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यूपी में हमारी सरकार -अमित शाह

विवेक सक्सेना 

नई दिल्ली .भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार से जो बातचीत की उसके खास अंश .क्या समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन के बाद भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश में चुनौती बढ़ गयी है?दोनों का पिछला इतिहास  और कारगुजारियां किसी से छिपी नहीं है? जब दो भ्रष्ट व नाकाम ताकतें साथ आती हैं तो लोग स्वत: सकारात्मक और रचनात्मक ताकत की ओर आकर्षित होते हैं. उत्तर प्रदेश में हमारे मुकाबले में कोई नहीं है. वहां डेढ़ दशकों का सपा-बसपा का कुशासन ही हमारी भव्य जीत सुनिश्चित करेगा.

यादव परिवार में जो कुछ हुआ उसका राजनीतिक परिणाम क्या निकलेगा?

यह नाटक था जिसे जनता बहुत अच्छी तरह से  समझती है. अपनी नाकामियों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए इन लोगों ने यह नाटक किया. लोग सब समझते हैं और चुनाव के  जरिये इन लोगों को उसके जगह दिखा देंगे.

क्या इस चुनाव को नोटबंदी के मुद्दे पर जनमत संग्रह माना जा सकता है?

मेरा मानना है कि यह चुनाव सपा सरकार की नाकामियों, भ्रष्ट्राचार, भाई-भतीजावाद पर जनमत संग्रह है. फिर भी अगर कोई इसे नोटबंदी पर जनमत संग्रह मानना चाहता है तो हम उसके लिए तैयार हैं. जनता को पता चल चुका है कि कालाधन समाप्त करने के लिए हमने कितना बड़ा कदम उठाया. यह कदम उठाने की राजनीति इच्छा शक्ति सिर्फ नरेंद्र मोदी में ही थी. हमने ही पिछली बार सर्जिकल स्ट्राइक की. क्या कभी किसी और सरकार ने ऐसा करने की हिम्मत दिखायी थी.

इस बार भाजपा को कितनी सीटें मिलेंगी? क्या लोकसभा चुनाव के बाद मोदी लहर ठंडी सी पड़ गयी है?

उस समय देश में जो मोदी लहर चल रही थी वह अब सुनामी में बदल चुकी हैं. हमें लोकसभा चुनाव  में 71 सीटें मिली थी. इस बार विधानसभा चुनाव में हम दो तिहाई बहुमत हासिल करेंगे.

तब आपके पास नरेंद्र मोदी का चेहरा था. इस बार तो भाजपा मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार ही तय नहीं.

यह संसदीय बोर्ड का फैसला है और इसमें नया कुछ भी नहीं है. हमने महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में भी ऐसा ही किया था और वहां चुनाव जीते. सरकारें बनायीं. यह तो रणनीति का हिस्सा है.

मगर  इसी के चलते भाजपा दिल्ली और बिहार में बुरी तरह से हारी. क्या इससे आप लोगों ने कोई सबक नहीं सीखा?

हमने दोनों ही  पराजयों का कारण पता लगाने के लिए समिति बनायी. विशिष्ट राजनीतिक परिस्थितियों के चलते हम वहां हारे. इन कारणों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है. हमने असम में सरकार बनायी. हम स्थानीय निकाय के चुनाव जीते. केरल और पश्चिम बंगाल में हमारा जनाधार बढ़ा.

अब भाजपा भी दलों को तोडऩे में  व्यस्त हो गयी है. इन दलों के नेताओं को तोड़ कर उन्हें टिकट दिया गया है. इस बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?

इसे तोडऩा कहना ठीक नहीं है. अगर हम चुनाव नतीजे आने के बाद इस तरह का कुछ करते हैं तो हमारी आलोचना की जा सकती थी. मगर हम तो चुनाव के पहले ही समाज के विभिन्न वर्गों को संगठित कर रहे हैं. इसे आप राजनीतिक पलायन कह सकते हैं. यह पलायन उन ताकतों को एकजुट करने में मदद करेगा जो कि बाद में उत्तर प्रदेश और देश के लिए लाभकारी साबित होंगी.

इस चुनाव में मंदिर मुद्दा नजर नहीं आ रहा है?

इस संबंध में भाजपा का रूख स्पष्ट है. हम चाहते हैं कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत उसका निर्माण हो या तो आपसी सहमति से राम मंदिर बने. अथवा अदालत का फैसला आये. हम राम मंदिर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

परिवारवाद की आलोचना करती आयी भाजपा ने भी इस बार तमाम अपने नेताओं के परिवार के लोगों को टिकट दिया है. यह उचित है?

हम जिस परिवारवाद की बात करते हैं वह मुलायम सिंह यादव, फारूख अब्दुल्ला, सोनिया गांधी का परिवार है. जहां यह तय हो जाता है कि उसका बेटा ही मुख्यमंत्री बनेगा या राहुल गांधी ही प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार होगा. आगे चल कर अखिलेश यादव, उमर अब्दुल्ला, राहुल गांधी के बच्चे सरकारें संभालेंगे. हम टिकट देते हैं पर इसका अर्थ यह नहीं होता कि उस परिवार सदस्य मुख्यमंत्री तो क्या मंत्री भी बन पायेगा. मेरे जैसा दरी बिछाने वाला पार्टी अध्यक्ष है और चाय बेचने वाला इस देश का प्रधानमंत्री है. क्या आप बता सकते हैं कि भाजपा का अगला अध्यक्ष कौन होगा.

भाजपा के अनेक नेता सांप्रदायिक बयान देकर माहौल खराब कर रहे हैं. इन लोगों के बारे में आप क्या कहना चाहते हैं?

हमारी दिक्कत यह है कि उत्तर प्रदेश में दशकों तक तुष्टिकरण की राजनीति होती आयी है. जब कोई भाजपा नेता इसके खिलाफ बोलता है तो उसकी  बात को सांप्रदायिक करार दे दिया जाता है. अगर पलायन के बारे बात करो तो उसे सांप्रदायिक मान लिया जाता है. हम अगर अपने चुनाव घोषणा पत्र में एंटी रोमियो स्क्वाड बनाने के वादा करते हैं तो इसे सांप्रदायिक बता दिया जाता है. यह सही नहीं है. वैसे संप्रदायिक बाते नहीं करनी चाहिये.

क्या आपका इशारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की घटनाओं पर है?

पूरे प्रदेश का एक जैसा हाल है. सपा-बसपा की तुष्टिकरण की राजनीति के चलते ही धर्म और जाति के आधार पर अफसरों की नियुक्तियां की जाती रही हैं. क्या आपने कभी भाजपा शासित राज्यों से किसी के पलायन करने की खबर सुनी है.

मुस्लिम महिलाओं के तीन तलाक के मुद्दे को आप इतनी अहमियत क्यों दे रहे हैं?

हमारा मानना है कि देश की हर महिला को वे अधिकार मिलने चाहिये जो कि संविधान ने समाज की तमाम महिलाओं को दिये हैं.

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