप हो गया। यह बात 1851 की है।
 
5 जुलाई  1851 को खबर उड़ी कि मेलबर्न से 16 कि0मी0 दूर यारा नदी के किनारे सोना मिला है। सोने के दीवाने अपने साथ फाबड़े, कुदाल, चलनी आदि उपकरणों के साथ यारा नदी के किनारे इकटठे होने लगे। उसी समय यह खबर  आई  कि मेलबर्न से 120 कि0मी0 दूर बेलारट, कैसलमाइन और बेन्डिगो    की पहाड़ियों पर एक फुट की गहराई  पर सोना निकल रहा है। ये खबरें सच साबित हुईं । सोने की दौड़ में अब्बल रहे लोगों की खुशी का ठिकाना न रहा। मेलबर्न, सिडनी, तस्मानिया आदि स्थानों से हजारों लोग इन स्थानों पर कुछेक दिनों में जा धमके। बेलारट की पहाड़ी पर स्थान-स्थान पर कुदालों की खनक गूँजने लगी।
 
बेलारट आज विक्टोरिया राज्य का भव्य  व आकर्षक नगर है। बेलारट स्थत  सोबरन हिल अपने आप में एक ऐसा संग्रहालय है जिसकी सानी संपूर्ण विश्व में नहीं। 25 हेक्टेयर भूमि  पर फैली इस पहाड़ी के गर्भ  से निकली अनमोल धातु ;सोना ने आस्ट्रेलिया की तकदीर बदल दी। इस पहाड़ी पर मजदूरों ने खुदाई कर सोने के पहाड़ निकाले . यह क्रम करीब ५० सालों तक चला . जब पहाड़ी का सोना चक गया तो सरकार ने इसे शानदार म्यूजियम में तब्दील कर दिया है . दुनिया भर  में यह अपने तरह का अकेला  म्यूजियम है . यहाँ आने वाला हर पर्यटक दांतों तले अंगुली दबा लेता है . 
इतिहासकारों के अनुसार बेलारट की पहाड़ी पर सोना होने की खबर थामस हिसाक नामक अंग्रेज ने दी थी। अगस्त 1851 में थामस अपनी खोई  गाय तलाशने के लिए इस पहाड़ी पर भटक  रहा था। तभी  उसके हाथ आधा ओंस का सोने का टुकड़ा आया। यह खबर मेलबर्न तक पहुंच गई । ''दी जिलांग  एडवरटाइजर'' नामक अखबार ने  इसे प्रकाशित कर दिया। बस फिर क्या था, सोने की खबरें लगातार आने लगीं। आस्ट्रेलिया के आसपास के लोग जितनी तेजी से बेलारट पहुंच सकते थे, पहुँचने लगे ।
''मेलबर्न मोर्निंग हेराल्ड'', 'दी एज'', '''द जिलांग एडवरटाइजर'' आदि अखबारों ने अपने संवाददाताओं की तैनाती इस पहाड़ी पर कर दी। किस दिन कितना सोना मिला, कौन हताहत हुआ  जैसी छोटी -बड़ी  खबरें इन समाचार पत्रों में प्रकाशित होने लगी। 'मेलबर्न मोर्निंग हेराल्ड'' पत्र में प्रकाशित निम्न खबर से इस तथ्य का आभास  होता है कि बेलारट की पहाड़ी पर सोना हासिल कर खुदाई  में लिप्त लोग खुशी में लगभग  अर्धविक्षिप्त हो गए थे।
''बेलारट की पहाड़ी पर दो खोदने वालों की सोना देख आँखें   चुंधियां गई । अपनी खुशी का इजहार करने के लिए उन्होंने डबलरोटी और मक्खन के मध्य एक पाउन्ड का नोट रखा और खा गए। एक अन्य मजदूर ने पाँच पाउन्ड का नोट अपने पाइप में जलाया और पी गया ''
समाचार पत्रों में सोना मिलने के समाचार ही नहीं छपते थे वरन रोचक कार्टून  भी  प्रकाशित होते थे । एक कार्टून का सारांश इस प्रकार है-
एक यात्री मजदूर से-' कृपया मेरा बाक्स उस होटल तक पहुंचा दो, मैं तुम्हें एक क्राउन दूंगा।'
मजदूर- 'श्रीमान! मेरे जूते के फीते खुले हैं। इन्हे बांध दें, मैं आपको पाँच क्राउन दूंगा। '
आशय यह कि सोना पाकर मजदूर भी  अपने आपको धन्ना सेठ  समझने लगे।
मेलबर्न में उस समय कानून व्यवस्था के लिए सिर्फ 40 सिपाही थे। सोने के आकर्षण ने 38 सिपाहियों को नौकरी छोड़ने को विवश कर दिया। ये सिपाही बिना वेतन लिए बेलारट भाग  गए और साने की खुदाई में  जुट गए। इतिहासकारों का कहना है कि पूरे समाज में उथल पुथल मच गई . अर्थव्यवस्था चौपट हो गई । मंहगाई  आसमान चढ़ गई । अंग्रेजों ने जिस धरती को कैदियों के लिए चुना गया था, वह यूरोप, अमेरिका आदि देशों के लिए आकर्षण का केन्द्र बन गई ।
सन 1852 में बाहरी लोगों ने  बड़ी संखा में आस्ट्रेलिया आना शुरू किया। सन 1852 से लेकर 1854 तक एक लाख 40 हजार लोग इंग्लैण्ड से आस्ट्रेलिया आए। इंग्लैण्ड की सरकार की इच्छा थी कि उनके देश के ज्यादा से ज्यादा लोग आस्ट्रेलिया जाकर बसें ताकि उनका बहुमत रहे। उस वक्त लिवरपूल से मेलबर्न की  समुद्री यात्रा 80 से 90 दिनों में तय की जाती थी। सरकार ने अपने देशवासियों को आस्ट्रेलिया जाने के लिए मुफ्त यात्रा के प्रलोभन दिए।
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