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दीव का समुद्र चंचल का चैनल कोलकता में यहूदी और सायनागॉग मेधा ने पूछा ,ये जग्गी वासुदेव हैं कौन ?
ई राजेंद्र चौधरी कौन है ?

चंचल 

ई राजेंद्र चौधरी कौन है ?  सच्ची बोलें ? तोर बाप है. चोर, बनडोल, डकैत, चमचोर,बलात्कारी और लुटेरों क इतिहास तुम्हरी जबान पर है, और पूछि रहा है राजेंद्र चौधरी कौन है? तुम्हारी गलती नहीं है , पिछले कुछ सालों से बयार ही ऐसी चली है कि जो जितना बड़ा अपराधी, उतना ही बड़ा उसका लावाजिमा और उतनी ही बड़ी पूजा. कल तक रहा कि अगर कोई अपराध में पकड़ा गया तो क़ानून बाद में सजा देता रहा, समाज पहले ही टाट बाहर कर देता रहा औ हुक्का पानी सब बंद. राजिंदर के सवाल पर लम्मरदार का इस तरह भड़कना लोगों को अजीब लगा , क्योंकि लम्मरदार जल्दी उबलते नहीं. लेकिन लगता है कहीं और से बौखलाए हुए आये हैं. लाल साहेब ने संभाला- बैठिए लम्मरदार! आज अदरख की चाय बना रहा हूं. का बात है आज सुबहे उखड गये ? लम्मरदार ने लाठी बगल दीवार पर टिकाया और तख़्त पे जमकर बैठ गये .लंबी सांस ली और बोलना शुरू किये . पूरे गांव में का अगल बगल हर जगह चर्चा है कि एक ठेठ गांव में लोगों को पढ़ने के लिए, उठने बैठने के लिए, और अपने पुरखों के बारे में जानने के लिए ' दस्तावेज ' बनाया जा रहा है ....... बात पूरी हो इसके पहले ही उमर दरजी ने टोका- काका ! आज वाकई बहकी-बहकी बात कर रहो हो कुछो, कुछो ना समझ में आय रहा बा, एंटीना से ऊपर निकल जा रहा है ? लम्मरदार मुस्कुराए .बताता हूं .परधान क लडिका पढ़ लिख के गांव आवा. कुछ दिन तो यूं ही गांव-गांव घूमता रहा. पता नहीं का सनक सवार हुई कि बोला- अब गांव में एक पुस्तकालय की जरूरत है , एक बाजार की जरूरत है जहां गांव में बनने वाले पुश्तैनी रोजगार को फिर से स्थापित किया जा सके ,इस समय समूचे देश को इन दो चीजों की बहुत जरूरत है वरना आगे आने वाली पीढ़ी तो और भी निकम्मी निकलेगी. अपनी कुल पूंजी लगा कर उसने पुत्कालय तो खोल दिया, अब उसे और आगे बढ़ाना था. जहां एक जगह वे सारे दस्तावेज मुहैया हो सकें जिन्हें हमारी पीढ़ी नहीं जानती. गांधी, नेहरू, डॉ लोहिया , जेपी. आज की पीढ़ी के लिए यह जरूरी है कि इन पुरखों के बारे में गंभीरता से जाने. उस हिस्से का नाम रखा गया है दस्तावेज . इसी के बगल में एक कतार से छोटी-छोटी दुकाने बनाने का इरादा है जहां लोहार , कुम्हार , धरिकार , रंगरेज. धुनिया वगैरह अपने पुश्तैनी पेशे के साथ इज्जत के साथ, अपना काम करे और उसे देश दुनिया देखे . इस आयोजन के लिए राजेंद्र चौधरी ने अपने निधि से मदद किये . और इसकी चर्चा चारों ओर है. क्योंकि अब तक जो होता रहा कि सांसद और विधायक अपने निधी से जो भी मदद करते रहे, पहले उसका कमीशन ले लेते रहे. यहां एक भी पैसे का लेनदेन नहीं हुआ है. इसकी वजह जान लो चौधरी राजेंद्र निहायत ईमानदार नेता है और खांटी समाजवादी. औ ई बकलोल पूछ रहा है कि कौन हैं राजेंद्र चौधरी ? अजीब हालत में समाज पहुंच चुका है. न नेक काम की चर्चा, न नेक नाम की जानकारी. इसलिए गुस्सा आ गया. कल का किस्सा सुने? बनारस हवाई अड्डे पर कुछ देर के लिए मुलायम सिंह यादव रुके . बिहार से वापस आ रहे थे. गणेशी परंपरा के समाजवादी वहां पहुंच गये. मुलायम सिंह से कहा गया कि बनारस में डॉ लोहिया की एक प्रतिमा लगवा दीजिए .मुलायम सिंह ने बहुत माकूल जवाब दिया. डॉ लोहिया पर सेमिनार भी किये हो कभी ? जेपी और आचार्य नरेंद्र देव को पढ़े हो ? समाजवादियों में आपस में ही तू तू मैं मै शुरू हो गयी. मुलायम सिंह बगैर विश्राम किये अपनी यात्रा पर चले गये. लेकिन एक सवाल तो छोड़ ही गये- मूर्ति पूजा और विचार में किसको पकड़ना है ? और किसके विचार ?

   - तो इस दस्तावेज में कौन कौन से लोग आयेंगे ? कीन उपाधिया ने कुटिल हंसी के साथ पूछा क्योंकि जब से यह पुस्ताकलय शुरू हुआ है कुछ नौजवान गांधी,लोहिया, आचार्य, पंडित नेहरू के बारे में जानने लगे हैं और संघियों के झूठ का जवाब भी देने लगे हैं, कीन उपाधिया को यह खटकता है क्योंकि ये पुराने संघी हैं और अब तक जो कुछ भी झूठ फूर बोलते थे पब्लिक मुंह बाए सुनती थी. उनके प्रचार को धक्का लगा है . लम्मरदार, कीन को देख कर हंसे- बकलोल ! एक साल से भी ज्यादा हुए केंद्र में तुम्हारी सरकार है. चुनाव हुए और हो रहे हैं. कहीं एक भी जगह अपने किसी नेता का नाम सुना कि उनके नाम पर वोट माग रहे हों ? हेडगवार, गोलवरकर, अटल या अडवानी किसी का नाम आया ? कभी गांधी, कभी पटेल, अब डॉ लोहिया, जेपी .. ? बोल ! सच है न . और जब गांधी, लोहिया,जेपी के विचार से मुठभेड़ होगी तब क्या करोगे ? अब भी वक्त है तू ' दस्तावेज में बैठना शुरू कर. वहां तुम्हारी भी किताबें मिलेंगी जिसमें तुमने नफरत के पाथ पढाएं हैं , उन्हें पढ़ कर तुम्हे शर्म आयेगी. पूछों न अपने नेता से कि बंच आफ थाट कहां है/ बच्चू कोइ न कोइ समाजवादी ज़िंदा रहेगा और वह ठोस धरातल बनाएगा ही . परंपरा मिटनेवाली नहीं है. राजेंद्र चौधरी उसकी एक मजबूत कड़ी हैं.उनके पास न मकान है, न बख्तर बंद गाड़ियों का काफिला, न बंदूक है न संदूक लेकिन आज वह उत्तर प्रदेश का एक मजबूत शख्स है जिसके पास उसकी सबसे बड़ी तिजारत है ईमानदारी और वैचारिक प्रतिबद्धता.चल वक्त हो तो दस्तावेज चलो .  
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