ताजा खबर
जहरीली हवा को और कितना बारूद चाहिए ? इलाहाबाद विश्विद्यालय में समाजवादी झंडा लहराया जांच पर ही उठा सवाल लॉस वेगास में सिमटी सारी दुनिया
सत्ता में लौट रही है भाजपा !

शिवम विज

लखनऊ.उत्तर प्रदेश में एक माह तक चलने वाले मतदान में हर चौथे रोज मतदान हो रहा है. यानी हर चौथे दिन सभी प्रमुख दलों के पास यह अवसर है कि वे अगले चार दिनों में माहौल बदलने का प्रयास करें. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों के रुख से लगा कि भाजपा इस चुनाव में कमजोर पड़ रही है.
दूसरे चरण में भी भाजपा को बढ़त मिलती नहीं दिखी. भारी भरकम मुस्लिम आबादी, कुछ यादव मतदाता और कमजोर बसपा. यानी कुल मिलाकर संकेत यह निकला कि सपा-कांग्रेस गठबंधन का प्रदर्शन ठीकठाक रहा. लेकिन तीसरे चरण में ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा ने अवध में कामयाबी हासिल की है. अशोका विश्वविद्यालय के गिलीज वर्नियर्स के विश्लेषण के मुताबिक पूरे प्रदेश में अवध मत हिस्सेदारी और सीटों में स्विंग (बदलाव) के मामले में काफी अहमियत रखता है. यहां उच्च वर्ण के लोग ज्यादा हैं, गैर जाटव दलित काफी हैं और लखनऊ जैसा शहरी इलाका इसी क्षेत्र में आता है. लब्बोलुआब यह कि ये भाजपा के लिए उर्वर इलाका है.
वर्ष 2012 में इस पूरे इलाके में सपा हावी रही थी. इस चुनाव में उसका पराभव ही नजर आ रहा है. दूसरे दौर में फरुखाबाद, इटावा, मैनपुरी और कन्नौज आदि इलाकों में मतदान हुआ जो यादव परिवार का गढ़ माने जाते हैं. वर्ष 2014 में मोदी लहर भी इसे भेद नहीं पायी थी. लेकिन इस बार पारिवारिक झगड़े का असर यहां नजर आ सकता है.
आंकड़ों की बात करें तो भाजपा को इस चुनाव में स्वाभाविक बढ़त हासिल है. लेकिन टिकट वितरण की गड़बड़ी से लेकर नोटबंदी पर कुछ तबकों की नाराजगी जैसे मुद्दों ने उसे प्रभावित किया है. अखिलेश यादव ने सत्ता विरोधी लहर को बखूबी चाचा शिवपाल की ओर मोड़ दिया. चुनाव आयोग से साइकिल चुनाव चिह्न हासिल करना भी अखिलेश यादव की एक बड़ी कामयाबी रही. विपक्ष पारिवारिक लड़ाई को नाटक बताता रहा. उधर पारिवारिक संघर्ष के चलते अखिलेश समय से चुनाव प्रचार शुरू नहीं कर सके. उनका काफी समय कांग्रेस के साथ गठबंधन में भी लगा. 
सपा के मौजूदा विधायकों के कर्म हर जगह पार्टी को पीछे धकेल रहे हैं. पूरा चुनाव अखिलेश यादव के नाम पर लड़ा जा रहा है. इस बीच वह कहने लगे हैं कि भाजपा के पास मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार तक नहीं है. 
लेकिन उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ रहा है भाजपा मौजूद होती जा रही है. वर्ष 2014 में भाजपा और अपना दल को कुल 43.3 फीसदी वोट मिले थे. इसमें से अगर जाटों और बनिया समुदाय के वोट हटा दिये जायें और यादव और दलित मत कम कर दिये जायें तो भी भाजपा 30 फीसदी मत हासिल कर सकती है. जो उसे उत्तर प्रदेश की सत्ता दिलाने के लिए पर्याप्त है. 
सपा और कांग्रेस अब केवल यादव और मुस्लिम मतों पर निर्भर रह गये हैं. मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग बसपा की ओर जा रहा है.साभार -हफिंगटन पोस्ट
email ईमेल करें Print प्रिंट संस्करण
  • जहरीली हवा को और कितना बारूद चाहिए ?
  • जांच पर ही उठा सवाल
  • इलाहाबाद विश्विद्यालय में समाजवादी झंडा लहराया
  • इसलिए लोकनायक की होर्डिंग हटा दी !
  • ' लोग मेरी बात सुनेंगे, मेरे मरने के बाद '
  • फिर एक जेपी की जरूरत है
  • प्रकृति में पुनर्नवा चेतना है
  • छतीसगढ़ के सैकड़ों गांव लुप्त हो जाएंगे
  • गांधी और गांधी दृष्टि
  • गांधी और मोदी का सफाई अभियान
  • आजादी की लड़ाई का वह अनोखा प्रयोग
  • तोप सौदे में अमेरिका ने दांव तो नहीं दे दिया !
  • दक्षिण भारत में किसान मुक्ति यात्रा
  • एक आंदोलन इमली का
  • काशी में बेटियों पर लाठी, गोली !
  • बीएचयू कांड के विरोध में कई शहरों में प्रदर्शन
  • बेटियों से युद्ध नहीं संवाद करे सरकार
  • बुजुर्ग मजदूर नेता को जेल में डाल दिया
  • बीएचयू की छात्राएं सड़क पर
  • गांधी, खादी, गादी और मोदी
  • Post your comments
    Copyright @ 2016 All Right Reserved By Janadesh
    Designed and Maintened by eMag Technologies Pvt. Ltd.