ताजा खबर
घर की देहरी लांघ स्टार प्रचारक बन गई डिंपल वह बेजान है और हम जानदार हैं ' मुलायम के लोग ' चले गए ! बिगड़े जदयू-राजद के रिश्ते
तमिलनाडु के अच्छे दिन

शिप्रा शुक्ला 

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने २०१४ लोकसभा चुनाव परिणामो से सीख लेकर २०१६ के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में विकास की आंधी चलाने की मुहीम शुरू  कर दी है ।  एक ओर उन्होंने राजपक्षे आमंत्रण को लेकर केंद्र सरकार से  नाराजगी भुलाकर दिल्ली जाकर  प्रदेश की रुकी हुई योजनाओं को शुरू कराने और आवंटित धन को शीघ्र प्रदेश को दिए जाने की मांग की , वहीँ दूसरी तरफ उन्होंने प्रदेश में  बिजली कटौती  समाप्त किये जाने  की महत्वाकांक्षी घोषणा करके पूरे प्रदेश में  उत्साह का संचार किया है।  अपने मुख्य प्रतिद्वंदी द्रविण दल द्रमुक को  लोकसभा में करारी मात देने के बाद अन्नाद्रमुक सरकार प्रदेश की  बिजली,  पानी , सड़क  और शौचालय  जैसी  मूलभूत  सुविधायों को  प्रमुखता दे रही है।  
मुख्यमंत्री ने  पहली  जून से प्रदेश में बिजली कटौती समाप्ति  की घोषणा करके भारी उल्लास की लहर दौड़ा दी है।  पिछले पांच - छह सालों में प्रदेश ने भयंकर बिजली  सामना किया  और चेन्नई को छोड़कर प्रदेश के ज्यादातर हिस्से न सिर्फ गर्मी के मौसम, बल्कि लगभग पूरे साल घंटों की बिजली कटौती  सामना करते आये है। गर्मियों में प्रदेश में १४ - १६ घंटे की कटौती आम बात बन गई थी।  जाहिर है इसका बड़ा खामियाजा उद्योगों ने भी उठाया और पिछले कुछ वर्षो में  प्रदेश में उत्पादन की  खासी कमी दर्ज की गई ।  सरकार का कहना है कि प्रदेश में बिजली उत्पादन में २,५०० मेगावाट की बढ़त हुई है और प्रदेश सरकार  ३८०० मेगावाट खरीदने में सफल रही है जिससे प्रदेश कीबिजली की जरूरत को  पूरा किया जायेगा।  तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार से  कुंडनकुलम और नेवेली बिजलीघर की १५ प्रतिशत अनारक्षित बिजली प्रदेश को दिए जाने की मांग भी की है ।  अपनी पूरी क्षमता  १००० मेगावाट बिजली का उत्पादन कर कुंडाकुलम आडविक प्लांट अब देश का सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन करने वाला प्लांट है।  लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश की बिजली की स्थिति में लोगों ने सुधार  महसूस किया था लेकिन साथ ही उन्हें चुनाव के बाद भारी  बिजली कटौती की  आशंका थी।  लेकिन तमिलनाडु बिजली विभाग और मुख्यमंत्री जयललिता की बिजली कटौती समाप्त होने की घोषणा के बाद जन मानस ने  राहत की सांस  है।  
गौरतलब है लोकसभा चुनावों में ३९ में से ३७ सीटें हासिल  कर अन्नाद्रमुक इस समय सफलता के ऊँचे पायदान पर है और २०१६ के विधानसभा चुनावो के  लक्ष्य भेद की तैयारियों में है।   प्रदेश में २०१६ में विधानसभा चुनाव होने है और  जिस प्रकार केंद्र  में विकास की आंधी ने जनता ने मोदी का साथ दिया है उसके मद्देनज़र आगामी विधानसभा चुनावो में जया सरकार जरूर ही विकास तो मुद्दा बनाना चाहेगी। २०११ के प्रदेश  विधासभा चुनाव में बिजली कटौती एक बड़ा मुद्दा बना था और प्रदेश  बिजली जरूरतों को पूरा न कर पाने के लिए तत्कालीन द्रमुक सरकार को अन्नाद्रमुक ने जमकर आड़े हाथों लिया था।  अब तीन बरस  बाद बिजली कमी से निजात पा अन्नाद्रमुक सरकार अपनी पीठ ठोंक रही है।  ।  सस्ता भोजन उपलब्ध कराने वाली अम्मा रसोई की सफलता पर मुग्ध मुख्यमंत्री ने  सैकड़ों अम्मा रसोइया खोलने की घोषणा भी  की है। जया को चाहिए प्रदेश के विकास के लिए  केंद्र से  आर्धिक मदद , ज्यादा बिजली , कावेरीऔर मुल्लापेरियार बाँध से पानी और मछुआरों की समस्याओं का हल और केंद्र को राज्यसभा में समर्थन।
  हालाँकि भाजपा पूर्ण बहुमत से लोकसभा में सत्तारूढ़ है, राजयसभा में अन्नाद्रमुक के राजयसभा सदस्य उनके काम आ सकते है। जाहिर है कि केंद्रीय नेतृत्व अवश्य ही ३७ सदस्यों वाली अन्नाद्रमुक से बेहतर सम्बन्ध रखना चाहेगा।  लगता है तमिलनाडु के अच्छे दिन दूर नहीं। साभार -समय चर्चा 
email ईमेल करें Print प्रिंट संस्करण
  • तिकरित में फंसी नर्से
  • तमिलनाडु - जनता के पांच सवाल
  • केरल में वाम दलों को चुनौती दे रही हैं मायावती
  • राहुल गांधी ने यूपी का प्रचार दक्षिण में किया
  • Post your comments
    Copyright @ 2016 All Right Reserved By Janadesh
    Designed and Maintened by eMag Technologies Pvt. Ltd.