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सीएम नहीं तो पीएम बनेंगे !

धीरेंद्र श्रीवास्तव 

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अगर भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिला तो देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री होंगे और नहीं मिला तो वह देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे. सूबे के सियासी गलियारों में यह चर्चा आम हैं.उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा में राजनाथ सिंह के नाम की चर्चा चुनाव से पहले भी चली थी. उस समय एक बार चर्चा यहां तक रही कि उत्तर प्रदेश का चुनाव राजनाथ सिंह को ही मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर लड़ा जायेगा. सब तय हो गया है. केवल घोषणा बाकी है, लेकिन घोषणा नहीं हुई. कहा गया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम निर्वाचित विधायक ही तय करेंगे. 
तब से यह चर्चा बंद थी लेकिन विधानसभा चुनाव आरंभ होते ही अलग -अलग क्षेत्रों में अलग-अलग लोगों के नाम मुख्यमंत्री के रूप में फिर उछलने लगे. इन चर्चाओं को चुनाव जीतने की रणनीति का हिस्सा मानकर किसी ने गंभीरता से नहीं लिया. चौथे चरण में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने ही यह कहकर इस चर्चा को बल दिया कि उत्तर प्रदेश की तकदीर इलाहाबाद से लिखी जायेगी. इस संकेत को लोगों ने मान लिया कि उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री इलाहबाद से ही होगा. 
इसी के साथ यह सवाल उठा कि कौन? शीर्ष नेतृत्व इस प्रश्न के जवाब में मौन है, लेकिन इसे लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केशव मौर्य का नाम चर्चा में गया. इलाहाबाद का मतदान संपन्न् होने के साथ ही यह चर्चा भी परदे के पीछे चली गयी. इसी दौरान बुंदेलखंड की केंद्रीय मंत्री उमा भारती का नाम भी चला. पत्रकारों ने इसे लेकर उनसे सीधे सवाल पूछा कि क्या आप मुख्यमंत्री होंगी ? जवाब में  उन्होंने कहा कि नहीं. मेरे पास गंगा सफाई जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य है. इसी में चौथे चरण का चुनाव संपन्न हो गया और केशव मौर्य तथा उमा भारती के नाम की चर्चा भी बंद हो गयी.
शेष तीन चरणों के चुनाव में तीन लोगों के नाम प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर चल रहे हैं. इसमें वाराणसी से लेकर ग़ाज़ीपुर बलिया तक चर्चा में हैं, रेलराज्य मंत्री मनोज सिन्हा. गोरखपुर, बस्ती मंडल में इस पद को लेकर चर्चा में हैं, सांसद योगी आदित्य नाथ. लेकिन,शेष तीनों चरण में प्रदेश के नये मुख्यमंत्री के लिए देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह का नाम चल रहा है. इसके लिए लोगों की जुबान पर  एक जुमला है कि जीते तो सीएम, हारे तो पीएम.
इस जुमले के विश्लेषण में कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में बहुमत मिल गया तो शीर्ष सियासत से दरकिनार करने के लिए गुजरात ब्रदर्स खुद राजनाथ सिंह को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बन देंगे. और, बहुमत नही मिला तो गुजरात ब्रदर्स की उलटी गिनती शुरू हो जायेगी. ऐसा हुआ तो सबको साथ लेकर और संघ का हाथ पकड़कर चलने वाले राजनाथ सिंह देश के प्रधानमंत्री होंगे. इसलिए कहा जा रहा है - जीते तो सीएम, हारे तो पीएम.
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