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संकट में सारस

दिनेश शाक्य

इटावा । सूखे की मार ने अमर प्रेम के इकलौते प्रतीक सारस पक्षी के प्रजनन को बडै पैमाने पर प्रभावित कर दिया है। पर्यावरणीय विशेषज्ञो के साथ साथ वन विभाग के अफसरो की बात को अगर सही माने तो सूखे की विभाषिका की वजह से सारस पक्षी का प्रजनन करीब 25 फीसदी के आसपास प्रभावित हो चला है परिणामस्वरूप कई कई किलोमीटर दायरे की दौड भाग के बावजूद खेत खलिहानो मे कही भी सारस पक्षी के अंडे नजर नही आ रहे है। 
अमर प्रेम का प्रतीक सारस पक्षी ने दुनिया भर में इटावा जिले की पहचान करा रखी हैं l करीब 5 हजार अकेले उत्तर प्रदेश में स्वच्छंद रूप से ताल तलैयों के किनारे तथा घान के खेतों वास करते हुये देखे जाते रहे हैं,लेकिन सूखे की वजह से ये अब ना तो पहले की तरह खेतो में देखे जा रहे हैं और तो और इनके अण्डे भी पहले की तरह नजर नहीं आ रहे है l 
सूखे से प्रवाभित जिले इटावा और आसपास के इलाको मे सारस पक्षी की स्थिति को आंकाने के लिए पर्यावरणी संस्था सोसायटी फार कंजरवेशन आफ नेचर के सचिव डा.राजीव चौहान ने अपनी टीम के साथ जब भ्रमण किया तो पाया सारस की संख्या मे भारी गिरावट देखी गई। डा.चौहान बताते है कि उन्होने सारस पक्षियो को खोजने के क्रम मे सारस पक्षी के प्रभाव और धान की बाहुल्यता वाले इलाके बसरेहर से अभियान की शुरूआत की बसरेहर मे लुहिया नहर के आसपास बडी तादात मे सारस और उनके अंडे देखे जाते रहे है लेकिन इस बार एक भी नेस्ट नही देखा गया। इसके बाद सैफई हवाई पटटी के आसपास के खेत खतिहानो मे खोज की गई वहा भी ऐसा नही देखा गया,हवाई पटटी के बाद पडोसी मैनपुरी जिले के कुदंइिया,कुर्रा,सौंज,समान और गाद जहा जहा पर सारस के नेस्ट होते रहे है वहा अवलोकन करने के दौरान 35 नेस्ट देखे गये इन नेस्टो मे एक या दो अंडे देखे गये है। 25 अगस्त को किये गये सर्वेक्षण का हवाला देते हुए डा.राजीव चौहान ने बताया कि पिछले साल सारस के 55 नेस्ट देखे गये थे लेकिन इस बार सिर्फ 35 ही नेस्ट मिलना यह बता रहा है कि सूखे का व्यापक असर सारस पक्षी के प्रजनन पर पड गया है। डा.चौहान बताते है कि जिस जिस जगह पर भी सारस के अंडे देखे जा रहे है वो सभी जगह वैडलैंडो मे ही मिल रहे है जब कि पहले सारस धान के खेतो मे अंडे रखते थे लेकिन सूखे की विभीषिका के कारण किसानो ने धान की जगह दूसरी फसलो पर अपना ध्यान लगा दिया है इसलिए सारस को प्रजनन का मौका ही नही मिला परिणामस्वरूप हालात ऐसे बन गये। वे कहते है कि इस बार जैसे सूखे के हालत अभी तक हाल के सालों में देखने का नहीं मिले है। सोसायटी फार कन्जरवेशन आफं नेचर नामक पर्यावरणीय संस्था के सचिव डा.राजीव चौहान ने सूखे की मार झेल रहे इटावा के कई इलाको सारसों की खोज के लिये का भ्रमण किया,लेकिन सारस है देखने को भी नहीं मिल रहा है,इलाकाई ग्रामीण भी इस बार सूखे के चलते चिंतत नजर आ रहे है उनका साफ कहना है इन दिनो सारसों के जोडे यदा कदा ही नजर आ रहे है जो पहले खासी तादात में दिखलाई दिया करते थे, इसके पीछे किसानों का कहना है कि इस बार सूखे की वजह से जहां किसानों की फसले चौपट हुई है, वहीं किसानो का मित्र कहे जाने वाला सारस पक्षी भी पानी कमी के चलते संकट में नजर आ रहा है l कभी सारसों की संख्या सैकडों में देखी जाती रही है आज ना के बराबर रह गई है। जब सारस खेतो में दिखलाई ही नहीं देगें तो लाजिमी है कि उन पर संकट आने का ही संकेत ही माना जायेगा।
दुनिया में सबसे उंचा सारस उडने वाला पक्षी किसानों का मित्र हैं,करीब 12 किलो वजन वाले सारस की लम्बाई 1.6 मीटर तथा जीवनकाल 35 से 80 वर्ष तक होता है,सारस वन्य जीव संरक्षण अघिनियम 1972 की अनूसूची में दर्ज हैं,सारसों की 1999 से गणना काम इटावा और आसपास के इलाकों सोसायटी फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर नामक पर्यावरणीय संस्था की ओर किया जा रहा हैं,यह पहला मौका हैं जब सूखे की वजह से सारस पक्षी का प्रजनन प्रभावित होता नजर आ रहा है, कुल मिला कर कह सकते हैं कि सूखे ने जहां आम आदमी का जीना मुश्किल कर दिया हैं वहीं पक्षियों के लिये भी खतरा पैदा कर दिया हैं।
सूखे की मार ने किसानो को जहां मुसीबत में डाला है वही पर किसानो का मित्र समझा जाने वाले सारस को भी बख्सा नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि सारस के प्रजनन में सूखे की वजह से कुप्रभाव बडे पैमाने पर पडेगा जो सारसो की गिरती हुई तादात के लिये बुरा संदेश माना जायेगा। 
देश में सारस की 6 प्रजातियां है.इनमें से 3 प्रजातियां इंडियन सारस क्रेन, डिमोसिल क्रेन व कामन क्रेन है, दुनिया भर में सारस पक्षियों की अनुमानित संख्या 8 हजार है,इनमें अकेले इटावा में 2500 और मैनपुरी में करीब 1000 सारस है अनूकूल भौगोलिक परिस्थितियां सारसों को अपनी ओर आर्किशत करती रहती है, दोनों जिलो में अनकूल पानी के जल क्षेत्र,धान के खेत,दलदल,तालाब,झील व अन्य जल स्त्रोत पाये जाते है.दल-दली क्षेत्रों में पाई जाने वाली घास के टयूबर्स,कृषि खाद्यान्न, छोटी मछलियां ,कीडे मकोडे,छोटे सांप ,घोघें,सीपी आदि भोजन के तौर पर सारसों को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती है। उल्लेखनीय है कि अग्रेंज कलक्टर ए.ओ.हृयूम के समय में इस क्षेत्र में साइबेरियन क्रेन भी आता था,जिसको देखने के लिये अब भरतपुर पक्षी विहार जाना पडता था,क्यों कि 2002 साल में आखिरी बार साईबेरियन क्रेन का एक जोडा देखा गया था।
सारस पक्षी के प्रजनन को प्रभावित होने का अनुमान इटावा के प्रभागीय वन निदेशक मानिक चंद्र भी लगा रहे है उनका कहना है कि पानी की कमी ने सारसों के प्रजनन को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है,लेकिन असल मे कितना नुकसान हो रहा है इस बात को अभी पूरी तरह से पुष्टि नही किया जा सकता है फिर इतना जरूर कहा जा सकता है कि करीब 25 फीसदी के आसपास नुकसान हो गया है 
मानसून समय से आने पर सारस पक्षी के प्रजनन पर बुरा असर पडा है,25 फीसदी तक प्रजनन में गिरावट दर्ज की जा रही है, इस बार पानी की की चलते धान की बुबाई कम क्षेत्रों में पहले के मुकाबले हुई है, जिससे इनके बच्चें को छुपाने के लिये बच्चों की सुरक्षित स्थान नहीं मिल पा रहा है. संकटग्रस्त सारस पर एक बार फिर एक नया संकट पानी की किल्लत के रूप में सामने आया है, अब सवाल यह उठता है कि सूखे की वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई किस आघार पर हो पायेगी ?
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