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रिपोर्टर ,सपादक और न्यूज़ रूम

शेखर गुप्ता

मैंने अपने साथी रिपोर्टरों के लिए लिखने का वादा किया था। मैं डेडलाइन, जो कि हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है, खत्म होने से ठीक पहले ऐसा करने जा रहा हूं।मैंने कहा था कि मैं मूर्ख जनजातीयता के आरोप लगाए जाने के खतरे के बाद भी इस लेख को लिखूंगा। लेकिन, ये सिर्फ उतना नहीं है। हमारे व्यर्थ क्षणों में जो एक रिपोर्टर के मन में आक्रमण होता है। मैंने कुछ हद तक मूर्खता से एक रिपोर्टर के माइंडसेट पर प्रकाश डालने के लिए एयरफोर्स और फाइटर पायलेट का प्रयोग किया है। बाकी सभी एक समान हैं और कोई भी एयरफोर्स उनमें से किसी के बिना एयरबोर्न प्राप्त नहीं कर सकती। लेकिन फाइटर पाइलेट इनमें इलीट हैं।
 
अब उन शानदार लोगों का समय जा चुका है जो अपने टाइपराइटर्स के साथ चिपके बैठे रहते थे। अब सिर्फ ड्रोन के पहुंचने से काफी ज्यादा का समय आ गया है।ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि पत्रकारिता के तरीके में बदलाव आ गया है। अब हमारे टूल्स अधिक शार्प, पॉवरफुल और अधिक दूरी तक पहुंचने वाले हैं। इसी के साथ हमारी ऑडियंस भी समझदार है, जो ज्यादा सवाल और डिमांड करती है। वे सिर्फ हमारे टीवी स्क्रीन की ब्रेकिंग न्यूज से ज्यादा गुणवत्ता, गहराई और विश्वास की डिमांड करते हैं।
 
ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि खबर को कौन ब्रेक कर रहा और कहां से ब्रेक कर रहा है ये जानने में कुछ सेकेंड का समय लगता है। इस न्यूज वातावरण में कुछ भी एक्सक्लूसिव नहीं चल सकता। जबकि कुछ ही मिनटों में सभी टीवी चैनल्स और अगले दिन कुछ न्यूज पेपर किसी खबर को अपना एक्सक्लूसिव बताने में लग जाते हैं। एक पत्रकार के रूप में मैं अक्सर ये सोचता हूं कि हम दोबारा पुराने रास्तों पर लौट सकते हैं। या फिर ये न्यूज ब्रेक TM के साथ आने लगें।
 
लेकिन सब कुछ बर्बाद नहीं हुआ है। यदि आप ध्यान से देखें तो अब न्यूज वातावरण पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आकर्षक है। ये अब बेहतर कौशल, ज्यादा ज्ञान और ज्यादा विश्वसनीय सूत्रों की मांग करता है। न्यूज ब्रेक के लिए सिल्वर प्राप्त करने में ज्यादा समय नहीं रह गया है। आपको न सिर्फ एक खास स्टोरी पर बल्कि पूरे विषय पर गहराई और ज्ञान के साथ तैयार रहना होगा। एक रीडर आपको अपना कीमती समय केवल उस स्थिति में देगा जब उसे पता होगा कि आप जिस बारे में बात कर रहे हैं उसके बारे में आपको जानकारी है।
हमारी जरूरी योग्यता और केआरए बेहतरी के लिए बदल गए हैं। जैसा कि सदियों से फाइटर प्लेन बदल गए हैं और पुराने जमाने के उलट एकदम नए कौशल की मांग करते हैं।अब हमें सिर्फ गूगल और विकीपीडिया पर न पढ़कर किताबों और अपनी फील्ड के विशेषज्ञों के साथ समय बिताना चाहिए। जिस क्षेत्र में हम अपने आपको ज्ञान का महारथी मानते हैं उस क्षेत्र में हमसे ज्यादा जानने वाले लोगों की तादाद बहुत ज्यादा है। आमतौर पर वे अपने ज्ञान और समय को लेकर पत्रकारों के साथ उदार रहे हैं। आपको एक जिज्ञासु छात्र या एक विनम्र पत्रकार के रूप में उनके पास जाना चाहिए। इंटरनेट, फोन कॉल, पुराने क्लिपिंग्स आदि कोई भी उनसे मिलने और मीटिंग करने से बेहतर नहीं हो सकता।
इस वक्त हम बेहद ही बराबरी और न्यायपूर्ण न्यूजरूम में काम करते हैं। पुरानी जातीय व्यवस्था खुशी से समाप्त हो गई है। क्या इस समीकरण के लिए मुझे कोई नया समानता मिल सकती है।आप लोग चिंता न करें ये नई समानता अब एयरफोर्स या फोज के इतिहास से नहीं होगी। ये उस क्रिकेट से है, जो हम सबके लिए फेवरिट है। आज के न्यूजरूम को एक क्रिकेट टीम की तरह से सोचो, जहां सभी ग्यारह खिलाड़ी गेंदबाज, बल्लेबाज, ऑलराउंडर, और विकेटकीपर एक समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं और उन सबको फील्डिंग भी जरूरी करनी होती है। और जहा कप्तान हमेशा हर फील्ड में टेस्ट पर होता है। इस बारे में आप फैसला करें कि आप किस भूमिका में फिट बैठते हैं। मैं अपने आपको लेकर आश्वस्त नहीं हूं। इसके अलावा मैं सोचता हूं कि एक रिपोर्टर की जिंदगी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा फनी है। मैं सोचता हूं कि कैसे मैं फिर से जवान हो जाऊं और एक नई शुरुआत करुं।
 
लेकिन इस तरह की कल्पनाओं को कभी साकार नहीं किया जा सकता, मैं आप लोगों द्वारा किए गए शानदार काम के माध्यम से अपने रिपोर्टर जीवन की कल्पनाओं में जीने से धन्य हूं। 
 
साभार- इंडियन एक्सप्रेस डॉट कॉम
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