ताजा खबर
दीव का समुद्र चंचल का चैनल कोलकता में यहूदी और सायनागॉग मेधा ने पूछा ,ये जग्गी वासुदेव हैं कौन ?
अंतागढ़ चुनाव बताएगा मूड

संजीत त्रिपाठी

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित अंतागढ़ विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी समर्थक मंतूराम पवार पर फिर एक बार भरोसा जताते हुए उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है, वहीं भाजपा प्रत्याशी की घोषणा अब तक नहीं हुई है लेकिन भोजराम नाग के नाम की चर्चा जोरों पर है। राज्य में जहां सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी इस सीट को बचाने के लिए प्रयास कर रही है वहीं कांग्रेस को उम्मीद है कि आदिवासी मतदाता इस बार उनका साथ देंगे। यह उपचुनाव दोनों ही पार्टी के लिए पूर्वाभ्यास की तरह होगा क्योंकि नवंबर-दिसंबर में राज्य के नगरीय निकायों के भी चुनाव होने हैं। पिछले तीन महीनों से राज्य में चल रहा राशनकार्ड का मुद्दा इस उपचुनाव में और नगरीय निकाय चुनावों में बड़ा मुद्दा होगा।
आदिवासी बाहुल्य बस्तर क्षेत्र के अंतागढ़ विधानसभा सीट के लिए 13 सितंबर को मतदान होगा। अंतागढ़ विधानसभा सीट के लिए 27 अगस्त तक नामांकन लिए जाएंगे और 28 अगस्त को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 13 सितंबर को मतदान के बाद 16 तारीख को मतों की गिनती होगी। अंतागढ़ विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक विक्रम उसेंडी के लोकसभा में निर्वाचित होने के बाद से यह सीट रिक्त है। 
वर्ष 2008 में हुए परिसीमन में अंतागढ़ विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया था। इस सीट पर पहली बार विक्रम उसेंडी ने कांग्रेस के मंतुराम पवार को मात्र 109 वोटों से हराया था, लेकिन पिछले वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में उसेंडी ने जीत का अंतर बढ़ाते हुए पवार को 5171 मतों से पराजित किया था। 
छत्तीसगढ़ में ऐसा माना जाता रहा है कि यहां की सरकार का फैसला आदिवासी सीटें करती है और इसमें नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र की 12 सीटें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन वर्ष 2013 में हुए चुनाव में यह मिथक टूट गया। राज्य में वर्ष 2013 में हुए चुनाव में भाजपा को बस्तर की 12 में से चार सीटें ही मिल पाई लेकिन वह सरकार बनाने में सफल रही।
राशनकार्ड होगा बड़ा मुद्दा
कांग्रेस का कहना है कि बीते विधानसभा चुनाव में राज्य के आदिवासी मतदाताओं ने कांग्रेस पर भरोसा जताया था। राज्य में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनने के बाद भाजपा गरीबों और आदिवासियों के खिलाफ हो गई है। यह उदाहरण हाल के दिनों में राशन कार्डों के निरस्तीकरण के रूप में सामने आया है। गरीब जनता भाजपा के खिलाफ है और वह इस उपचुनाव में सरकार को जरूर सबक सिखाएगी।
वहीं भाजपा इस सोच में हैं कि छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने आदिवासियों की बेहतरी के लिए कई कार्य किए हैं तथा यहां की जनता भी सरकार के साथ है, यही कारण है कि अंतागढ़ क्षेत्र में भाजपा कभी चुनाव नहीं हारी है। भाजपा नेता विश्वास जता रहे हैं कि इस बार भी यहां भाजपा की ही जीत होगी।
नगरीय निकाय चुनावों पर नजर
दोनों ही दल के लिए यह उपचुनाव शक्तिपरीक्षण से ज्यादा पूर्वाभ्यास की तरह होगा क्योंकि नवंबर-दिसंबर में नगरीय निकाय चुनाव होने हैं, इसे देखते हुए कांग्रेस-भाजपा दोनों ही मतदाताओं का मूड भापेंगे। इस चुनाव के नतीजे यह बताएंगे कि राशनकार्ड पर जो हल्ला राज्यभर में मचा हुआ है वह किस करवट बैठेगा।
 
email ईमेल करें Print प्रिंट संस्करण
  • चंचल का चैनल
  • जहां पत्रकारिता एक आदर्श है
  • जहां आये कामयाब आये
  • नामवर की नियति
  • चिड़िया ते बाज तुड़वाऊं?
  • प्रभाष जोशी और इंडियन एक्सप्रेस परिवार
  • एक ऋषि की यात्रा का अंत
  • असली मैदान तो यूपी बनेगा
  • राजकाज
  • भगतों की चांदी है
  • मेरठ के बांके!
  • बाबरी विध्वंस की आयी याद
  • इतिहास में उपेक्षित तिलका मांझी
  • आखिरी पड़ाव गोमोह जंक्शन
  • संगम के अखाड़े में लेफ्ट-राइट
  • एक थे लोकबंधु राजनारायण
  • अपनी जमीन ही नसीब हुई
  • रवीश के सामाजिक सरोकार
  • गिरोह क्यों कहते हैं
  • ई राजेंद्र चौधरी कौन है ?
  • Post your comments
    Copyright @ 2016 All Right Reserved By Janadesh
    Designed and Maintened by eMag Technologies Pvt. Ltd.