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चंबल मे पानी का मुददा !
दिनेश शाक्य
इटावा l देश के सबसे बडे जनमतीय महासमर संसदीय चुनाव के ऐलान के साथ ही हर ओर वोट मांगने का सिलसिला चल निकला है। मिनरल वाटर का इस्तेमाल करने वाले राजनेताओ के सामने चंबल के मतदाताओ की ओर से साफ पानी का मुददा उठा करके नई मुसीबत खडी कर दी गई है। ऐसा लगने लगा है कि चंबल मे पीने का साफ पानी का मुददा अगर प्रभावी हो गया तो सभी दलो का समीकरण गडबडा सकता है। 
पांच नदियो के इकलौते संगम स्थल वाले इटावा जिले मे अभी कोई अहम चुनावी मुददा राजनैतिक दलो के पास नही है। लेकिन चंबल घाटी मे नदियो के किनारे रहने वाली एक बडी आबादी साफ पीने के साफ पानी को लेकर राजनैतिक दलो के प्रत्याशियो को घेरने का पूरा तरह से मना बना चुकी है क्यो कि आजादी के बाद से अभी तक बीहडी गांव मे पीने के साफ पानी के नाम पर लोगो को यमुना,चंबल,क्वारी,सिंधु और पहुज नदियो का ही पानी पीना पड रहा है। पीने के साफ पानी का यह ऐसा मुददा हो सकता है जिससे हर राजनैतिक दलो का समीकरण गडबडा सकता है। 
इटावा संसदीय सीट का हर कोई दल का प्रत्याशी चंबल इलाके मे वोट मांगने के लिए तो जा रहा है लेकिन कोई भी चंबल के किनारे जिंदगी बसर करने वालो के लिए साफ पानी मुहैया कराने का कोई भरोसा नही दे पा रहा है ऐसा लगने लगा है कि साफ पानी की समस्या जैसी आजादी के बाद से बरकरार है आज भी बरकरार बनी रहेगी। 
पीने के साफ पानी की समस्या से इटावा जिले की इटावा सदर ,भरथना और जसवंतनगर तीनो विधानसभाओ का कुछ ना कुछ हिस्से की आबादी जूझ रही है। वैसे तो हर गांव मे पीने के पानी के लिये सरकारी हैंडपंपो को लगाया जा चुका है लेकिन इसके बावजूद यह सरकारी हैंडपंप साफ पानी दे पाने की दशा मे नही है इस वजह से चंबल,यमुना,क्वारी,सिंधु और पहुज नदियो के किनारे रहने वाले इन्ही नदियो के पानी का इस्तेमाल पीने के पानी के तौर करते आ रहे है। नदियो के पानी पीने से कई किस्म की यहा के वासिंदो को कठिनाई का सामना करना पड रहा है। इन हालातो मे गंभीर बीमारियो से तो लोग जूझते रहे है और आज भी जूझ रहे है। 
नदियो के किनारे रहने वाली खासी तादात मे आबादी आज भी इन्ही पांचो नदियो के पानी को अपने पीने के लिये लिये तो इस्तेमाल तो करती है ही इसके अलावा दैनिक दिनचर्चाये भी इन्ही नदियो के पानी से हो रही है। 
साफ पानी हमारे लिए कितना जरुरी है ,जिसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हर कोई आज साफ पानी पाने के लिए मिनरल वाटर का इस्तेमाल करने में जुटा हुआ है। ये सब शहरी इलाके में मिनरल वाटर का इस्तेमाल तो आम बात है लेकिन बेचारे क्या करें गाँव वाले जो दो जून कि रोटी नहीं जुटा सकने में कामयाब नहीं हो सकते साफ पानी आखिरकार जुटाऐगे कहाँ से।
देश का इकलौता ऐसा जिला इटावा माना जा सकता है जहा पर पाच नदियो का संगम होने के कारण पंचनदा कहा जाता है इन नदियो मे चंबल,यमुना,क्वारी,सिंधु और पहुज है। इन नदियो के किनारे रहने वाले अधिकांश लोग पीने के पानी के तौर पर इन्ही नदियो पर आश्रित रहते है। सबसे अघिक पानी का इस्तेमाल चंबल नदी से किया जाता है। 
चम्बल नदी के किनारे बसे सैकडों गाँव के बासिन्दे साफ पानी तो पीना दूर चम्बल नदी का पानी पीकर अपनी प्यास बुझा रहे है,ये पानी साफ है या नहीं ये सवाल बहस का नहीं है सवाल ये है कि जब सरकार कि जिम्मेदारी है कि वो अपनी प्रजा को साफ पानी मुहैया कराएगी फिर साफ पानी मुहैया नहीं हो पा रहा है। ये पानी किस तरह से मुहैया होगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है,सरकारी आला अफसरानों ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है, कोई कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है।
नतीजन इटावा जिले के चंबल नदी के आसपास के तकरीबन दो सौ गांवों के ग्रामीण अपना हलक तर करने के लिए चंबल नदी का वह पानी पीने को बाध्य हो गए हैं ,जहां जानवर अपनी प्यास बुझाते हैं व शरीर की गर्मी शांत करते हैं। 
करीब 10 सालो से चंबल घाटी के विकास के लिये करोडो रूपये के पैकेज की मांग करके सुर्खियो मे आये लोक समिति के अध्यक्ष सुल्तान सिंह का कहना है कि वैसे तो चंबल मे कई अहम समस्याये है लेकिन इंसानी जीवन के मददेनजर अगर सरकार अपने वादे के अनुसार उसे पीने का साफ पानी मुहैया नही करा पाती है तो इसे सरकार की नाकामी ही माना जायेगा। चंबल इलाके मे आजादी के पहले और बाद भी आज तक नदियो के पानी के सहारे अपना जीवन बसर कर रहे है लेकिन उनको सरकार की हीलाहवाली के कारण साफ पानी पीने के लिये नही मिल पा रहा है। ऐसे मे अगर घाटी वासी चुनाव मे राजनैतिक दलो के प्रत्याशियो के सामने साफ पानी की दरकार वाली मांग रखते है तो कोई गलत नही है क्यो कि हर आदमी को साफ पानी मांगने का हक है।
डा.भीमराव अंबेडकर राजकीय सयुक्त  चिकित्सालय के पूर्व वरिष्ठ चिकित्सक डा.के.एस.भदौरिया का कहना है कि अगर किसी भी इंसान को साफ पानी पीने के लिये शुरूआती दिनो से ना दिया जाये तो जाहिर है सामान्य इंसान की तरह से उसकी शारीरिक बनावट नही हो सकती। यह सब कुछ किसी भी आम इंसान के लिये सबसे घातक ही कहा जायेगा। 
वैसे तो पानी के लिये समरपंपो का इजादीकरण कर लिया गया है लेकिन गांव के लोग इतने संपन नही है कि समरपंपो को लगवा सके इसलिये उनके सामने राजनेताओ के सामने इस मांगो को रखने के सिवा कोई दूसरा चारा नही है।
पीने के साफ पानी की गंभीर समस्या पर कई राजनैतिक दलो के प्रत्याशियो से बात की गई तो करीब करीब सबका एक ही जैसा जबाब मिला जिसमे कहा गया है कि कोई भी समस्या हो उसका निपटारा अधिकार मिलने पर ही खत्म कराया जा सकता है लेकिन कोई भी चंबल मे पीने के साफ पानी को मुद्दा बनाने के पक्ष में नही है इसलिए सालो से साफ पानी की दरकार लिये मायूस बैठे चंबल के वासिंदो को चुनाव के बाद साफ पीने के पानी मिलने की कोई संभावना नहीं बनती दिख रही है। 
 
 
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