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परिवार में आग लगा रही भाजपा -अमिता

 प्रदीप श्रीवास्तव.

अमेठी महाराज और सांसद संजय सिंह की मौजूदा पत्नी अमिता सिंह अमेठी से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं. उनके सामने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं संजय सिंह की पहली पत्‍नी गरिमा सिंह. अमिता अपनी जनसभाओं में गरिमा की जगह भाजपा पर ज्यादा हमला करती हैं. उनका कहना है कि भाजपा की हमेशा से विभाजनकारी नीति रही है और समाज में धर्म और अमीरी-गरीबी के आधार पर विभाजन करने की कोशिश के बाद भाजपा अब राजनीतिक और राजघराने के परिवारों में अपनी विभाजनकारी नीति लागू कर रही है. क्षेत्र का दौरा करके चुनाव कार्यालय लौटीं अमिता सिंह से अमेठी विधानसभा चुनाव को लेकर लंबी बात हुई. अमेठी राजघराने की एक पुरानी हवेली में बनाए गए चुनाव कार्यालय में जब उनसे बात हो रही थी, उस समय संजय सिंह कार्यकर्ताओं से मिलकर प्रचार का जायजा ले रहे थे. बातचीत के मुख्‍य अंश...
सवाल- जिस तरह यहां चुनावी माहौल बना है, उसमें किन मुद्दों को आप मुख्‍य मान रही हैं?
जवाब- मुद्दों की जरूरत उन्हें पड़ती है, जिन्हें समस्याओं का पता नहीं होता. मुझे यहां की समस्याओं का पता है. राजनीति में आने के 15 दिन बाद टिकट लेकर चुनाव नहीं लड़ रही हूं. मैं पहले भी चुनाव लड़ चुकी हूं और पिछले 25 बरसों से यहां की जनता के बीच हूं. यहां की समस्याओं को मैंने दीर्घकालिक-अल्पकालिक और तात्कालिक समस्या की श्रेणी में बांट रखा है. राष्ट्रीय मुद्दों का जहां तक सवाल है उसमें मैं सशक्त लोक व्यवस्था की पक्षधर हूं. सामाजिक आर्थिक मजबूती के साथ आगे बढ़ने पर मेरा विश्वास है.
सवाल- मगर यहां पारिवारिक मुद्दे भी उठाए जा रहे हैं?
जवाब- जनता वेबकूफ नहीं है. भावनाओं को भड़काकर उसका फायदा किसी को नहीं उठाना चाहिए. मुझे तो भाजपा पर आश्चर्य है कि इतनी बड़ी पार्टी होने के बाद उसको कोई दूसरा (गरिमा सिंह के अलावा) प्रत्याशी नहीं मिला. पारिवारिक क्लेश किसी भी परिवार में हो सकता है. मगर इसके समाधान का रास्ता राजनीतिक मंच नहीं है. इसके लिए देश में कानून-व्यवस्था है. सामाजिक मंच है.
सवाल- भाजपा ने क्या जान-बूझकर गरिमा सिंह को आपके खिलाफ खड़ा किया?
जवाब- भाजपा की डिवाइसिव (विभाजनकारी) नीति शुरू से रही है. उन्होंने देश को हिंदू-मुसलमान के बीच, गरीब-अमीर के बीच और फिर प्रादेशिक क्षेत्रों के बांटने की कोशिश की है. अब परिवारों में वही नीति लागू कर रहे हैं. कई उदाहरण हैं. ग्वालियर राजघराने में उन्होंने परिवार को बांटा. कृष्णा पटेल और अनुराधा पटेल (मां-बेटी) का मामला कोई पुराना नहीं है. अब यह अमेठी राजपरिवार में फूट डालकर फायदा उठाने की कोशिश करने पर लगे हैं.
सवाल- आपके खिलाफ चुनौती सपा की तरफ से भी है. यहां गठबंधन लागू नहीं हो पाया?
जवाब- गठबंधन का मामला पार्टी नेतृत्व का है. यहां क्यों नहीं साझा उम्मीदवार हो पाया, इसका जवाब नेतृत्व ही देगा. सपा उम्मीदवार गायत्री प्रजापति क्या हैं, वह यहां की जनता देख चुकी है. पिछले पांच साल से उन पर आरोप लग रहे हैं. दागी नहीं महादागी उम्मीदवार हैं. सुप्रीम कोर्ट का जो आदेश आया है वह कोई आश्चर्यचकित करने वाला नहीं है. आज नहीं तो कल यह होना ही था. जो लोग उससे प्रताड़ित हुए हैं उन्हें न्याय मिलना ही है. जनता द्वारा दी गई ताकत का इस्तेमाल प्रजापति ने अपने-अपने परिवार और चंद दलालों के लिए किया था.
सवाल- इस बार प्रियंका गांधी इस क्षेत्र से गायब रहीं.
जवाब- ऐसा नहीं है. 23 फरवरी को उनकी रैली है. वे यहां के लिए नयी नहीं है. यहां सभी से उनका निजी परिचय है.
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