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शुरुआत तो ठीक ही हुई है महाराज ! केशव प्रसाद मौर्य होंगे यूपी के सीएम ? उत्तर प्रदेश में मोदी का रामराज ! आधी आबादी ,आधी आजादी?
गधा बनाम कसाब!
धीरेन्द्र श्रीवास्तव 
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में दिख रहे त्रिशंकु विधानसभा के आसार को बहुमत में बदलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवाली-रमज़ान, श्‍मशान-कब्रिस्तान को लेकर यूपी में हो रहे भेदभाव का मुद्दा उछाला. फिर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सदी के महानायक अभिताभ बच्चन से आग्रह कर दिया कि वे गुजरात के गधों का प्रचार न करें. दो बड़ों में इशारों-इशारों से हुए इस वार-प्रतिवार में पूर्वी उत्तरप्रदेश का चुनाव गधा बनाम कसाब जैसे शब्दों की में बदल गया है. बहुमत को लेकर हो रहे इस जंग में गेंडा, पाकिटमार और मेढक जैसे शब्द भी शामिल हो गए हैं.
 
उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव में ये विशेषण प्रारम्भ में नहीं थे. उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था, परिवार का झगड़ा, भ्रष्टाचार और विकास कार्य को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधा जा रहा था. भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी 27 साल, यूपी बेहाल को आधार बनाकर सपा पर आक्रमण कर रही थी. इस आक्रमण में दम भी था लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की इमेज इस हमले को भोथरा कर दे रही थी. इसी दौरान अजित सिंह की पार्टी को उसका खोया वोट बैंक वापस मिल गया. कारण चाहे जो हो, अजित सिंह को मिली इस मजबूती ने पहले दो चरण में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण होने दिया. इसकी वजह से भारतीय जनता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन में लड़ाई कांटे की हो गयी.
 
तीसरे चरण में लोगों को उम्मीद थी कि परिवार के झगड़े में सपा का सब बर्बाद हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इस गढ़ में सपा को नुकसान तो हुआ है लेकिन उतना नहीं, जितने की उम्मीद थी. लाभ में भी बसपा या भाजपा में कौन बीस है, आंकलन मुश्किल है. इसी चरण के बाद यूपी में बहुमत की जगह त्रिशंकु विधानसभा के आसार ने बल पकड़ लिया. सवाल उठने लगा कि कौन किसके साथ सरकार बनाने के लिए गठबंधन करेगा. इसे लेकर हुए संभावित सवाल के जवाब में बसपा ने कहा कि भाजपा के साथ नहीं. भाजपा ने कहा कि बसपा के साथ नहीं. अजित सिंह ने भी कहा कि भाजपा के साथ नहीं. इसी बीच केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस सपा गठबंधन को दो लड़कों का गठबंधन कह खिल्ली उड़ाने की प्रक्रिया शुरू की. लोगों ने इसे सुना तो लेकिन गम्भीरता से नहीं लिया. 
 
इसे विपक्ष की कमजोरी समझ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टिप्पणी कर दी कि बहुजन समाज पार्टी यानी बसपा अब बहिन जी सम्पत्ति पार्टी है. जवाब में यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने नरेंद्र दामोदरदास मोदी के नाम का विश्लेषण किया कि निगेटिव दलित मैन. जुमलेबाजी यहीं रुकी नहीं. प्रधानमंत्री मोदी ने रमज़ान-दिवाली तथा कब्रिस्तान-श्‍मशान को लेकर सपा सरकार के भेदभाव के नज़रिए का मुद्दा उठा दिया. जवाब में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सदी के महानायक अभिताभ बच्चन से आग्रह कर दिया कि वह गुजरात के गधों का प्रचार नहीं करें.
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी भारतीय जनता पार्टी को काफी नागवार लगी. सामान्य लोगों को छोड़िए, भारत सरकार के मंत्री वेंकैया नायडू, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी, भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा और दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने इस पर तीखी टिप्पणी की. मुख्यमंत्री को सीमा में रहने की सलाह दी गयी. इसे गुजरात राज्य का अपमान बताया गया और कहा गया कि सदी के महानायक से सीएम का आग्रह उनकी निराशा का द्योतक है. 
 
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने इन प्रतिक्रियाओं के जवाब में कहा है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की अपील को किसी को दिल पर नहीं लेना चाहिए लेकिन, भाजपा ने लिया है. प्रतिक्रिया में केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कई नेताओं को नाम लेकर मेढक कहा तो मार्क्सवादी पार्टी की सुभाषनी अली ने नोटबंदी को लेकर प्रधानमंत्री को पाकिटमार कहा. इधर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि ‘क’ माने कांग्रेस. ‘स’ माने सपा और ‘ब’ माने बसपा. यानी कांग्रेस, सपा और बसपा का मतलब है ‘कसाब’. याद रहे की कसाब मुंबई हमले का आतंकी है. बड़े लोगों के मुंह से निकले ये जुमले पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांव-गांव तक पहुंच गए हैं. इसकी वजह से पूर्वी उत्तर प्रदेश में चुनावी वार गधा बनाम कसाब में बदल गया है.
 
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