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पूर्वांचल में तो डगमगा रही है भाजपा

पूर्वांचल से लौटकर अमिताभ

नई दिल्ली. पूर्वांचल में भाजपा फिलहाल डगमगा रही है. वाराणसी से लेकर गोरखपुर तक पार्टी की दिक्कत कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. गुरुवार को उत्तर प्रदेश में चौथे दौर के मतदान से ऐन पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का कसाब ( उन्होंने इसकी व्याख्या करते हुए कहा- क यानी कांग्रेस, स यानी समाजवादी पार्टी और ब यानी बहुजन समाज पार्टी) का जुमला उछालना बीजेपी की बेचैनी और बौखलाहट की पोल खोल गया है। 
दरअसल, तीन दौर के मतदान के बाद बीजेपी को ये अहसास हो गया है कि पूर्वांचल में गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव दलित वोटर उनके लिए सिर्फ आंशिक तौर पर ही मददगार साबित हो सकता है. इसलिए अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह विकास की बात किनारे कर चुके हैं और सारी चुनावी मर्यादा ताक पर रखकर खुलकर कब्रिस्तान से लेकर कसाब तक के जुमले उछाल रहे हैं ताकि सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण की बचीखुची संभावनाएं खंगाली जा सकें.
बीजेपी की दिक्कत यह है कि पूर्वांचल में उसका चुनावी अभियान लचर सांगठनिक ढांचे और कमज़ोर उम्मीदवारों के चलते डगमगा रहा है. पार्टी कार्यकर्ता 'इम्पोर्टेड' उम्मीदवारों की वजह से मुंह फुलाए हुए हैं. फतेहपुर की रैली में प्रधानमंत्री ने कब्रिस्तान बनाम श्मशान का जुमला उछाला तो पड़ोस के इलाहाबाद में पार्टी के लिए प्रचार में जुटे कार्यकर्ताओं को जोश आने के बजाय उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लग गईं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी जिस वाराणसी सीट की बदौलत खुद को उत्तर प्रदेश का गोद लिया बेटा बताते हैं वहां का हाल इतना बुरा है कि खुद बीजेपी के स्थानीय नेता कहते हैं, पार्टी दो सीट जीत छाय तो चमत्कार समझिये. हालांकि खबर यह भी है कि नाराज़ चल रहे श्याम राय चौधरी को 'मैनेज' कर लिया गया है. 
उधर, जौनपुर, आज़मगढ़ और गोरखपुर में भी ज़मीनी स्तर पर बीजेपी के खेमे में कोई ऐसा जोश नहीं नहीं नज॔र आ रहा है जिसे देखकर उन मीडिया रिपोर्ट्स की तस्दीक की जा सके जहां बीजेपी की सत्ता में वापसी की सुर्खियां चमक रही हैं. गोरखपुर की 9 सीटों में योगी आदित्यनाथ का प्रभाव शहर में तो है लेकिन उससे बाहर वो बीजेपी को जिताने में कितने कारगर होंगे इसको लेकर संदेह की कुलबुलाहट महसूस की जा सकती है. योगी के बारे में  विरोधियों के अलावा पार्टी के लोग भी कहते हैं कि वो मीडिया के बनाये हुए नेता हैं, पब्लिक के नहीं. 
मोदी और अमित शाह से उलट केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के हालिया बयानों से पार्टी की हालत का बेहतर अंदाज़ा लगाया जा सकता है. राजनाथ सिंह ने माना है कि पार्टी को मुसलमानों को टिकट देना चाहिए था. अखबारों में छपने वाले बड़े-बड़े विज्ञापनों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तमाम रिपोर्टिंग के आधार पर बनाये जा रहे माहौल को दरकिनार कर दें तो पार्टी के नेता भी सारा उत्साह बटोर कर खींच-खांचकर जो आंकड़े देते हैं वो 100 से 125 सीटों तक सिमट जाते हैं. पता नहीं वो लहर कहां है जिसकी चर्चा दिल्ली से लखनऊ तक चल रही है.
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  • शुरुआत तो ठीक ही हुई है महाराज !
  • केशव प्रसाद मौर्य होंगे यूपी के सीएम ?
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